कहीं आपकी जेब में तो नहीं 2000 और 200 के नकली नोट, इन लोगों ने बाजारों में उतारी 17 लाख की जाली करेंसी

गाजियाबाद पुलिस का बड़ा खुलासा : कहीं आपकी जेब में तो नहीं 2000 और 200 के नकली नोट, इन लोगों ने बाजारों में उतारी 17 लाख की जाली करेंसी

कहीं आपकी जेब में तो नहीं 2000 और 200 के नकली नोट, इन लोगों ने बाजारों में उतारी 17 लाख की जाली करेंसी

Tricity Today | गिरफ्तार आरोपी

कहीं आपकी जेब में तो नहीं 2000 और 200 के नकली नोट, इन लोगों ने बाजारों में उतारी 17 लाख की जाली करेंसी Ghaziabad News : जनपद की स्वाट टीम ने नारकॉटिक्स सेल के साथ मिलकर जाली करेंसी बनाकर बाजार में चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड समेत 7 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से पुलिस ने 6.59 लाख रुपए की जाली करेंसी, प्रिंटर, स्कैनर, कागज के बंडल और अन्य उपकरण बरामद किया है। बरामद करेंसी में 2000 से लेकर 100 रुपए तक के जाली नोट शामिल हैं। गिरोह के मास्टरमाइंड ने यूट्यूब से जाली नोट बनाने का तरीका सीखने के बाद गिरोह बनाकर नकली नोट को छापने लगा, जो अब तक करीब 17 लाख रूपए की नकली नोट छाप चुका है।

हरसांव पुलिस लाइन में शुक्रवार को घटना का खुलासा करते हुए सीओ सदर आकाश पटेल ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली कि इस्लामनगर स्थित यूनुस के मकान में भारतीय नोटों की जाली करेंसी बनाने का कारोबार किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम गठित की गई। स्वाट टीम प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी, अरूण कुमार, योगेन्द्र सिंह, अरूण कुमार वर्मा, नारकोटिक्स सैल प्रभारी सौरभ शुक्ला, सत्यवीर सिंह की टीम ने बताए स्थान पर छापा मारकर मास्टरमाइंड आजाद पुत्र शाहबुद्दीन निवासी चमन कॉलोनी, कालका गढ़ी निवासी अमन पुत्र जयचंद, लालकुआं निवासी आलम उर्फ आशीष पुत्र जहीर और कैला भट्टा निवासी रहबर पुत्र स्व: अनवर पठान व सोनू उर्फ गंजा पुत्र हनीफ और इस्लामनगर निवासी मोहम्मद यूनुस पुत्र हनीफ, विजयनगर निवासी फुरकान अब्बासी पुत्र निसार शामिल हैं। आजाद, सोनू उर्फ गंजा, यूनुस जाली करेंसी छापने का काम करते थे और अन्य आरोपी 20 प्रतिशत के कमीशन पर बाजारों में जाली नोट चलाने का काम करते थे। 

सीओ सदर ने बताया आरोपियों ने कुछ माह पूर्व पेट्रोल पंप पर एक व्यक्ति से कुछ नोटों के खुले रुपए कराए थे। खुले रुपयों में उस व्यक्ति ने उसे कुछ जाली नोट भी दे दिए थे, लेकिन यह जाली नोट बाजार में चल गए। आजाद ने बताया कि जाली नोटों के बाजार में चल जाने के बाद उसे नोट बनाने का आइडिया सूझा तो उस पर काम करना शुरू कर दिया। मई 2021 में उसने यूट्यूब पर जाली नोट बनाने का तरीका खोजना शुरू किया और यूट्यूब पर वीडियो देख-देख कर वह जाली नोट बनाना सीख गया। करीब चार माह में जाली नोट बनाने में एक्सपर्ट हो गया। 

असल पढ़ाई में फिसड्डी रहने वाले आरोपी जालसाजी के मामले में अव्वल निकले। पूरे मामले का मास्टरमाइंड आजाद महज 8वीं पास है। जबकि उनके अन्य साथी भी 8वीं और 5वीं कक्षा तक ही पढ़े हैं। कम पढ़े लिखे होने के बावजूद आरोपी जाली नोटों को बनाने से लेकर उन्हें बाजार में चलाने तक का काम बड़ी सफाई से कर रहे थे।
उन्होंने बताया आरोपी असली 1 हजार रुपए के बदले में जाली करेंसी के तीन हजार रुपए देते थे। आरोपियों के ठिकाने पर छापेमारी से पूर्व पुलिस टीम के सदस्य भी उनसे डेढ़ लाख रुपए के बदले में जाली करेंसी के नोट लेने के लिए पहुंचे थे। 

मुखबिर की सूचना पुख्ता पाई जाने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने अब तक करीब 12 लाख रुपए बाजार में खपा देने की बात कबूली है। स्वाट टीम प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी ने बताया कि पकड़ा गया आरोपित रहबर का भाई घंटाघर स्थित मार्केट में चूडिय़ों की दुकान करता है। जहां पर जाली नोट बड़ी तादात में खपाए जा रहे थे। आरोपी रहबर जाली करेंसी को ले जाकर अपने भाई को देता था। उसका भाई दुकान से चूडिय़ां खरीदने वाली महिला ग्राहकों को पैसों के लेन-देन में जाली नोट मिलाकर दे देता था। यह काम मोटे कमीशन पर किया जा रहा था।

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