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जेवर एयरपोर्ट के लिए चल रहा 'भूदान' और विनोबा जी की भूमिका में धीरेंद्र सिंह

Mayank Tawer

नोएडा - जेवर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का रास्ता लगभग साफ हो गया है। एक सप्ताह पहले तक किसान जमीन देने को राजी नहीं थे। उन्हें सरकार से मिल रही जमीन की कीमत कम लग रही थी। हालात बिगड़ते देखकर जेवर के भाजपा विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह ने गांवों की यात्रा शुरू की। वह किसानों से विकास के लिए जमीन दान मांग रहे हैं। उनकी अपील पर रोजाना सैकड़ों  किसान जमीन देने की लिए सहमति पत्र सौंप रहे हैं।

जेवर एयरपोर्ट के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को पहले चरण में  हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसके लिए 6 गांवों में भूमि अधिग्रहण शुरू किया गया। जमीन की दर 2300 रुपये प्रति वर्ग मीटर रखी गई। किसान इस दर पर जमीन देने को राजी नहीं थे। किसान कम से कम 3600 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर अड़ गए। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 70 फीसदी किसानों की ओर से जमीन देने की सहमति लाजिमी है।

राजस्थान जा सकता था एयरपोर्ट
जेवर में बात बिगड़ती देखकर केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट राजस्थान में अलवर के आसपास शिफ्ट करने पर विचार शुरू कर दिया। ऐसे में यूपी सरकार को किरकिरी होती नजर आई। खुद सीएम ने विधायक धीरेंद्र सिंह से बात की और कहा कि इससे अच्छा होता कि एयरपोर्ट आगरा में बना लिया जाता। आपके यहां तो किसान जमीन देने को तैयार नहीं हैं। इतनी लंबी प्रक्रिया और एक वर्ष की मेहनत पर पानी फिरने वाला है।

विधायक ने दान मांगना शुरू किया
विधानसभा सत्र से वापस लौटते ही विधायक धीरेंद्र सिंह गांव-गांव घूम रहे हैं। किसानों से एयरपोर्ट के लिए जमीन दान मांग रहे हैं। धीरेंद्र सिंह का कहना है, हम जो कीमत किसान को दे रहे हैं या इसे  बढ़ाकर और कितना भी कर दें, वह जमीन और किसान के लिए मामूली ही है। जमीन हमारी मां है। इस पर हमारी न जाने कितनी पुश्तें रही हैं। इसका क्या मूल्य हो सकता है। किसान को जो देंगे, वह मामूली ही होगा। सही मायने में किसान हमें भूदान ही कर रहे हैं। उन्हें जो राशि सरकार देगी, वह सहायता मात्र है। कीमत नहीं हो सकती है।

किसानों को मानने में कामयाबी मिली
विधायक धीरेंद्र सिंह एक-एक किसान के घर जा रहे हैं। हाथ और पल्ला पसारकर जमीन देने की अपील कर रहे हैं। इसका असर भी हुआ है। शुक्रवार तक 916 हेक्टेयर जमीन देने के लिए किसान सहमति पत्र दे चुके हैं। यह कुल जरूरत का 75 फीसदी से ज्यादा है। सरकार को 1220 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है।

प्रशासनिक भूल भारी पड़ीं
जेवर एयरपोर्ट बनाने की प्रक्रिया के दौरान सरकार बड़े अफ़सरों की कई भूल भारी पड़ीं। जिससे किसान नाराज हो गए। सबसे पहले सरकार ने अचानक उन 6 गांवों को शहरी क्षेत्र घोषित कर दिया, जिनकी जमीन पर एयरपोर्ट बन रहा है। दरअसल, शहरी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण करने के लिए सर्किल रेट का दो गुना ही मुआवजा देना पड़ता है। जबकि, गांवों में चार गुना देने का प्रावधान है। इससे किसानों ने सरकार पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। इसके बाद सरकार ने किसानों को समझाने की बजाय धमकाने की नीति अपनाई। नागरिक उड्डयन विभाग के प्रमुख सचिव ने मीडिया में बयान दिया कि जेवर एयरपोर्ट लोकहित की योजना है। इसके लिए जमीन लेते वक्त किसानों की सहमति लेना जरूरी नहीं होगा। इससे किसान बुरी तरह उखड़ गए।

'इस इलाके के लिए यह इस सदी का सबसे बड़ा तोहफा है। अगर हम चूक गए तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को इसका नुकसान भुगतना पड़ेगा। आज हो सकता है सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं कम लग रही हैं लेकिन एयरपोर्ट अपार सम्भावनाएं लेकर आएगा। हमारे दोनों पड़ोसी राज्य टकटकी लगाकर देख रहे हैं कि किसी तरह जेवर में एयरपोर्ट ना बने तो उन्हें मौका मिल जाएगा। हमारी आज की समझदारी अगले सैकड़ों साल काम आएगी।'
धीरेंद्र सिंह, विधायक, जेवर