राजीव गांधी हत्याकांड में सभी 6 दोषी रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

आज की बड़ी खबर : राजीव गांधी हत्याकांड में सभी 6 दोषी रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

राजीव गांधी हत्याकांड में सभी 6 दोषी रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

Tricity Today | राजीव गांधी हत्याकांड

राजीव गांधी हत्याकांड में सभी 6 दोषी रिहा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश New Delhi : पूरे देश के लिए यह एक बहुत बड़ी खबर है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में सभी 6 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने दिया कर दिया है। आज का दिन भारत के इतिहास के लिए बहुत बड़ा दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने नलिना और रविचंद्रन समेत सभी 6 दोषियों को रिहा कर दिया है। बीते 18 मई को इसी मामले में दोषी पेरारिवल को रिहा किया गया था। जिसके बाद सभी अन्य दोषियों ने उसी आदेश का हवाला देते हुए रिहाई की याचिका दायर की थी। जिसके बाद आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सभी 8 दोषियों को रिहा कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा 
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल छह दोषियों की रिहाई का आदेश दिया है। इसके साथ ही इस मामले के सभी सात दोषी रिहा हो गए हैं। इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य दोषी एजी पेरारिवलन को आर्टिकल 142 का हवाला देते हुए रिहा किया था। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि जिस नियम के तहत एजी पेरारिवलन को रिहाई दी गई थी, वो इस मामले में दोषी पाए गए अन्य पर भी लागू होती है। ये सभी आरोपी करीब 31 साल से जेल में बंद थे। बता दें कि राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में आत्मघाती बम धमाके में हुई थी। 

वो 21 मई 1991 का दिन
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी मारे गए थे। महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें पेरारिवलन, मुरुगन, संथन, रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और नलिनी श्रीहरन शामिल थे। 1998 में टाडा अदालत ने पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा सुनाई थी। राहत नहीं मिलने के बाद पेरारिवलन और अन्य दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। साल 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा। 2014 में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

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