स्क्रीन टाइम नहीं किया कंट्रोल तो बच्चों की हेल्थ होगी 'अनकंट्रोल', जानिए कैसे बचाएं अपने लाड़ले का भविष्य

Health Special : स्क्रीन टाइम नहीं किया कंट्रोल तो बच्चों की हेल्थ होगी 'अनकंट्रोल', जानिए कैसे बचाएं अपने लाड़ले का भविष्य

स्क्रीन टाइम नहीं किया कंट्रोल तो बच्चों की हेल्थ होगी 'अनकंट्रोल', जानिए कैसे बचाएं अपने लाड़ले का भविष्य

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स्क्रीन टाइम नहीं किया कंट्रोल तो बच्चों की हेल्थ होगी 'अनकंट्रोल', जानिए कैसे बचाएं अपने लाड़ले का भविष्य New Delhi : पैरेंटिंग हमेशा से मुश्किल रही है लेकिन डिजिटल क्रांति के बाद माता-पिता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बच्चों की जिंदगी में स्मार्ट फोन और सोशल साइट्स के बढ़ते दखल ने पैरेंटिंग को मुश्किल बना दिया। कोरोना के दौरान जब से ऑनलाइन क्लॉसेज शुरू हुई तो स्मार्टफोन एक जरूरत बन गया लेकिन इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हैं। पिछले दिनों संसद में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि स्मार्टफोन के अधिक प्रयोग से बच्चों में कई तरह की मानसिक, शारीरिक व सामाजिक दिक्कतें पैदा हो रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एनसीपीसीआर द्वारा कराए गए सव्रे का हवाला देते हुए संसद में बताया कि 37.15 फीसद बच्चों में एकाग्रता का अभाव पाया गया है। इसके साथ ही 28 फीसद बच्चे सोने से पहले स्मार्टफोन का प्रयोग कर रहे हैं। स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों के स्क्रीन टाइम को कंट्रोल रखने का कहा है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए तो स्क्रीन टाइम व स्मार्ट फोन के प्रयोग को बिलकुल सीमित करने को कहा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक और मानिसक विकास पर सीधा असर डालता है।

स्मार्टफोन या ज्यादा स्क्रीन टाइम के नुकसान
बिहेवियर प्रॉब्लम : मोबाइल फोन के प्रयोग से बच्चे जिद्दी हो रहे हैं। स्मार्टफोन की आभासी दुनिया में खोए बच्चों को सम्पर्क बाहरी दुनिया से टूट रहा है। उनमें आक्रमता, चिड़चिड़ापन और कुंठा बढ़ रही है। हालात ये हैं कि माता-पिता द्वारा फोन का प्रयोग अचानक रोकने पर बच्चें हिंसात्मक  हो रहे हैं।
  1. मोटापे का शिकार : खाना खाते वक्त मोबाइल फोन पर गेम खेलना या यूटय़ूब पर वीडियो देखने से उनमें मोटापा बढ़ रहा है। दरअसल उन्हें पता ही नहीं चलता कि उन्होंने जरूरत से ज्यादा खाना खा लिया है। लेटकर मोबाइल देखने व फिजिकल एक्टिविटी न करने से और भी दिक्कतें हो रही हैं।
  2. देखने और सुनने की क्षमता पर प्रभाव : ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों में देखने व सुनने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है। लगातार स्क्रीन देखने के दौरान आंखों में सूखापन, थकान और जलन जैसी दिक्कतें आ रही हैं। नतीजतन बच्चों को कम उम्र में ही चश्मा लग रहा है। इसके साथ ही आजकल बच्चे हेडफोन लगाकर म्यूजिक सुनते हैं या गेम खेलते हैं, जिससे सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
  3. स्लीपिंग डिसऑर्डर : बच्चे देर रात तक फोन यूज करते हैं जिससे उनका स्लीपिंग पैटर्न बिगड़ रहा है। नतीजतन तमाम बच्चों में स्लीपिंग डिसऑर्डर की शिकायतें आ रही हैं। इसका सीधा असर उनके मानिसक और शारीरिक विकास पर पड़ता है।
  4. डिप्रेशन : मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल करने के चक्कर में बाहरी दुनिया से सम्पर्क तोड़ रहे हैं। लेकिन जब भी उनका सामना वास्तविक दुनिया की सच्चाइयों से होता है तो उन्हें तमाम परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। जिसमें असफल होने पर डिप्रेशन के शिकार होते हैं।
  5. एकाग्रता का अभाव : स्मार्टफोन के ज्यादा प्रयोग से बच्चों की एकाग्रता की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जिससे उनमें क्रियेटिविटी व लर्निग की क्षमता घट रही है।
कैसे बचाएं स्मार्टफोन एडिक्शन से
  1. माता-पिता बच्चों को समय दें : माता-पिता से ही बच्चें सीखते हैं। डिजिटल दुनिया में माता-पिता भी स्मार्टफोन व सोशल साइट्स पर बिजी हैं। जब बच्चे माता-पिता की कमी महसूस करते हैं तो वे भी खुद को टेक्नोलॉजी की दुनिया में बिजी कर लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों पर ध्यान दें और उनके साथ वक्त गुजारें।
  2. बाहर खेलने भेजें  : बच्चों को बाहर खेलने भेजें जिससे उनका शारीरिक विकास होगा और उन्हें नई स्किल और चुनौतियों को सीखने को प्रेरित करें।
  3. स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करें : डब्ल्यूएचओ ने भी अपनी गाइडलाइन में बच्चों के फोन टाइम को लिमिट के बारे में माता-पिता से सावधानी बरतने के लिए कहा है।
  4. मोबाइल फोन से होने वाले नुकसान के बारे में बच्चों को बताएं : ज्यादा मोबाइल फोन प्रयोग करने पर बच्चों को डांटने के बजाय उन्हें मोबाइल फोन से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं।
  5. सिक्योरिटी पार्सवड : बच्चों को बड़ों के सुपरविजन में मोबाइल फोन, टैबलेट और स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए देना चाहिए। फोन यूज करने के बाद उसे मॉनिटिरंग भी करना चाहिए और जरूरी हो तो पार्सवड भी लगा कर रखें ताकि बिना आपकी जानकारी के फोन का प्रयोग न कर सड्ढें।
  6. खुद भी सीमित करें प्रयोग : बच्चे भी माता पिता को देखकर उन्हें फॉलो करते हैं अगर आप खुद हर वक्त फोन यूज करेंगे तो बच्चा भी आपको ही कॉपी करेगा लिहाजा बच्चों के सामने फोन का प्रयोग सीमित कर उदाहरण पेश करें।

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