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आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की बड़ी कार्रवाई

Mayank Tawer

अमेरिका ने एक बार फिर पाकिस्तान पर नजरें टेढ़ी कर दी हैं। हाफिज सईद को आतंकी सूची में शामिल करने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान से जुड़े तीन आतंकियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया है। अमेरिका ने इस घोषणा के बाद पाक को फटकार लगाते हुए कहा है कि वह अपने देश में आतंकियों और आतंकी संगठनों की खतरनाक पनाहगाहों को खत्म करे।

अमेरिका ने बुधवार को जिन तीन पाकिस्तानियों को ग्लोबल आतंकी घोषित किया है उसमें रहमान जेब फकीर मुहम्मद, हिजबुल्लाह अस्तम खान और दिलावर खान नादिर खान की संपत्ति व समस्त लाभ अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में ब्लॉक कर दिए।

यही नहीं अमेरिकी नागरिकों को भी तीनों के साथ किसी भी लेन-देन में जुड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। अफगानिस्तान में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को समर्थन देने के आरोपी छह लोगों को ब्लैकलिस्ट करने के दो हफ्ते बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इन तीनों को लश्कर-ए-ताइबा और अन्य समूहों से संबंध रखने के आरोप में ग्लोबल आतंकवादियों की सूची में शामिल किया।

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई दक्षिण एशिया में आतंकी सहयोग नेटवर्क को बाधित करने के अमेरिकी प्रयासों के तहत की गई है। अमेरिकी ट्रेजरी में आतंकवाद और वित्तीय खुफिया प्रभाग के सचिव सीगल मंडेलकर ने बताया कि हम उन कट्टरपंथियों को बेनकाब करना चाहते हैं जो दक्षिण एशिया में आतंकी संगठन का समर्थन करते हैं और अवैध वित्तीय नेटवर्क चलाते हैं। इस धन का उपयोग आतंकी संगठनों को विस्फोटकों और तकनीकी सहायता हासिल करने के रूप में किया जाता है।

1. रहमान जेब फकीर मुहम्मद: रहमान ने लश्कर-ए-ताइबा को वित्तीय मदद और तकनीकी सहयोग मुहैया कराया। खाड़ी देशों से लश्कर के लिए कई साल तक धन एकत्रित करने वाले रहमान ने पाक से खाड़ी देशों तक शेख अमीनुल्ला को यात्रा कराई जिसे 2009 में अलकायदा, लश्कर व तालिबान को समर्थन देने के लिए आतंकी घोषित किया गया।

2. हिजबुल्लाह अस्तम खान: 2016 तक खान ने अमीनुल्ला को मदद दी और पेशावर स्थित एक मदरसा के वित्तीय अधिकारी के रूप में काम किया। उसने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में एक आधुनिक विस्फोटक उपकरण विशेषज्ञ के रूप में काम किया और गठबंधन सेना के खिलाफ आईईडी लगाए। 

3. दिलावर खान नादिर खान: दिलावर ने अमीनुल्ला के सहायक के रूप में काम किया और उसे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन समेत धन हस्तांतरण की सुविधा मुहैया कराई। 2013 में वह दलावर गंज मदरसा नेताओं में से एक रह चुका है जिसे ओएफएसी ने लश्कर और तालिबान को वित्तीय मदद के लिए नामित किया।