नरेंद्र सिंह भाटी निर्विरोध एमएलसी बने, देखिए कैसे कांग्रेस की नर्सरी का पौधा सपा के बाद बना भाजपा में सक्सेसफुल ट्रांसप्लांट

खास खबर : नरेंद्र सिंह भाटी निर्विरोध एमएलसी बने, देखिए कैसे कांग्रेस की नर्सरी का पौधा सपा के बाद बना भाजपा में सक्सेसफुल ट्रांसप्लांट

नरेंद्र सिंह भाटी निर्विरोध एमएलसी बने, देखिए कैसे कांग्रेस की नर्सरी का पौधा सपा के बाद बना भाजपा में सक्सेसफुल ट्रांसप्लांट

Tricity Today | नरेंद्र सिंह भाटी

नरेंद्र सिंह भाटी निर्विरोध एमएलसी बने, देखिए कैसे कांग्रेस की नर्सरी का पौधा सपा के बाद बना भाजपा में सक्सेसफुल ट्रांसप्लांट Bulandshahr News : बुलंदशहर-गौतमबुद्ध नगर विधान परिषद स्थानीय प्राधिकारी सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र सिंह भाटी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। यूपी की 27 विधान परिषद सीटों के लिए मंगलवार को मतगणना शुरू हो चुकी है। 36 विधान परिषद सीटों में से पहले ही 9 सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। बुलंदशहर के जिला अधिकारी और इस चुनाव के निर्वाचन अधिकारी ने पहले ही नरेंद्र सिंह भाटी को प्रमाण पत्र सौंप दिया है। नरेंद्र सिंह भाटी के सामने तीन उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। जिनमें से समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की उम्मीदवार सुनीता शर्मा ने अपना पर्चा वापस ले लिया। बाकी दो उम्मीदवारों के पर्चे कमियां मिलने के कारण खारिज कर दिए गए थे।

दूसरी बार बने एमएलसी
इस सीट से नरेंद्र भाटी लगातार दूसरी बार विधान परिषद के सदस्य चुने गए हैं। पिछला चुनाव वर्ष 2016 में हुआ था। तब नरेंद्र सिंह भाटी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। इसी साल जनवरी में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नरेंद्र सिंह भाटी ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें एक बार फिर इसी सीट से विधान परिषद भेजने का वादा किया था। भाजपा ने भाटी को उम्मीदवार घोषित किया। इस सीट से लगातार दूसरी बार एमएलसी चुने गए हैं। आपको बता दें कि राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर भी इस सीट से 2 बार एमएलसी रह चुके हैं।

जिले की राजनीति में सबसे पुराने नेता
नरेंद्र सिंह भाटी मूलरूप से ग्रेटर नोएडा में बोड़ाकी गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1958 में एक किसान परिवार में हुआ था। तब दादरी तहसील मेरठ जिले का हिस्सा थी। नरेंद्र सिंह भाटी ने महज 18 साल की उम्र में वर्ष 1975 में अपने राजनीतिक कैरियर में पहला  कदम रखा था। उन्हें दादरी ब्लॉक युवक कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। 1977 में मिहिरभोज इंटर कॉलेज से इंटर की पढ़ाई पूरी की। तभी बुलंदशहर और मेरठ का विभाजन करके तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार ने गाजियाबाद जिले का गठन किया। दादरी तहसील गाजियाबाद जिले में शामिल हो गई। नरेंद्र भाटी ने 1980 में चुनावी राजनीतिक की शुरुआत की। वह दादरी के ब्लॉक प्रमुख बने। करीब 3 साल बाद वह लोकदल में शामिल हो गए थे। उसके बाद नरेंद्र सिंह भाटी ने सिकंदराबाद विधानसभा सीट से 1989, 1991 और 1996 में चुनाव जीते।

कांग्रेस से लोकदल, सपा और अब भाजपा
कांग्रेस से निकलकर नरेंद्र भाटी लोकदल गए थे। जब चौधरी अजित सिंह और मुलायम सिंह यादव अलग हुए तो नरेंद्र भाटी समाजवादी पार्टी में चले गए। नरेंद्र सिंह भाटी समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता माने जाते थे। एक समय था, जब नरेंद्र भाटी और मुलायम सिंह यादव के इतने घनिष्ठ संबंध थे कि मुलायम सिंह ने भरी सभा में बोल दिया था, "आप इन्हें हारते रहो और मैं टिकट देता रहूंगा।" वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह दादरी में जनसभा करने आए और उन्होंने झोली फैलाकर नरेंद्र सिंह भाटी के लिए वोट मांगे।

गुर्जर राजनीति का बड़ा चेहरा नरेंद्र भाटी
नरेंद्र सिंह भाटी खनन मामले में तत्कालीन आईएएस एसडीएम दुर्गशक्ति नागपाल पर कड़ी कार्रवाई के बाद सुर्खियों में आए थे। उन्होंने दनकौर में एक कार्यक्रम में 41 मिनट के भीतर दुर्गाशक्ति को सस्पेंड कराने का दावा किया था। इसके बाद भाटी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। नरेंद्र भाटी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। नरेंद्र भाटी को साइकिल की सवारी से उतारकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और गौतमबुद्ध नगर के मौजूदा सांसद डॉ.महेश शर्मा भारतीय जनता पार्टी में लाए हैं।

भाटी को मिहिरभोज प्रकरण का मिला फायदा
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दादरी में गुर्जर सम्राट मिहिरभोज की प्रतिमा का अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। प्रतिमा के साथ गुर्जर सम्राट नहीं लिखने से गुर्जर समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला था। नरेंद्र भाटी के दखल के बाद मिहिरभोज का मामला क्षेत्र में ठंडा हुआ था। उस वक्त नरेंद्र भाटी ने ट्राईसिटी टुडे से बातचीत की थी। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री का पक्ष लिया था। कहा था, "प्रतिमा के नाम पर विवाद करना गलत है। अब तब प्रतिमा पर गुर्जर सम्राट लिख गया है तो विवाद खत्म हो गया है। कुछ लोग बिना वजह राजनीति चमका रहे हैं…

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