शोध : दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है खाने में अधिक आयरन लेना

noida , tricity today reporter

पिछले कुछ समय से दुनिया भर के वैज्ञानिकों में इस बात पर बड़ी बहस छिड़ गई है कि आयरन की अधिक मात्रा लेने से दिमाग को छति पहुंच सकती है या नहीं। कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी अधिक मात्रा से पार्किंसन जैसा रोग हो सकता है, वहीं कई वैज्ञानिकों का दावा है कि आयरन की कमी से पार्किंसन हो सकता है। इसकी कमी से एनिमिया जैसी बीमारी हो सकती है।

हाल के कई शोध में यह बात सामने आई है कि आयरन का अधिक इस्तेमाल दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अधिक सेवन से पार्किंसन जैसी बीमारी भी हो सकती है। उनके मुताबिक यह दिमाग के एक खास हिस्से में कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देता है। वहीं कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक ये कोशिकाएं आयरन की कमी की वजह से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

अधिक मात्रा इसलिए है नुकसानदायक

अमेरिका की वेन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रेज के मुताबिक शरीर की हर कोशिका के लिए आयरन जरूरी है लेकिन इसकी मात्रा कम या अधिक होने पर क्या प्रभाव होते हैं, यह अभी विवादित विषय है। उनके मुताबिक आयरन कोशिका में ऊर्जा एकत्रित करने वाले एटीपी मॉलीक्यूल पैदा करता है। रेज का कहना है कि जब आयरन शरीर में डोपामाइन के साथ मिलता है तो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। डोपेमाइन एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो दिमाग में मौजूद कोशिकाओं के बीच सिग्नल का आदान प्रदान करता है। वहीं एक अन्य शोधकर्ता के मुताबिक डोपेमाइन के साथ मिलकर आयरन शरीर में एक जहरीला पदार्थ पैदा करता है जो दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।​​​​​​​

आयरन की कमी से दिमाग को नुकसान

आयरन की अधिक मात्रा को नुकसानदायक बताने वाले वैज्ञानिकों के उलट अमेरिकी की ड्यूक यूनिवर्सिटी के जीवविज्ञानी नेंसी एंड्र्यूज के मुताबिक आयरन की कमी से न्यूरॉन (दिमाग की कोशिकाएं) नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने एक चूहे के ऊपर इसका परीक्षण किया। इस परीक्षण में चूहे के अंदर आयरन की कमी की गई तो डोपेमाइन ने दिमाग की कोशिकाओं को मुरझाना शुरू कर दिया। उन्होंने आयरन की कमी से पार्किंसन जैसी बीमारी होने का दावा करने वाले एक शोध का भी जिक्र किया। इस शोध में दावा किया गया है कि पांच साल की अवधि में लगातार रक्त दान करने वाले व्यक्ति के शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। इससे उन्हें पार्किंसन जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।​​​​​​​

क्या है पार्किंसन रोग

यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ा एक रोग है जिसमे रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं। इस रोग के शुरुआती लक्षणों का पता लगाना आसान नहीं होता। शुरुआत में इसका एहसास नहीं होता लेकिन जब महीनों बाद कंपन तीव्र हो जाता है तो इसका अहसास होता है। इस रोग की शुरुआत में कंपन हाथ की एक कलाई या अधिक उंगलियों का होता है। यह पहले कम रहता है और बाद में अधिक देर तक रहने लगता है व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है।

शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता आयरन

शरीर में आयरन का मुख्य काम खून में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करना है। इतना ही नहीं हीमोग्लोबिन के निर्माण का काम भी आयरन ही करता है। हीमोग्लोबिन शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सजीन पहुंचाने का काम करता है। भोजन में अगर लगातार आयरन की कमी बनी रहे तो व्यक्ति में खून की कमी या एनिमिया हो सकता है। इसकी कमी की वजह से खून में हीमोग्लोबिन का बनना बहुत कम हो जाता है। कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से उनमें ऊर्जा की कमी हो जाती है।​​​​​​​

एनिमिया के लक्षण

शारीरिक कमजोरी, थकावट, भूख की कमी, अंगों में दर्द, निस्तेज आंखें, पीला चेहरा और हाथ-पैर में सूजन शरीर में एनिमिया के लक्षण है। वैसे तो शुद्ध रूप से आयरन हमारे शरीर के लिए हानिकारक है लेकिन यही पोषक तत्व अगर भोजन के जरिए शरीर में जाए तो यह काफी लाभदायक होता है। आंत जैसी ही भोजन से लौह तत्व चूसती हैं, वैसे ही खून में मौजूद ट्रांसफेरिन नामक प्रोटीन इसके साथ जुड़ जाता है। फिर आयरन खूल के साथ शरीर में जहां भी जाता है तो ट्रांसफेरिन इसके विषैले प्रभाव से शरीर की रक्षा करता है।​​​​​​​

इन खाद्य पदार्थों में है भरपूर आयरन

शरीर में आयरनकी कमी को पूरा करने के लिए भोजन में मसूर की दाल, हरी सब्जियां जैसे मेथी और सरसों का साग आदि लेना चाहिए। यह लाल मांस, चिकन और मछली में भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा अमरूद, सेब, अनार और आम जैसे फलों में भी यह भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। गुड़ भी हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने में मदगार है।

कितना आयरन जरूरी

-शरीर में आयरन की कितनी मात्रा जरूरी है, यह लोगों की उम्र , स्वास्थ्य और लिंग पर निर्भर करता है।
-नवजात बच्चों को किशोरों के मुकाबले अधिक आयरन की जरूरत होती है क्योंकि उनका शरीर तेजी से बढ़ता है।
-बचपन में लड़के और लड़कियों को समान मात्रा में आयरन जरूरी होता है।
-4 से 8 वर्ष तक के बच्चों को रोज 10 मिलीग्राम आयर और 9 से 13 साल के बच्चों को 8 मिलीग्राम आयरन जरूरी होता है।
-19 से 50 साल की महिलाओं को हर रोज लगभग 18 मिलीग्राम और इसी आयु वर्ग के पुरुषों को 8 मिलीग्राम आयरन जरूरी है।

अधिक आयरन भी हानिकारक

-अग्नाशय में आयरन की अधिकता से उसकी इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे हीमोक्रोमेटोसिस के मरीज डायबिटीज के मरीज हो जाते हैं।
-लीवर में आयरन की अधिकता से सिरोसिस बीमारी हो सकती है।
-इसकी अधिक मात्रा हृदय को भी नुकसान पहुंचाती है।
-हाथ-पैर के जोड़ों में अधिक लोहा जमा हो जाने से गठिया रोग हो जाता है।
आयरन की अधिक मात्रा पुरुषों में शुक्राणु पैदा करने वाली कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर सकती है।

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