देश आजाद होने से 100 साल पहले इस शहर में लागू हुआ था कमिश्नरेट सिस्टम लेकिन नहीं है अंग्रेजों की देन

Police Commissionerate System : देश आजाद होने से 100 साल पहले इस शहर में लागू हुआ था कमिश्नरेट सिस्टम लेकिन नहीं है अंग्रेजों की देन

देश आजाद होने से 100 साल पहले इस शहर में लागू हुआ था कमिश्नरेट सिस्टम लेकिन नहीं है अंग्रेजों की देन

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देश आजाद होने से 100 साल पहले इस शहर में लागू हुआ था कमिश्नरेट सिस्टम लेकिन नहीं है अंग्रेजों की देन New Delhi : करीब चार दशक तक उत्तर प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री पुलिस आयुक्त व्यवस्था राज्य में लागू नहीं कर पाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की। अब यूपी के सात महानगरों में यह व्यवस्था कायम हो गई है। इस प्रणाली को लेकर तमाम तरह के सवाल खड़े किए जाते हैं और आलोचनाएं भी होती हैं। कुछ लोग कहते हैं कि यह ब्रिटिश हुकूमत की दमनकारी व्यवस्था है। इससे अपराध कम करने की बजाय आम आदमी के अधिकारों का हनन किया जाता है। दरअसल, उस वक्त अंग्रेजों को भारत में अपनी हुकूमत कायम रखने के लिए पुलिस का गलत इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन यह बात सच नहीं है। आपको बता दें कि भारत में आजादी से 100 साल पहले यानी साल 1847 में पहली बार पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू की गई थी। यह प्रणाली अंग्रेजों ने नहीं, निजाम ने लागू की थी। देश में सबसे पहले हैदराबाद शहर में पुलिस आयुक्त की नियुक्ति हुई थी।

क्या है पुलिस आयुक्त व्यवस्था
भारत में पुलिस आयुक्त आईपीएस अधिकारी होते हैं। एक आयुक्तालय में पुलिस बल का नेतृत्व करते हैं। एक आयुक्तालय में कई आस-पास के जिलों को जोड़ जा सकता है। एक जिले के पुलिस बल के प्रभारी के रूप में आयुक्त के पास पुलिस अधीक्षक (एसपी) या एसएसपी के सापेक्ष कार्यकारी शक्तियां अधिक होती हैं। पुलिस आयुक्त एक ऐसा पद है जो संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई मंजूरी के आधार पर एसपी रैंक से ऊपर के आईपीएस अधिकारी को दिया जा सकता है।

दोहरी डीएम-एसपी व्यवस्था
परंपरागत रूप से जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट के साथ काम करके कानून-व्यवस्था बनाए रखते हैं। पुलिस आयुक्त प्रणाली के तहत डीएम की मजिस्ट्रियल शक्तियां सीपी को और उसके अधीन स्वीकृत पुलिस अधिकारियों जैसे विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, उप आयुक्त और सहायक आयुक्त को दी जाती हैं। बड़े महानगरीय शहरों के लिए सीपी प्रणाली को आमतौर पर अधिक उपयुक्त पुलिस प्रणाली माना जाता है।

कहां कब बने पुलिस कमिश्नरेट
वर्ष 1847 से हैदराबाद शहर का पुलिस आयुक्तालय देश में सबसे पुराना है। तत्कालीन हैदराबाद राज्य में निजामों ने इसे स्थापित किया था। ब्रिटिश भारत सरकार ने वर्ष 1856 में सबसे पहले कोलकाता और चेन्नई में सीपी प्रणाली लागू की थी। इसके बाद 1864 में मुंबई में इसका पालन किया गया। आपको बता दें कि अब उत्तर प्रदेश राज्य अपने महानगरों में पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू कर रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी में 13 जनवरी 2020 को गौतमबुद्ध नगर और लखनऊ में पुलिस आयुक्त व्यवस्था की घोषणा की थी। इसके बाद औद्योगिक शहर कानपुर और धार्मिक नगरी वाराणसी में 25 मार्च 2021 को पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू की गई। अब 25 नवंबर 2022 को तीन और शहरों गाजियाबाद, प्रयागराज और आगरा में यह व्यवस्था लागू की गई है।

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