गाजियाबाद, आगरा और प्रयागराज में क्यों लागू हुई पुलिस आयुक्त प्रणाली, जानिए तीन बड़ी वजह

Police Commissionerate System : गाजियाबाद, आगरा और प्रयागराज में क्यों लागू हुई पुलिस आयुक्त प्रणाली, जानिए तीन बड़ी वजह

गाजियाबाद, आगरा और प्रयागराज में क्यों लागू हुई पुलिस आयुक्त प्रणाली, जानिए तीन बड़ी वजह

Google Image | Yogi Adityanath

गाजियाबाद, आगरा और प्रयागराज में क्यों लागू हुई पुलिस आयुक्त प्रणाली, जानिए तीन बड़ी वजह Ghaziabad/Agra : उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने शुक्रवार को राज्य के तीन और महानगरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है। इनमें गाजियाबाद और आगरा शहर शामिल हैं। अब कुल मिलाकर यूपी के 7 महानगरों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। मिली जानकारी के मुताबिक देर शाम तक आगरा, गाजियाबाद और प्रयागराज में नए पुलिस आयुक्तों की तैनाती कर दी जाएगी। आम आदमी के मन में सवाल चल रहा है कि आखिर यह नई व्यवस्था इन शहरों में क्यों लागू करनी पड़ी है? इसकी कुछ खास वजह हैं, जो हम आपको बताते हैं।

1. देश के सर्वाधिक आबादी वाले शहर हैं आगरा और गाजियाबाद : आगरा और गाजियाबाद देश के उन शहरों में शुमार हैं, जिनकी आबादी 15 लाख से ज्यादा है। अभी तक देश में केवल ऐसे तीन शहर पटना, गाजियाबाद और आगरा थे, जिनकी आबादी 15 लाख से ज्यादा है और वहां पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू नहीं है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद और आगरा में यह व्यवस्था लागू कर दी है। लिहाजा अब केवल बिहार की राजधानी पटना ऐसा शहर है, जहां पुलिस आयुक्त व्यवस्था नहीं है और वहां की आबादी 15 लाख से ज्यादा है। आपको बता दें कि 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक पटना शहर की आबादी 23.50 लाख थी। गाजियाबाद की आबादी 17.29 थी। आगरा की आबादी 16 लाख और प्रयागराज शहर की आबादी भी 15.36 लाख थी। ऐसे में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम गाजियाबाद और आगरा में लागू करना नितांत जरूरी था।

2. गाजियाबाद सीमावर्ती शहर, प्रयागराज और आगरा अंतरराष्ट्रीय शहर हैं : गाजियाबाद जिला भौगोलिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। यह उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों की सीमाओं से मिलता है। जिसके चलते अपराधी, गैंगस्टर और माफिया गाजियाबाद शहर में दशकों से सक्रिय रहे हैं। पुलिस अफसरों के मुताबिक हरियाणा और दिल्ली में वारदातों को अंजाम देने के बाद अपराधी गाजियाबाद में छपने के लिए प्रवेश कर जाते हैं। बाद में वही अपराधी यहां भी वारदातों को अंजाम देते हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पिछले साढ़े 5 वर्षों से गाजियाबाद में कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने में जुटी है। इसके बावजूद लगातार लूट, डकैती और हत्या जैसी वारदातें हो रही हैं। इसी के चलते सरकार ने गाजियाबाद में यह व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। आगरा अंतरराष्ट्रीय शहर है। आगरा में ताजमहल देखने के लिए दुनिया भर से सालाना लाखों पर्यटक आते हैं। ऐसे में यहां होने वाली आपराधिक घटनाएं अंतर्राष्ट्रीय खबरों में छा जाती हैं। जिससे उत्तर प्रदेश की छवि खराब होती है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर के नेता और राजनयिक भारत यात्रा के दौरान आगरा आना जरूर पसंद करते हैं। ऐसे में आगरा की कानून व्यवस्था चाक चौबंद रखना योगी आदित्यनाथ सरकार ने जरूरी समझा है। प्रयागराज भी अंतरराष्ट्रीय शहर है। यहां का संगम और कुम्भ-महाकुम्भ मेला विश्व प्रसिद्ध है।

3. आगरा, प्रयागराज और गाजियाबाद बड़े औद्योगिक केंद्र : उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक शहरों को मजबूत करने में जुटी है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2027 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। ऐसे में यह नितांत आवश्यक है कि औद्योगिक महानगरों में शांति रहे। कानून व्यवस्था कायम रहे। निवेशक और उद्यमी खुद को सुरक्षित महसूस करें। राज्य की जीडीपी में गौतमबुद्ध नगर के बाद आगरा और गाजियाबाद ही सबसे बड़ा योगदान करते हैं। आगरा की जीडीपी 40,930 करोड़ रुपए है और गाजियाबाद की जीडीपी 31,733 करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी जीडीपी गौतमबुद्ध नगर की 1,02,909 करोड़ रुपए है। इसी तरह पूर्वांचल में प्रयागराज सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला जिला है। प्रयागराज की जीडीपी 38,806 करोड़ रुपये है। यह वाराणसी से दो गुनी ज्यादा है। योगी सरकार पूर्वांचल को माफिया मुक्त करके आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करना चाहती है।

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