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जानिए, भगवान शनिदेव को उनकी पत्नी ने इस कारण दिया था श्राप

TriCityToday Correspondent

 

जीवन में ग्रहों का प्रभाव बहुत प्रबल माना जाता है। अगर शनि ग्रह अशांत हो जाएं तो जीवन में कष्टों का आगमन शुरू हो जाता है। शनि, भगवान सूर्य और छाया के पुत्र हैं। शनि को क्रूर दृष्टि का ग्रह माना जाता है, जो किसी के भी जीवन में उथल-पुथल मचा सकते हैं। लेकिन भगवान शनि देव को उनकी पत्नी ने श्राप क्यों दिया था, इस बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है।

 

आइए जानें, शनिदेव की क्रूर दृष्टि के पीछे का सच और कथा
ब्रह्मपुराण के अनुसार, बचपन से ही शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के भक्त थे। बड़े होने पर इनका विवाह चित्ररथ की कन्या से किया गया। इनकी पत्नी परम तेजस्विनी थीं और एक बार पुत्र प्राप्ति की इच्छा से वे भगवान शनि देव के पास पहुंची। किन्तु शनि देव भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान में मग्न थे। उनकी पत्नी प्रतीक्षा करते हुए थक गईं। क्रोध में आकर उन्होंने शनि को श्राप दे दिया कि आज से आप जिसे देखोगे वह नष्ट हो जाएगा।

 

जानें क्या है शुक्रवार को दही खाने का महत्व
ध्यान टूटने पर जब शनिदेव ने अपनी पत्नी को समझाया तो उन्हें अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ। लेकिन बोले गए वचन तो वापस नहीं लिए जा सकते थे। उस दिन से शनिदेव अपना सिर नीचा रखने लगे क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके देखने मात्र से किसी का अनिष्ट हो जाए। इसी कारण शुक्रवार को दही खाने का महात्म्य है।

 

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अगर शनि रोहिणी-शकट भेदन कर दें तो पृथ्वी पर 12 वर्ष का अकाल पड़ सकता है। अगर ऐसा कभी हुआ तो किसी भी प्राणी का बचना मुश्किल है। इस ग्रह और नक्षत्र में भगवान शनि की दृष्टि सीधी होती है।

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