Greater Noida : जानिए आखिर क्या है छठ पूजा का महत्व

Mayank Tawer

छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष को मनाया जाने वाला एक हिन्दू त्योहार है। यह त्योहार मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश आदि क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ पूजा भगवान सूर्य और उनकी पत्नी उषा को समर्पित है ताकि मनुष्य के परिवार और आस पास की खुशियों और सुख शांति हमेशा बहाल रहे। 

छठ पूजा वैसे तो हिन्दुओ का त्योहार माना जाता है लेकिन इस पर्व को अन्य धर्म के लोगो को भी मनाते हुए देखा है। इस पर्व को भगवान राम के समय लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था। वही महाभारत के काल में सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घण्टों तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे। सूर्यदेव की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।

छठ पूजा की शुरुवात कहा से हुई

एक कथा के अनुसार किसी काल में राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनायी गयी खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परन्तु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गये और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त ब्रह्माजी की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूँ। हे! राजन् आप मेरी पूजा करें तथा लोगों को भी पूजा के प्रति प्रेरित करें। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी इस कारण ही इस पूजा का नाम छठ पूजा पड़ा। 

हमारे संवाददाता से बात करते हुए ग्रेटर नोएडा की मीना सिंह ने बताया की वैसे तो यह त्योहार हर भारतीय का है। लेकिन कुछ लोग यह त्योहार सिर्फ बिहारियों का ही मानते है जो एक प्रकार से भगवान सूर्य और छठ माता का अपमान करते है। उन्होंने बताया की भगवान के प्रति इस प्रकार की सोच नहीं रखनी चाहिए। छठ पूजा अपने बच्चों के लिए रखा जाता है। और जिसको संतान को सुख प्राप्त नहीं होता उसके छठ माता की आराधना करने से संतान का सुख प्राप्त होता है।