त्योहारी सीजन में महंगाई की मार, व्यापारी एकता समिति की मांग- जनता को मिले राहत

गाजियाबाद : त्योहारी सीजन में महंगाई की मार, व्यापारी एकता समिति की मांग- जनता को मिले राहत

त्योहारी सीजन में महंगाई की मार, व्यापारी एकता समिति की मांग- जनता को मिले राहत

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त्योहारी सीजन में महंगाई की मार, व्यापारी एकता समिति की मांग- जनता को मिले राहत Ghaziabad News : पेट्रोल के शतक और सरसों तेल के दोहरे शतक के बीच हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा मंहगाई दर में पिछले पांच माह में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि सितंबर माह में मंहगाई की दर घटकर 4.35 फीसदी रह गई। एक महीने पहले यानी अगस्त माह में ये 5.3 फीसदी पर थी। सरकार का ये भी दावा है कि सितंबर में खाने-पीने के सामानों के दाम भी अगस्त के 3.11 प्रतिशत के मुकाबले 0.68 प्रतिशत गिरे हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या महंगाई वाकई कम हो रही है? यदि नहीं तो महंगाई आम लोगों की जिंदगी को कैसे प्रभावित कर रही है?

घेरलू सामान पर बढ़ी कीमत 
व्यापारी एकता समिति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा यदि मंहगाई वाकई है तो फिर ये मुद्दा क्यों नहीं बन पा रही? सरसों के तेल की कीमत 200 रुपए पार कर चुका है। कुछ महीने पहले तक इसका भाव 120 रुपए प्रति लीटर था। रसोई गैस का सिलेंडर अब 1,050 रुपए का हो गया है। फूलगोभी 100 रुपए किलो तो टमाटर 80 रुपए और प्याज 60 रुपए। इसके अलावा भी खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी आसमान छू रहीं हैं। एक अनुमान के मुताबिक खाने-पीने की चीजों में पिछले कुछ माह में 40 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हो चुका है। पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढऩे की पूरी संभावना है, लेकिन शायद राजनीतिक दलों के लिए ये कोई मुद्दा ही नहीं है, इसलिए कोई भी महंगाई पर चर्चा नहीं करता। 

"बाजार की हालत खस्ता"
उन्होंने कहा, "पहले बीजेपी जब विपक्ष में थी तो जोर-शोर से महंगाई पर कांग्रेस पार्टी को घेरती थी, लेकिन मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी महंगाई को आज तक मुद्दा नहीं बना सकी। यही वजह है कि आम आदमी की कोई नहीं सुन रहा है। आज बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। आम आदमी के बिगड़े बजट का असर इस त्योहारी सीजन में बाजार पर पड़ रहा है। पिछले 2 साल से लगातार कोरोना महामारी ने बाजार की हालत खस्ता कर रखी है। इस बार व्यापारियों ने इस त्योहारी सीजन में अच्छे कारोबार की उम्मीद लगा रखी है, लेकिन सुरसा की तरह मुंह फैलाती महंगाई ने इस बार के कारोबार पर भी असर दिखाना शुरू कर दिया है।" 

त्यौहारों पर लोगों को मिलनी चाहिए राहत
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि व्यापारी एकता समिति संस्थान सरकार से मांग करती है कि बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए सरकार फौरन कदम उठाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और बाजारों में भी रौनक लौट सके, ताकि पिछले 2 साल से कोरोना महामारी की मार झेल रहे व्यापारियों के चेहरे पर भी मुस्कान लौट सके। डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के चलते सभी वस्तुओं पर महंगाई का असर देखा जा रहा है। त्योहारी सीजन पर भी महंगाई की मार देखी जा रही है। कपड़ा, सरार्फा बाजार, ऑटो मोबाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक बाजार में महंगाई का असर देखा जा रहा है। बढ़ती महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई गैस सिलेंडर से लेकर खाद्य तेल, दाल व दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। कई शहरों में पेट्रोल 100 और डीजल 91 रुपए के पार पहुंच गया है। रसोई गैस के दाम भी बढ़ रहे हैं। ईंधन के रेट बढऩे से सभी वस्तुओं पर महंगाई का असर देखा जा रहा है। त्योहारी सीजन में भी महंगाई का असर देखा जा रहा है। कपड़ा बाजार से लेकर सरार्फा बाजार, इलेक्ट्रॉनिक बाजार में सभी वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। ऑटो मोबाइल के क्षेत्र में भी महंगाई की असर साफ देखा जा रहा है।

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