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पत्रकार के सवाल पूछने पर भड़के दादरी विधायक, और करवाया ये हाल 

Mayank Tawer

GREATER NOIDA - केन्द्र ओर प्रदेश में भाजपा की सरकार हैं। इसके साथ ही भाजपा अपनी गलत नीति के कारण गौतम बुद्व नगर में हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती हैं। सत्ता का नशा विधायकों और कार्यकर्ताओं के सर चढ़ कर बोल रहा है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान जिस उत्तर प्रदेश में जंगलराज कायम होने का मुद्दा जोर शोर से उठाया और अपनी सरकार बनने पर कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के वादे किये थे। लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद भी किये हुये सारे वादे फेल नजर आ रहे है सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेता पुलिस और प्रशासानिक अधिकारियों के साथ साथ पत्रकारों से भी अभद्र व्यवहार करने से नही चूकते हैं और वही कुछ भाजपा नेता तो थानों के चक्कर काटते भी नजर आते हैं।

हाल ही में जिला गौतम बुद्ध नगर के कचैंडा गांव ग्रेटर नोएडा का एक मामला प्रकाश में आया है। यह गावं सांसद आर्दश योजना के तहत गोद लिया हुआ गांव है। इस योजना के तहत गावों का निर्माण और विकास किया जाता है। लेकिन इस योजना के कर्ताधर्ता ही इस योजना को धराशाही करने पर तुले है। 10 फरवरी को जब गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा विकास कार्य का निरीक्षण करने कचैंडा गाँव पहुंचे। तभी कार्यक्रम में मौजूद दादरी विधायक तेजपाल नागर से स्थानीय पत्रकार ने नौ महीने पूर्व उनके द्वारा कचैंडा गाव के स्कूल को कक्षा छह सात आठ की मान्यता दिलाने का वादा याद दिलाया गया तो वह भडक गए। उन्होंने पत्रकार को धमकाते हुये कहा कि, आप मुझे कमजोर मत समझो मैं एक ताकतवर विधायक हूँ। 

दरअसल, 12 मई 2017 को दादरी के विधायक तेजपाल नागर कचैंडा गांव में आए थे। जहां पर मौजूद ग्रामवासियो ने महाराजा नैन सिंह इंटर कॉलेज की छठी सातवी आठवी कक्षा की मान्यता दिलाने की मांग की गई थी। जिसे उन्होंने पूरा करने का वादा किया था। लेकिन आज तक भी वह वादा पूरा नहीं किया गया। इसका जवाब पूछने पर ही विधायक पत्रकार पर ही भड़क गये। मान्यवर विधायक ने कहा कि आम आदमी की इतनी हिम्मत नही होती कि वो स्थानीय विधायक से कुछ पूछ सके। 

इस भारत वर्ष में प्रत्येक मानव स्वतंत्र है वो अपनी बात किसी भी माध्यम से किसी भी नेता और किसी दूसरे मनुष्य से पूछ सकता है लेकिन जब नेता ही पत्रकारों के साथ ऐसे व्यवहार करेगें तो देश का भविष्य केसा होगा। अगर आम आदमी पत्रकारों के माध्यम से गांव के विकास कार्यो की जानकारी लेते है तो उन्हे धमकाया जाता है। इससे आसानी से समझा जा सकता है कि आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गावों की क्या स्थिति होगी। 

जब इस सम्बध में पीड़ित पत्रकार से बात की तो उन्होंने बताया कि हमारे सांसद और विधायक लोगों को वादे करके उनको उल्लू बनाते हैं। क्या किसी प्रतिनिधि को उसका वादा याद दिलाना गुनाह है ? वादा याद दिलाने पर विधायक द्वारा पत्रकार को यह कहना क्या दर्शाता है कि वह ताकतवर है।जनसभा में अपनी ताकत का दिखावा करने की बजाय अगर विधायक अपना वादा पूरा करे तो सारी समस्या ही खत्म हो जाए। जनप्रतिनिधि को वादे करके जनता का मुर्ख नही बनाना चाहिए। क्या इसी दिन को देखने के लिए हम इन्हें संसद और विधानसभा में भेजते हैं।

आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश में ये पहली बार नही हुआ, वाराबंकी में पिछले साल भाजपा सांसद ने एक एसपी को खाल खिचवाने की धमकी दी। वही बलरामपुर में भाजपा विधायक के समर्थक ने दंबगगई दिखाते हुये पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया व कैमरा छीन कर फोटो डिलीट कर दिये। पिछले साल ही गुडगांव के विधायक के कार्यालय के बाहर ही एक वरिष्ट पत्रकार के साथ भाजपा नेता ने अभद्र व्यवहार व मारपीट की। ऐसे बहुत से उदहारण भाजपा नेताओं के है जिनकी गिनती खत्म होने का नाम नही लेती।