फर्जी दस्तावेज बनाकर लेना चाहते थे मुआवजे की रकम, उल्टी पड़ गई चाल

Ghaziabad : फर्जी दस्तावेज बनाकर लेना चाहते थे मुआवजे की रकम, उल्टी पड़ गई चाल

फर्जी दस्तावेज बनाकर लेना चाहते थे मुआवजे की रकम, उल्टी पड़ गई चाल

Google Image | Symbolic Image

फर्जी दस्तावेज बनाकर लेना चाहते थे मुआवजे की रकम, उल्टी पड़ गई चाल Ghaziabad : गाजियाबाद में धोखाधड़ी और झूठ का सहारा लेकर 49.31 लाख रुपए का मुआवजा लेने का प्रयास करने का मामला सामने आया है। इस मामले में अदालत ने जांच के आदेश दिए हैं। आरोपी ने एक साथ दो–दो आधार कार्ड और पैन कार्ड लगाकर फर्जी दस्तावेज पेश किए थे। यह फर्जी दस्तावेज पेश कर आरोपी लाख रुपए का मुआवजा लेने के फिराक में था। आरोपी के खिलाफ अदालत ने जांच का आदेश दिया है।

दुबारा मुवावजे के लिए दिया आवेदन
साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि अगर जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश–9 तेंद्रपाल की अदालत ने इस मामले को गंभीरता के साथ लिया है और एसएसपी गाजियाबाद को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने का आदेश दिया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आदेश त्यागी ने बताया कि कई साल पहले मैसर्स दुर्गा हाउसिंग कारपोरेशन की जमीन का अधिग्रहण हुआ था। उसका एक बार मुआवजा दिया जा चुका है। अब इस कंपनी ने बढ़ाई गई दर के साथ दोबारा मुआवजा लेने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी।

जमां किए फर्जी दस्तावेज
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड द्वारा मुआवजे की रकम अदालत में जमा कराया जा चुका है। कंपनी की तरफ से प्रोपराइटर शरद भारद्वाज के नाम से आवेदन किया गया था। शपथ पत्र के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड की प्रति और बैंक खाते की पासबुक की प्रति भी अदालत में पेश की गई। जब दस्तावेजों की जांच की गई तो यह पता चला कि आधार कार्ड और पैन कार्ड पर दिल्ली का पता लिखा है।

एक व्यक्ति ने नाम से दो पैन कार्ड और आधार कार्ड
मामले की गंभीरता से जांच करने के बाद यह पाया गया कि बैंक खाते की पासबुक पर लोनी, गाजियाबाद का पता दर्ज है। बैंक से डिटेल मंगवाने पर पता चला कि बैंक खाता दूसरा आधार कार्ड और पैन कार्ड पर खुलवाए गया था, जिस पर लोनी का पता दर्ज है। दोनों पैन कार्ड और आधार कार्ड पर नाम शरद भारद्वाज का लिखा है, लेकिन फोटो व पता अलग-अलग हैं। इस बात का खुलासा होने पर अदालत ने कहा कि आवेदक द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी करना और असली शख्स की मुआवजे की रकम हड़पने का प्रयास किया गया है। इसलिए मामले की जांच अनिवार्य रूप से और गंभीरता से कराई जाए।

Copyright © 2021 - 2022 Tricity. All Rights Reserved.