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जब तू मरेगा तो तेरी तेरहवीं में आएंगे डॉ महेश शर्मा, भाजपा नेताओं ने वकील को दी धमकी

Tricity Today Correspondent

NOIDA: भारतीय जनता पार्टी के नेता आपे से बाहर हैं। जब से यूपी में बीजेपी की सरकार बनी है कभी नजर नहीं आने वाले नए नए नेता दादागिरी पर उतारू हैं। नोएडा से पंकज सिंह के टिकट का विरोध करके पार्टी छोड़ने का ऐलान करने वाले केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा के प्रतिनिधि संजय बाली, गौतम बुद्ध नगर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष और महासचिव दो दिनों से सोशल मीडिया पर लोगों को अनर्गल गाली गलौज कर रहे हैं। जिनके खिलाफ पार्टी के संगठन महामंत्री से शिकायत की गई है।

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष और वकील अतुल शर्मा ने केंद्रीय संगठन महामंत्री को शिकायत भेजी है। बताया कि केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा के प्रतिनिधि संजय बाली, गौतमबुद्ध नगर के जिला उपाध्यक्ष राहुल पंडित और महासचिव सेवानंद शर्मा दो दिनों से उनके फेसबुक वॉल पर आकर धमकियां दे रहे हैं। लिखा है कि जल्दी तेरी तेरहवीं होगी तो उसमें हम लोग डॉ महेश शर्मा को लेकर आएंगे। और ऐसा जल्दी होगा।

अतुल शर्मा का आरोप है कि केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ महेश शर्मा इन लोगों के जरिये मेरी हत्या करवाना चाहते हैं। दरअसल, मैंने डॉ महेश शर्मा के काले कारनामों का खुलासा किया है। डॉ महेश शर्मा सांसद बनने से पहले कैलाश अस्पताल समूह के चेयरमैन थे। इसके लिए भूमि आवंटन मामले में उनके खिलाफ सीबीआई जांच हुई। जिसमें गलत ढंग से सीबीआई ने उन्हें फायदा पहुंचाया। महेश शर्मा को लाभ देने वाली पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव को तो सजा हो गई लेकिन लाभ लेने वाले महेश शर्मा बरी हो गए। इतना ही नहीं यह देश का अकेला मुकदमा है जिसे हारने के बाद सीबीआई हाईकोर्ट में अपील करने नहीं गई।

अतुल का कहना है कि मैंने इस मामले में सीबीआई और महेश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। डॉ महेश शर्मा ने नोएडा के नियमों को तोड़कर सड़क के नीचे अपने अस्पताल के लिए सुरंग बनाई है। आवासीय भवनों का वाणिज्यिक उपयोग किया जा रहा है। अब सेक्टर 62 में बनाए जा रहे नए अस्पताल के पीछे पार्क पर कब्ज़ा करके अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है।

अतुल शर्मा का कहना है कि जेवर के कैलाश अस्पताल का निर्माण करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई है। इन सारे मामलों की शिकायत मैंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से की हैं। डॉ महेश शर्मा कभी खुद को सीएम, डिप्टी सीएम और भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष अपने लोगों के जरिए प्रोजेक्ट करवाते हैं। जिले में हत्याएं हो रही हैं, वह लोगों की सुनना तो दूर किसी के आंसू पोंछने नहीं जाते हैं।

अतुल शर्मा का कहना है कि जो लोग मुझे सोशल मीडिया पर धमकी दे रहे हैं, इनके गांवों में भाजपा हारी है। पार्टी में केवल चाटुकारिता के दम पर पद हासिल कर रहे हैं। पार्टी सत्ता में है तो लोगों को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इनके दुष्कर्मों की शिकायतें करना क्या जुर्म है। अगर मैं झूठ बोल रहा हूं तो मेरे खिलाफ कोर्ट में आ जाएं मैं साबित करके दिखा दूंगा। मैंने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को सारे दस्तावेज भेजे हैं। सही मायने में महेश शर्मा अपने कारोबार को बढ़ाने और अपने गलत कामों को छिपाने के लिए राजनीति में हैं।

इस मुद्दे पर डॉ महेश शर्मा से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो सकी। भाजपा नेताओं की धमकियों के स्क्रीन शॉट पाठकों के लिए प्रकाशित किए गए हैं।

महेश शर्मा का चहेता बनने का पूरा फेर
बरौला गांव में दो युवकों की हत्या के बाद डॉ महेश शर्मा की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद महेश शर्मा मौके पर नहीं पहुंचे। भाजपा नेताओं का मानना है कि इस आलोचना के लिए अतुल शर्मा जिम्मेदार हैं। दरअसल, अतुल शर्मा परिजनों से मिलने पहुंचे। पूर्व विधायक गुड्डू पण्डित को साथ लेकर गए थे। इसके बाद बुधवार को गांव में पंचायत हुई। जिसमें सपा, बसपा और कांग्रेस के ब्राह्मण नेता जुटे। डॉ महेश शर्मा सबके निशाने पर रहे। पता लगा है कि दिवाली पर महेश शर्मा को बधाई देने पहुंचे इन नेताओं ने अपने नम्बर बनाने के लिए डॉ शर्मा के कटे पर नमक छिड़का। जमकर फर्जी भड़ास निकाली। महेश शर्मा की नजरों में अपने नम्बर बनाने के लिए एक के आगे एक सोशल मीडिया पर लिख रहा है। पता ये भी चला है कि महेश शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले कुछ युवक इन भाजपा नेताओं के रिश्तेदार हैं।

यह इसके पीछे बड़ी वजह है
जिला भाजपा का अध्यक्ष बदलने की चर्चाएं चल रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि डॉ महेश शर्मा गुर्जर विजय भाटी के बाद फिर किसी ब्राह्मण को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते हैं। इसी कारण खुद को महेश शर्मा का हितैषी दिखाने के लिए सब अतुल शर्मा को ज्यादा से ज्यादा गालियां बक रहे हैं। सारा खेल जिलाध्यक्ष बनने का है। जब जिले में अध्यक्ष की नियुक्ति होती है तो महेश शर्मा का ध्यान खींचने के लिए ये लोग अतुल शर्मा को आगे खड़ा करके अपने हित साधने में जुट जाते हैं। नियुक्ति के बाद मामला शांत पड़ जाता है। दरअसल, इन लोगों को डॉ महेश शर्मा और अतुल शर्मा की कमजोरी का अहसास हो गया है।