सफाई कर्मचारियों की जिंदगी का सच दिखाएंगी 'सफाईबाज द स्कैवेंजर' फिल्म, गांधी जयंती पर होगी रिलीज

फिल्म : सफाई कर्मचारियों की जिंदगी का सच दिखाएंगी 'सफाईबाज द स्कैवेंजर' फिल्म, गांधी जयंती पर होगी रिलीज

सफाई कर्मचारियों की जिंदगी का सच दिखाएंगी 'सफाईबाज द स्कैवेंजर' फिल्म, गांधी जयंती पर होगी रिलीज

Tricity Today | सफाईबाज द स्कैवेंजर

सफाई कर्मचारियों की जिंदगी का सच दिखाएंगी 'सफाईबाज द स्कैवेंजर' फिल्म, गांधी जयंती पर होगी रिलीज New Delhi : बॉलीवुड में सामाजिक मसलों पर बनने वाली फिल्मों का दायरा अब तेजी से बढ़ रहा है। गंदगी एक ऐसा सामाजिक मसला है जिससे छुटकारा पाने के लिए भारत सरकार बाकायदा स्वच्छ भारत अभियान तक चला रही है। हमारे शहरों की नालियां, गलियां और सड़कें तो गंदगी से अटी पड़ी हैं, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दावत दे रही हैं। अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर सफाई कर्मचारी इन नालियों, गलियों और सड़कों से गंदगी साफ कर समाज को न सि‍र्फ स्वच्छ बनाते हैं बल्कि हम सबको बीमारियों से भी बचाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि गटर साफ करते हुए न जाने कितने ही सफाई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। ऐसे में अवनीता आर्ट्स के बैनर तले बनी फिल्म ‘सफाईबाज द स्कैवेंजर, एक मिसाल ही है जो सफाई कर्मचारियों की जिंदगी की कहानी कहती है। 

कहानी का मुख्य बिंदु यही है कि किस तरह सफाईबाज अपनी हाड़ तोड़ मेहनत करने के बाद भी सरकारी ठेकेदारों के चंगुल में फंस जाते हैं। सफाईबाज गटर में उतरकर शहीद तो हो जाते हैं, लेकिन उन्हें शहीद का दर्जा तक नहीं मिलता। जाहिर है, बिना सफाईबाजों के शहरों की खूबसूरती एक दिन में ही खत्म हो जाएगी, फिर भी हम इनकी जिंदगी की सच्चाइयों से अंजान हैं, उनके दुख-दर्द से मुंह मोड़े हुए हैं। समाज ने अब तक उन्हें वो सम्मान नहीं दिया है, जिसके वे हकदार हैं। ऐसे में, इस फिल्म को बनाने का उद्देश्य समाज में सफाईबाजों को मान-सम्मान दिलाना तो है ही, साथ सफाई करने के दौरान गुजर चुके स्वच्छता नायकों यानी सफाईबाजों को श्रद्धांजलि देना भी है। सफाईबाज हमारे लिए सामाजिक नायक होने चाहिए, लेकिन विडंबना यह है कि वो गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

श्रम मंत्रालय में महानिदेशक के पद पर रह चुके सेवानिवृत्त डॉ अवनीश सिंह इस फिल्म के लेखक और निर्देशक हैं। इस फिल्म के क्रिएटिव डायरेक्टर अजीत चौबे हैं, जिनकी रचनात्मक परिकल्पना ने इस फिल्म के सामाजिक कैनवास को बहुत बड़ा बना दिया है।  कैमरामैन हैं अयूब अली खान एवम सुशील कुमार । वहीं फिल्म का संगीत दिया है स्वरूप होनप और डॉ नीता सिंह ने और इसके गीत लिखे हैं पंडित किरण मिश्रा ने। गीतकार पंडित किरण मिश्रा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके लिखे खूबसूरत गीत जरूर लोगों की जुबान पर बैठ जाएंगे।

अगले महीने यानी अक्टूबर में रिलीज होने जा रही इस फिल्म में राजपाल यादव, जॉनी लीवर, उपासना सिंह, अनुपम श्याम ओझा, ओमकार दास मानिकपुरी ‘नत्था’, दीपक राज डोगरा,  समर्थ चतुर्वेदी, मनप्रीत कौर, मनोज पंडित, आशीष अवाना और ऋतू सिंह जैसे मंझे हुए कलाकार हैं, जिनके सशक्त अभिनय से सजी यह फिल्म निश्चित रूप से समाज को जागरूक करेगी और लोगों में सफाईबाजों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करेगी। अपने टेलीविजन किरदार ‘सज्जन सिंह’ के लिए मशहूर अनुपम श्याम ओझा जी की यह आखिरी फिल्म रही जिसमें उन्होंने अपने सशक्त अभिनय से एक नई ऊंचाई को छुआ है। मगर दुखद यह है कि अब अनुपम जी हमारे बीच नहीं हैं।

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