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चाकू से पेड़ पर महबूबा का नाम खोदने से अच्छा है की.....

Mayank Tawer

भारत देश मे बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए पर्यावरण का बड़ा नुकसान हो रहा है। दिन प्रतिदिन देश के अनेक राज्यो में वनों की संख्या कम होती नजर आ रही है। उसी को देखते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो अपलोड हुई है, जो वन सुरक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर कर रही है।

दरअसल, फेसबुक पर एक व्यक्ति शिवम ठाकुर ने एक पोस्ट अपलोड की है। जिसमे उन्होंने अपने ग्राम पंचायत सरजा के बहार लगे एक बोर्ड की फोटो अपलोड की है, जिसमें लिखा है कि, चाकू से पेड़ पर महबूबा का नाम खोदने से अच्छा है, अपनी महबूबा के नाम का एक पेड़ लगाए।

भारत के इस सरजा ग्राम पंचायत के बाहर लगा यह बोर्ड वनसंरक्षक के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर कर रहा है, और खासकर उन प्रेमी जोड़ों को जो वनों पर चाकू से अपना नाम लिखते है।

1973 में भारत में चिपको आंदोलन की शुरुवात हुई थी। जिसमे वनो की रक्षा के लिए लोगो ने वन की कटाई के दौरान वनो को अपनी बाहों में जकड लिया था। चिपको आन्दोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें स्त्रियों ने भारी संख्या में भाग लिया था, इतना ही नहीं 27 महिलाओं ने प्राणों की बाजी लगाकर असफल कर दिया था। इस आन्दोलन की शुरुवात भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा, कामरेड गोविन्द सिंह रावत, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी के नेत्रत्व मे हुई थी।