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EXCLUSIVE: इन आठ लोगों के पास है दुनिया की आधी संपत्ति, दुनिया का हर तीसरा गरीब भारतीय

Tricity Today Correspondent/New Delhi


ऑक्सफेम ने ताजा रिपोर्ट जारी की है। जिसके मुताबिक आठ व्यक्तियों के पास पूरी दुनिया की आधी संपत्ति है। इससे हमारे समाज में विभाजन का खतरा पैदा होता है। दावोस में ‘विश्व आर्थिक मंच’ की शुरूआत से पहले यह बात ऑक्सफेम ने कही है।

जिन आठ उद्योगपतियों का जिक्र ऑक्सफेम ने किया है, उनमें अमेरिका के छह, स्पेन और मेक्सिको के एक-एक उद्योगपति शामिल हैं। ऑक्सफेम के अनुसार, इन उद्योगपतियों के पास जितनी संपत्ति है, वह संपत्ति दुनिया के 3.6 अरब गरीब लोगों के पास मौजूद संपत्ति के बराबर है।

 

उद्योगपतियों का चयन फोब्र्स की अरबपतियों की सूची से किया गया है। जिनमें माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स, फेसबुक के सह-संस्थापक मार्क जकरबर्ग, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोज शामिल हैं। ऑक्सफेम ने विश्व में अमीर और गरीबों के बीच के विशाल अंतर और मुख्यधारा की राजनीति में उत्पन्न हो रहे असंतोष को सामने रखा है।

 

एक नई रिपोर्ट ‘एन इकॉनोमी फॉर द 99 पर्सेंट’ में ऑक्सफेम ने कहा, ‘‘ब्रेग्जिट से लेकर डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति अभियान की सफलता तक नस्लवाद में वृद्धि और मुख्यधारा की राजनीति में अस्पष्टता से चिंता बढ़ रही है। वहीं, संपन्न देशों में अधिक से अधिक लोगों में यथा स्थिति बर्दाशत नहीं करने के संकेत भी अधिक दिख रहे हैं।

 

दुनिया का हर तीसरा गरीब व्यक्ति भारतीय है
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में 90.2 करोड़ लोग भारी मुफलिसी में अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। खास बात यह है कि इसमें से 30 करोड़ लोग भारत में गुजर बसर कर रहे हैं। दुनिया में इस समय 7.2 अरब से ज्यादा की जनसंख्या है। जबकि भारत में अकेले 1.2 अरब जनसंख्या है। इस लिहाज से एक ओर जहां दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है, वहीं दुनिया का हर तीसरा गरीब व्यक्ति भी भारतीय है।
 
48 रुपये कमाने वाला गरीब नहीं
भारत में गरीबी रेखा निर्धारित करने के लिए रंगराजन कमेटी ने रिपोर्ट दी थी। इस कमेटी के मुताबिक शहरों में हर रोज 47 या इससे कम रुपये कमाने वाला व्यक्ति ही गरीब है। इसी तरह गांवों में 33 या इससे कम रुपये कमाने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे माना जाएगा। रंगराजन कमेटी ने गरीबी रेखा का पैमाना तय करने की जो सिफारिश की है, वह 2011 में लागू हुई तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट से कोई ज्यादा बेहतर नहीं है। तेंदुलकर कमेटी के मुताबिक शहर में 33 रुपये और गांव में 27 रुपये से अधिक कमाने वाले को गरीब नहीं माना गया था। तेंदुलकर कमेटी की गरीबी की परिभाषा को माना जाए तो साल 2011-12 में भारत में 21.9 फीसदी लोग गरीब थे। हाल में आई रंगाराजन कमेटी की गरीबी की परिभाषा को माना जाए तो 2011-12 में 29.5 फीसदी भारतीय गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे।
 
बदलती रही है गरीबी की परिभाषा
भारत में गरीबी की परिभाषा बदलती रहती है। इस परिभाषा से गरीबी के आंकड़े भी बदल जाते हैं। यह बड़ी विचित्र बात है कि देश में कभी गरीबी बढ़ जाती है तो कभी कम हो जाती है। 1970 के दौर से ही गरीबी की परिभाषा विवादों में रही है। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन 2,400 कैलोरी और शहरी इलाकों में 2,100 से कम कैलोरी पाने वालों को गरीब माना जाता था। यानी गांवों में हर महीने 49 रुपये कमाने वाले को और शहरों में हर महीने 56 रुपये या इससे कम कमाने वालों को ही गरीब माना जाता था। इसके बाद तेंदुलकर कमेटी और रंगाराजन कमेटी ने गरीबी को अलग तरीके से माना।

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