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सीएम केजरीवाल ने दिल्ली से लगे सारे बॉर्डर सील किए
दिल्ली-एनसीआर

सीएम केजरीवाल ने दिल्ली से लगे सारे बॉर्डर सील किए

केजरीवाल ने कहा कि अगर बॉर्डर खोल दिए गए तो पूरे देश से लोग इलाज कराने यहां आने लगेंगे क्योंकि दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाएं सबसे...

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अखिलेश यादव ने अरविंद केजरीवाल को दी जीत की बधाई
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिल्ली में मतदान के दौरान ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जीत...
पूरे एनसीआर के लोगों के लिए बड़ी खबर नहीं तो देना पड़ सकता है ₹ 20 हजार जुर्माना
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पूरे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण सांस लेना मुहाल होने लगता है। लेकिन इस बार दिल्ली सरकार ने सर्दी शुरू होने से पहले ही कमर कस ली है। प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों का ऑड-इवन नम्बर फार्मूला 4 नवम्बर से लागू होने वाला है। लेकिन बड़ी बात ये ही कि अगर इस बार आपने इस फॉर्मूले का उल्लंघन किया तो भारी भरकम जुर्माना देना पड़ेगा।
मफलर बहुत पहले निकल चुका है, आप लोगों ने ध्यान नहीं दिया, क्यों बोले केजरीवाल
मफलर बहुत पहले निकल चुका है, आप लोगों ने ध्यान नहीं दिया, क्यों बोले केजरीवाल
सर्दियों में अपने मफलर के लिए मशहूर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज एक ट्वीट के जवाब दिया। एक व्यक्ति ने ट्वीट करके अरविंद केजरीवाल से पूछा, अभी तक आपका मफलर दिखाई नहीं दिया। ठंड तो बहुत पड़ रही है। कहां है मफलर? इस पर अरविंद केजरीवाल ने उस ट्वीटर को कोट रीट्वीट करते हुए दिलचस्प जवाब दिया है। केजरीवाल ने लिखा, मफलर बहुत पहले निकल चुका है। आप लोगों ने ध्यान नहीं दिया। ठंड बहुत ज़्यादा है। सब लोग अपना ख्याल रखें।
शीला दीक्षित का दो बार दिल रुका, डॉक्टरों की मशक्कत काम नहीं आई
शीला दीक्षित का दो बार दिल रुका, डॉक्टरों की मशक्कत काम नहीं आई
दूसरी बार हृदय रुकने पर उन्हें डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर रखा लेकिन उन्हें बचाने में कामयाबी नहीं मिली। 3:55 बजे उनका निधन हो गया। शीला दीक्षित वर्ष 1998 से 2003 तक 15 वर्ष दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं। कांग्रेस की सरकार जाने के बाद शीला दीक्षित केरल की राज्यपाल भी रही थीं। इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया था। शीला को हमेशा से गांधी-नेहरू परिवार का करीबी माना जाता था।
शीला दीक्षित: दिल्ली ने दी शोहरत तो भ्रष्टाचार का दाग भी, पूरा सफरनामा
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शीला दीक्षित ऐसा करने में इसलिए कामयाब रहीं क्योंकि उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से काफी नजदीकी रही है। 1989 में कन्नौज से चुनाव हारने के बाद जब यह मान लिया गया था कि शीला दीक्षित की राजनीति खत्म हो गई तो उन्होंने इस बीच सोनिया गांधी से अपने संबंध बेहद प्रगाढ़ किए और फिर से 1998 में सियासत में मजबूती से उठ खड़ी हुईं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो केरल के राज्यपाल पद से हटने के बाद भी शीला दीक्षित कुछ उन चुनिंदा लोगों में शामिल रहीं, जो सोनिया गांधी से अक्सर मिलते-जुलते रहते थे। उनके मुताबिक यही वजह है कि दिल्ली में डूब चुकी कांग्रेस की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी एक बार फिर उनको सौंपी गई थी।
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दूसरी बार हृदय रुकने पर उन्हें डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर रखा लेकिन उन्हें बचाने में कामयाबी नहीं मिली। 3:55 बजे उनका निधन हो गया। शीला दीक्षित वर्ष 1998 से 2003 तक 15 वर्ष दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं। कांग्रेस की सरकार जाने के बाद शीला दीक्षित केरल की राज्यपाल भी रही थीं। इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया था। शीला को हमेशा से गांधी-नेहरू परिवार का करीबी माना जाता था।
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