सुधार की जरुरत : गाजियाबाद में लगी स्ट्रीट लाइटों के ऑन-आफ में लगे कर्मचारियों पर हो रहा लाखों का खर्च

गाजियाबाद में लगी स्ट्रीट लाइटों के ऑन-आफ में लगे कर्मचारियों पर हो रहा लाखों का खर्च

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो

कांग्रेसी पार्षद मनोज चौधरी ने निगम में तैनात उन कर्मचारियों को रखने पर आपत्ति जाहिर की है, जिनका काम केवल स्ट्रीट लाइटों को बंद और खोलने का है। जोन में तैनात ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 16 हैं। इन कर्मचारियों पर जनता का अनर्गल पैसा बर्बाद किया जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों को हटाने के साथ उन अधिकारियों की जाच होनी चाहिए जिन्होंने ऐसे कर्मचारियों को लगा रखा है। 

मनोज चौधरी का कहना है कि निगम में  सूत्रों के अनुसार नगर निगम के कवि नगर जोन में 8 कर्मचारी मोहन नगर जोन में 3 कर्मचारी, सिटी जोन में 5 कर्मचारी सिर्फ स्ट्रीट लाइटों को ऑन आफ करने के लिए रखे गए हैं। यह हाल सिर्फ तीन जोन का नहीं है। पांचों जोन में ऐसी स्थिति है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी कम संख्या में काम कर रहे हैं और वेतन अधिक कर्मचारियों का निकाला जाता है। बाकी पैसे अधिकारियों की जेब में चले जा रहे है। अक्टूबर माह में 25 कर्मचारियों को रखने की स्वीकृति ली गई ,जिन्हें लाइट सही करनी थी। नए कर्मचारियों के लिए शुरू में 21 आदमियों की तनख्वाह जारी की गई। अब 19  कर्मचारियों की तनख्वाह जारी हो रही है लेकिन मौके पर 15 ही कर्मचारी काम कर रहे है। चार,पांच कर्मचारियों की तनख्वाह कहां जा रही है यह जांच का विषय है। 

इसी तरह कवि नगर जोन के वार्ड 53, 67, 71 और 46 में सिर्फ एक ही दिन लाइट सही करवाई जाती हैं, पर कागजों में कर्मचारी वार्ड में रोज भेजे जाते हैं। पूर्व कार्यकारी सदस्य ने नगर आयुक्त का ध्यान स्वास्थ्य विभाग की ओर भी खींचा है। यहां मेंटनेंस के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है। विभाग में कई लाख रुपए का फर्जी भुगतान मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने निगम से हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग में घटिया सामग्री खरीदा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा इसमें 20 पर्सेंट कमीशन लिया जा रहा है।इसकी जांच होनी चाहिए। इस मामले में उन्होंने मेयर आशा शर्मा और नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर से जांच की मांग की है।

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