दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट मिलकर बदल देंगे तस्वीर, जेएम सिंधिया ने पेश किया खाका

आज की खास खबर : दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट मिलकर बदल देंगे तस्वीर, जेएम सिंधिया ने पेश किया खाका

दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट मिलकर बदल देंगे तस्वीर, जेएम सिंधिया ने पेश किया खाका

Google Image | ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया

दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट मिलकर बदल देंगे तस्वीर, जेएम सिंधिया ने पेश किया खाका Delhi-NCR News : दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Delhi) और जेवर में बन रहा नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Noida International Airport) मिलकर देश के नागरिक उड्डयन उद्योग की तस्वीर बदल देंगे। आने वाले कुछ वर्षों में यह दोनों हवाई अड्डे किस तरह मिलकर काम करेंगे, इसका पूरा ब्यौरा केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने दिया है। सिंधिया ने खाका पेश करते हुए बताया कि आने वाले वक्त में जेवर हवाई अड्डा किस तरह काम शुरू करेगा। इसकी बदौलत ना केवल दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश को कितना बड़ा फायदा होगा। साथ ही दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट का भी विस्तार और विकास सरकार कर रही है।



जेवर एयरपोर्ट से 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "लंबे अरसे से उपेक्षित उत्तर प्रदेश में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अपेक्षित था। अब यह कमी दूर होने वाली है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जा रहा है। यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनेगा। जेवर में नागरिक उड्डयन का एक नया केंद्र बनने जा रहा है। मैं मानता हूं कि जेवर केवल उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वकांक्षी परियोजना है। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 30,000 करोड रुपए के निवेश वाला प्रोजेक्ट रहेगा। इसके पहले चरण का विकास करने पर 9,000 करोड रुपए खर्च हो रहे हैं। इस हवाई अड्डे का विकास चार चरणों में किया जाएगा।"

7 करोड़ यात्री सालाना तक क्षमता का होगा जेवर एयरपोर्ट
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, "जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा होने पर यहां से हर साल 1.20 करोड़ यात्री हवाई यात्रा कर सकेंगे। इसके बाद धीरे-धीरे इसका चार चरणों में विकास पूरा किया जाएगा। चौथे चरण का काम पूरा होने के बाद जेवर एयरपोर्ट की क्षमता बढ़कर 7 यात्रियों के आवागमन की हो जाएगा। मैं एक उदाहरण आपको देना चाहता हूं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की वर्ष 2006 में शुरुआती क्षमता 1.6 करोड़ यात्री की थी। अब दिल्ली हवाई अड्डे से हर साल 7 करोड़ यात्री आवागमन कर रहे हैं। इस हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और विस्तार पर काम चल रहा है। इस फेज का काम पूरा होने पर दिल्ली हवाई अड्डे की क्षमता बढ़कर 10 करोड यात्री तक पहुंच जाएगी।"

दिल्ली-एनसीआर में दो समांतर हवाई यात्रा के केंद्र बन जाएंगे
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे कहा, "दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और विस्तार का फेज पूरा होने के साथ ही जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी ऑपरेशनल हो जाएगा। इस तरह दिल्ली-एनसीआर में हवाई यात्रा के लिए दो समांतर केंद्र विकसित हो जाएंगे।" आपको बता दें कि दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट और गौतमबुद्ध नगर के जेवर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच करीब 70 किलोमीटर का फासला है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों हवाई अड्डों को आपस में जोड़ने की परियोजना पर भी तेजी से काम कर रहे हैं। यह दोनों हवाई अड्डे एक्सप्रेसवे, फास्ट मेट्रो और रैपिड रेल के जरिए जोड़े जाएंगे।

दिल्ली-एनसीआर से हर साल 17 करोड यात्री उड़ान भरेंगे
आप इस महत्वकांक्षी परियोजना का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि जब जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के चारों चरणों का विकास पूरा हो जाएगा और इसके समांतर दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण व विस्तार का चरण पूरा हो जाएगा तो इन दोनों केंद्रों से हर साल 17 करोड लोग हवाई यात्राएं करने में सक्षम होंगे। अभी दिल्ली-एनसीआर का पूरा बोझ अकेले इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर है। जहां से हर साल 7 करोड लोग हवाई यात्राएं कर रहे हैं। मतलब, आने वाले वर्षों में करीब ढाई गुना लोगों को जेवर और दिल्ली हवाई अड्डों से वायु यातायात की सुविधाएं मिलेंगी। आपको एक जानकारी और दे दें कि इस वक्त दुनिया के सबसे व्यस्ततम हवाई अड्डों में दिल्ली एयरपोर्ट का स्थान पहला है।

कोरोना ने एविएशन इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान पहुंचाया
करीब 2 साल पहले दुनिया भर में कोरोनावायरस के कारण फैली महामारी ने तमाम उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचाया है जिन उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है उनमें नागरिक उड्डयन भी शामिल है अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2020 21 के दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से केवल 2,25,83,736 यात्रियों ने उड़ान भरी। यह 66.4% गिरावट है। मतलब, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सामान्य वर्षों के मुकाबले बमुश्किल 33 फ़ीसदी यात्री मिल पाए। इनमें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या केवल     32,07,233 थी। विदेशी यात्रियों के आवागमन में 82.0% गिरावट हुई है। 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के बीच यहां से केवल 2,13,986 वायुयानों ने आवागमन किया है। यह 52.4% की गिरावट है। हालांकि, सबसे कम गिरावट मालवाहन में दर्ज की गई है। इस दौरान    7,37,431 टन लाया या ले जाया गया है। यह केवल 22.9% कमी है।

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