बड़ी ख़बरें

महंगा लगा सरकारी रेल का किराया तो लोगों ने पैसे इकट्ठा कर चला डाली सस्ती ट्रेन

Tricity Today Correspondent/New Delhi

जर्मनी में आम लोग महंगी सरकारी ट्रेन सेवा से परेशान थे। इससे बचने के लिए उन्होंने पैसे इकट्ठे कर दुनिया की पहली क्राउड फंडिंग ट्रेन शुरू कर दी। जर्मनी की सरकारी रेल के मुकाबले लोगों से पैसे इकट्ठा कर चलाई गई ट्रेन का किराया पांच गुना कम है।

दरअसल जर्मनी के रेल नेटवर्क में सरकारी कंपनी डॉयचे वॉन का एकाधिकार है। यह कंपनी क्षेत्रीय ट्रेनों के संचालन के अलावा रेलवे ट्रैक का रखरखाव भी करती है। हालांकि डॉयचे वॉन से लोगों कि यह शिकायत है कि इसके अंतर्गत आने वाली ट्रेनों का टिकट काफी महंगा होता है। इसी वजह से जर्मनी में बड़ी संख्या में लोग इधर उधर जाने के लिए कार या सस्ते हवाई टिकट का इस्तेमाल करते हैं। महंगे ट्रेन टिकट के चलते बीते कुछ सालों में सस्ती बस सेवाएं भी शुरू हुई हैं।

ऐसे चलाई पांच गुना कम किराये वाली ट्रेन 

जर्मनी के निवासी डेरेक लाडेविग ने महंगी रेल यात्रा का तोड़ निकालने के लिए लोगों से पैसा इकट्ठा कर नई रेल चलाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने एक स्टार्टअप कंपनी लोकोमोर खोली और पैसा जुटाने के लिए उन्होंने आम लोगों से अपील की। लाडेविग ने क्राउड फंडिंग के जरिए साल भर के अंदर 5 लाख यूरो जुटा लिए। इस पैसे से उन्होंने 1970 के दशक की एक पुरानी ट्रेन की मरम्मत कराई। पुराने लुक को बरकरार रखते हुए गाड़ी को नई सुविधाओं से लैस किया। 14 दिसंबर की सुबह यह रेलगाड़ी अपनी पहली यात्रा पर स्टुटगार्ट शहर से जर्मन राजधानी बर्लिन के लिए रवाना हुई। साढ़े छह घंटे के सफर के बाद गाड़ी बर्लिन पहुंची और दोपहर बाद वापस लौटी। डॉयचे बान की आईसीई ट्रेन में स्टुटगार्ट से बर्लिन का टिकट 100 यूरो से भी ज्यादा महंगा है। वहीं क्राउड फंडिंग से शुरू हुई रेलसेवा सिर्फ 22 यूरो में बर्लिन पहुंचा रही है। लोकोमोर के संस्थापक लाडेविग का कहना है कि उनकी ट्रेन का टिकट हमेशा डॉयचे बान से काफी सस्ता होगा। डिमांड बहुत  ज्यादा होने पर टिकट का दाम थोड़ा बढ़ाया जाएगा ताकि लोगों के पैसे लौटाए जा सकें।

संबंधित खबरें