दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड रेल के लिए ट्रेन कोच बनने शुरू, लोटस टैंपल की दिखेगी झलक, देखिए पहली झलक और सुविधाएं

BIG BREAKING : दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड रेल के लिए ट्रेन कोच बनने शुरू, लोटस टैंपल की दिखेगी झलक, देखिए पहली झलक और सुविधाएं

दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड रेल के लिए ट्रेन कोच बनने शुरू, लोटस टैंपल की दिखेगी झलक, देखिए पहली झलक और सुविधाएं

Tricity Today | दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड रेल के लिए ट्रेन कोच बनने शुरू

दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड रेल के लिए ट्रेन कोच बनने शुरू, लोटस टैंपल की दिखेगी झलक, देखिए पहली झलक और सुविधाएं
  • -आरआरटीएस प्रोजेक्ट के लिए आधुनिक कम्युटर और ट्रांज़िट ट्रेंस का निर्माण शुरू किया
  • -210 रीज़नल कम्युटर और ट्रांज़िट ट्रेन कारों का डिज़ाईन, निर्माण एल्सटॉम को दिया गया है
  • -इन सारी ट्रेन का निर्माण एल्सटॉम के गुजरात में सवली संयंत्र में किया जा रहा है
Delhi-Ghaziabad-Meerut Rapid Rail Project Update : दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रैपिड रेल के लिए ट्रेन बनाने का काम शुरू हो गया है। यह देश की पहली रीजनल रैपिड रेल है। जिसके लिए केंद्र सरकार बेहद खूबसूरत ट्रेन कोच का निर्माण करवा रही है। यह दुनिया की अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं वाले बनाए जा रहे हैं। यह जिम्मेदारी मल्टीनेशनल कम्पनी एल्सटॉम को सौंपी गई है। कम्पनी ने आरआरटीएस फेज़-1 के दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए कम्युटर और ट्रांज़िट ट्रेनों का निर्माण शुरू कर दिया है। पिछले साल मई में कंपनी को 210 रीज़नल कम्युटर और ट्रांज़िट ट्रेन कारों के डिज़ाईन, निर्माण और आपूर्ति के साथ 15 सालों के लिए विस्तृत मेंटेनेंस सर्विस दी गई है।



एल्सटॉम ने रीज़नल कम्युटर और ट्रांज़िट ट्रेनों का निर्माण शुरू कर दिया है। कम्पनी के साथ अनुबंध के मुताबिक एल्सटॉम 30 रीज़नल कम्युटर ट्रेन सेट्स की आपूर्ति करेगा। जिनमें से प्रत्येक छः कारों की होगी और 10 मास ट्रांज़िट कारों में से प्रत्येक तीन कारों की होगी। देश के “आत्मनिर्भर भारत” के उद्देश्य और मेक-इन-इंडिया के दिशा निर्देशों के अनुरूप यह आरआरटीएस ट्रेनें 100 फीसदी देशी हैं। गुजरात के सवली संयंत्र में बनाई जा रही हैं। जिनमें 80 फीसदी से ज्यादा लोकलाईज़ेशन है। यह सुविधा बोगी, कार बॉडी बनाएगी और ट्रेन की टेस्टिंग करेगी। प्रोपल्ज़न सिस्टम और इलेक्ट्रिकल्स मानेजा में कंपनी की फैक्ट्री में बनाए जा रहे हैं।

एल्सटॉम इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर के एलेन स्पोह्रए ने कहा, “यह प्रोजेक्ट भारत के रीज़नल रेल सेगमेंट के लिए गेम-चेंजर है, जो लाखों लोगों को लाभान्वित करके सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देगा। हमें देश की पहली सेमी हाई-स्पीड कम्युटर सेवा के लिए इन प्रौद्योगिकी की दृष्टि से उन्नत ट्रेनों का स्थानीय स्तर पर निर्माण शुरू करने की खुशी है। एल्सटॉम में हम सतत उत्पाद व समाधानों के विकास पर केंद्रित रहते हैं, जो आने वाले समय में दशकों तक शानदार काम करते रहें।"



भारत के पहले रीज़नल रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (आरआरटीएस) के लिए ट्रेन का डिज़ाइन सितंबर 2020 में प्रस्तुत किया गया। दिल्ली के प्रतिष्ठित स्मारक लोटस टैंपल से प्रेरित नई ट्रेनों का नया आधुनिक और उन्नत लुक भारत की संपन्न विरासत व सततता के अद्वितीय संगम से मिलता-जुलता है। इन एनर्जी एफिशियंट सेमी हाई-स्पीड एयरोडाइनामिक ट्रेनों में लेटेस्ट तकनीकी फीचर्स होंगे, जो दिव्यांगों सहित सभी यात्रियों, कम्युटर्स को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे।

कम्पनी का दावा है, इन ट्रेनों का निर्माण भारत में यात्रियों के लिए रीज़नल कम्युट के भविष्य में परिवर्तन लाने के लिए किया गया है। आरआरटीएस कॉरिडोर भारत में सबसे तेज गति की ट्रेनों का संचालन करेगा। जो 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिज़ाइन की जाएंगी। सही इर्गोनोमिक्स, सुरक्षा, कम लाइफ साइकल, लागत और उच्च रिसाइक्लेबिलिटी के कारण ट्रेनें सततता का आकर्षक विकल्प होंगी। ये जन परिवहन को बढ़ावा देकर ट्रैफिक के जाम से राहत दिलाएंगी। प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।



एल्सटॉम इस 82.15 किलोमीटर के कॉरिडोर के लिए सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल, सुपरविज़न, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर एन्ड टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम का डिज़ाईन, आपूर्ति, टेस्टिंग और कमीशनिंग करना शामिल है। यह लाइन भारत की पहली लाइन है, जिसने यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) हाईब्रिड लेवल-2 सिग्नलिंग सिस्टम अपनाया है। यह यूरोपियन रेल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ईआरटीएमएस) का मुख्य सिग्नलिंग एवं ट्रेन कंट्रोल कंपोनेंट है।

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