दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई ने बड़ा कदम उठाया, जानें पूरा प्लान

बड़ी खबर: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई ने बड़ा कदम उठाया, जानें पूरा प्लान

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई ने बड़ा कदम उठाया, जानें पूरा प्लान

Google Image | दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई ने बड़ा कदम उठाया, जानें पूरा प्लान  Ghaziabad News: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर कई ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां ज्यादा संख्या में लोग गलत दिशा में वाहन चलाते हैं। इससे जानलेवा हादसों का खतरा बना रहता है। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एनएचएआई ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दरअसल हाल ही में गाजियाबाद के मसूरी के पास गलत साइड से जा रहे एक ट्रक और कार की टक्कर के बाद एक साल के बच्चे सहित एक परिवार के पांच लोगों की मौत दुखद मौत हो गई। एनएचएआई के एक अनुमान के मुताबिक, देश के सबसे बड़े दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर इस साल मार्च से अब तक कम से कम 25 दुर्घटनाएं हुई हैं।

हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई ने इनका विश्लेषण किया है। इसके बाद कई बड़े फैसले लिए गए हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मुदित गर्ग ने बताया कि, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना की एक बड़ी वजह रॉन्ग साइड में गाड़ियां दौड़ाना है। इसे रोकने के लिए हमने कुछ स्थान चिन्हित किए हैं। 80 किमी के इस एक्सप्रेसवे पर चिन्हित स्थानों पर 12-15 गार्ड तैनात किए जाएंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि वाहन उनके कैरिजवे में रहें। सराय काले खां और यूपी गेट के बीच चार स्थानों की पहचान की गई है, जहां लोग बड़े पैमाने पर गलत साइड ड्राइविंग करते है। इसी तरह यूपी गेट और डासना के बीच चार स्पॉट गलत लेन में ड्राइविंग के लिए जाने जाते हैं। डासना से मेरठ खंड पर ऐसे तीन स्थान हैं।

इन प्वॉइंट पर तैनात रहेंगे गार्ड
उन्होंने बताया, सराय काले खां-यूपी गेट खंड पर अक्षरधाम मंदिर, मयूर विहार, गाजीपुर बाजार और एमसीडी टोल प्लाजा के पास मोड़ हैं। इन स्थानों पर चार गार्ड तैनात किए गए हैं। वे शिफ्ट में काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि गलत साइड में वाहन न चलने पाएं। ड्राइविंग की जांच की जाएगी। यूपी गेट और डासना के बीच सीआईएसएफ कट, मॉडल टाउन, बम्हेटा और डासना कट के पास गार्ड तैनात रहेंगे। डासना से मेरठ खंड पर डासना जंक्शन, भोजपुर और परतापुर में भी इसी तरह की व्यवस्था की जाएगी। यूपी गेट और डासना के बीच पांच और तीसरे खंड पर चार गार्ड तैनात होंगे। वे अलग-अलग पाली में 24 घंटे इलाके में निगरानी रखेंगे। 

इन वाहनों को चलाना खतरनाक
अधिकारी ने आगे कहा, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर यातायात का प्रबंधन करना एनएचएआई की जिम्मेदारी नहीं है। वाहनों को नियमों का पालन करना सुनिश्चित कराना दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ यातायात विभाग और पुलिस-प्रशासन के जिम्मे है। पुलिस की मदद के बिना गलत साइड ड्राइविंग पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकता। दिल्ली-मेरठ एक एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है। इस पर बाइकर्स, तिपहिया, ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों की अनुमति नहीं है। इस एक्सप्रेसवे पर गति सीमा यूपी में 100 किमी प्रति घंटे और दिल्ली में 70 किमी प्रति घंटे है। यानी यहां वाहन काफी तेज गति से चलते हैं। इस वजह से दोपहिया और तिपहिया वाहनों के दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।

किसान आंदोलन में नियम टूटे
पिछले दिनों किसान आंदोलन के दौरान इस एक्सप्रेसवे पर भारी संख्या में लोग ट्रैक्टर, दोपहिया और तिपहिया वाहनों से आवागमन कर रहे थे। ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रदर्शनकारी एक्सप्रेसवे पर कब्जा कर चुके थे। गर्ग ने कहा, पिछले साल जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है, तब से एक्सप्रेस-वे पर अक्सर ट्रैक्टर देखे जा सकते हैं। लेकिन सिर्फ ये वाहन चिंता का सबब नहीं हैं। भारी और रफ्तार वाले ट्रैफिक के बीच पैदल चलने वालों ने समस्या को और बढ़ा दिया है। 

पुलिस कर रही कार्रवाई
खासकर नोएडा सेक्टर-62, मॉडल टाउन और डासना जैसे क्षेत्रों में लोग एक्सप्रेसवे पर पैदल दिखाई देते हैं। गाजियाबाद यातायात पुलिस ने दावा किया कि विभिन्न स्थानों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाता है। एसपी (यातायात) रामानंद कुशवाहा ने कहा, हमारा प्रयास है कि एक्सप्रेसवे पर यातायात उल्लंघन न हो। उल्लंघन करने वालों पर नियमित रूप से जुर्माना लगाया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में हमने यातायात उल्लंघन के लिए 200 से अधिक चालान जारी किए हैं। 20 से ज्यादा ऑटो-रिक्शा भी जब्त किए हैं। ये अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

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