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बाबा साहेब यूपी के थानों में ‘कैद‘

Tricity Today Correspondent/Lucknow

 

संविधान के रचियता डा.बाबा साहेब भीमराव अंबेड़कर को अपनी विरासत बताने और दलितों के वोटों पर डोरे डालने के लिए कोई राजनीतिक दल पीछे नहीं रहना चाहता। कांग्रेस उन्हें अपना तो बसपा अपना बताती है। भाजपा तो दो कदम आगे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को उन्हीं की बदौलत प्रधानमंत्री बताते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के थानों में बाबा साहेब की प्रतिमाएं दशकों से धूल फांक रही हैं। जाले लगे पड़े हैं। कोई इस महापुरुष को ‘मुक्ति’ दिलाने के लिए आगे नहीं आता।

 

जब उत्तर प्रदेश में दूसरी बार मायावती मुख्यमंत्री बनीं तो गौतमबुुद्ध नगर के दनकौर कस्बे में दलित समाज के लोग बाबा साहेब डा.भीमराव अंबेड़कर की प्रतिमा कस्बे में स्थापित करना चाहते थे। 01 मई, 2003 को प्रतिमा स्थापित करने का काम शुरू हुआ। कुछ लोगों ने विरोध कर दिया। पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाने के नाम पर प्रतिमा को थाने में बंद कर दिया। 13 वर्षों से यह प्रतिमा थाने में धूल फांक रही है। दलित कार्यकर्ता सुनील गौतम ने यह मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया तक पहुंचाया लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।

 

ठीक ऐसा ही मामला शाहजहांपुर जिले का है। पहली बार मायावती मुख्यमंत्री बनीं तो दलितों ने 29 जुलाई 1995 को कटरा विधानसभा क्षेत्र के मीरानपुर कटरा चैराहे पर बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने का प्रयास किया। कस्बे के कुछ लोगों ने विरोध कर दिया। पुलिस और प्रशासन ने प्रतिमा को उठाकर थाने में बंद कर दिया। 21 वर्षों से यह प्रतिमा थाने में ही कैद है।

 

दलित नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रवि गौतम ने सोमवार को अपने समर्थकों की बैठक बुलाकर ऐलान किया कि यह शर्म की बात है कि दशकों से बाबा साहेब की प्रतिमाएं थानों में बंद हैं। प्रदेश में इस दौरान मायावती की सरकार थीं। वह तो खुद को बाबा साहेब की सबसे बड़ी अनुयायी बताती हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार से तो कोई अपेक्षा ही नहीं है, जब अनुयायियों ने ही कुछ नहीं किया। इन क्षेत्रों से बसपा के विधायक हैं। कुछ नहीं किया है। मैं चेतावनी देता हूं कि अगर जल्दी बाबा साहेब की प्रतिमाओं को निकालकर कहीं अच्छी जगह स्थापित नहीं करवाया तो आंदोलन करूंगा।