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जान लीजिए मोदी जी के कैशलैस इंडिया की हकीकत

Tricity Today Correspondent/New Delhi

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी योजनाओं के लिए अच्छी खबर नहीं है। कैशलेस इंडिया की उनकी योजना को बड़ा झटका लग सकता है। ऐसोचैम और डिलॉयट के संयुक्त ताजा सर्वेक्षण में बताया गया है कि देश की 72 फीसदी जनता तो इंटरनेट का इस्तेमाल ही नहीं कर रही है। ऐसे में देश को डिजिटल और कैशलेस बनाने का अभियान आसान नहीं है। ताज्ज्जुब की बात तो ये है कि देश में इंटरनेट की जानकारी देने के लिए किताबों, स्कूल या काॅलेजों इंतजाम नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के ग्रामीण इलाकों में डिजिटल क्रांति कोसों दूर है।

 

95 करोड़ लोग इंटरनेट से अभी दूर
देश में नोटबंदी के बाद डिजिटल क्रांति लाने की मुहिम की हकीकत क्या है? जान लीजिए। निराशा होगी, दरअसल देश की सवा अरब आबादी में से 95 करोड़ लोग अब भी इंटरनेट की पहुंच से दूर हैं। एसोचैम और डिलॉयट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में सबसे तेजी से स्मार्ट मोबाइल फोन यूजर्स बढ़ने के बावजूद भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या अभी केवल 34.3 करोड़ है।

 

ग्रामीण इलाकों में बेहद कमजोर नेटवर्क
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में अब भी 55 हजार गांव मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से दूर हैं। करीब 1600 भाषाएं बोली जाती हैं। स्थानीय स्तर पर अधिकतर देशवासी स्थानीय भाषा में ही बात करते हैं। ऐसे में मोबाइल कंपनियों के लिए जहां एक ओर दूर-दराज के क्षेत्रों में मोबाइल पहुंचाना लाभकारी नहीं लग रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी तौर पर कुछ भाषाएं मोबाइल में स्थान नहीं बना सकी हैं। डिजिटल साक्षरता की दर शहरी क्षेत्रों में बेहद कम है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र इससे लगभग पूरी तरह से अंजान हैं।

 

स्कूलों में डिजिटल साक्षरता की जरूरत
एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि डिजिटल लिटरेसी की जरूरत है। देश के सभी स्कूलों, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रमों में इसे शामिल करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुशल कर्मचारियों की बहुत कमी है। अनुमान के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों में से महज 2.3 फीसदी डिजिटल के जानकार हैं। जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 50 फीसदी है।

 

डिजिटल लिटरेसी में वेस्ट यूपी बहुत पीछे
डिजिटल लिटरेसी पर बात करें तो वेस्ट यूपी काफी पीछे है। वेस्ट यूपी में एक हजार से ज्यादा सीबीएसई और आइसीएसई के स्कूल हैं। जिनमें अधिकतर में कंप्यूटर शिक्षा पर जोर दिया जाता है। इसके अलावा करीब 4000 माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें राजकीय हाईस्कूल और इंटर काॅलेजों में कहीं भी कंप्यूटर शिक्षा नहीं की बराबर है। आईसीटी योजना में बने कंप्यूटर लैब निष्क्रिय हैं। सहायता प्राप्त स्कूलों में कंप्यूटर लैब हैं, लेकिन वहां कुशल ट्रेनर नहीं हैं। ऐसे में हम देश के भविष्य को किस तरह से डिजिटल की शिक्षा दे सकते हैं।

 

2020 में इतने हो जाएंगे इंटरनेट यूजर, लेकिन चीन से बहुत पीछे
देश में सस्ते स्मार्ट मोबाइल फोन की उपलब्धता और बढ़ते यूजर्स की संख्या को देखते हुए एसोचैम का अनुमान है कि वर्ष 2020 तक देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 34.3 करोड़ से बढ़कर 60 करोड़ हो जाएगी। यह अनुमान इंटरनेट की 4-जी और 3-जी सेवाओं और भारतनेट योजना के विस्तार से लगाया जा रहा है। चीन में 50 फीसदी इंटरनेट यूजर्स की तुलना में भारत में 28 प्रतिशत इंटरनेट प्रयोक्ता हैं।