वर्ष 2020 से अब तक 75 प्रतिशत मामले साइबर क्राइम के आए, सोशल मीडिया पर फैला ठगों का जाल

FCRF ने पेश की हैरान कर देने वाली रिपोर्ट : वर्ष 2020 से अब तक 75 प्रतिशत मामले साइबर क्राइम के आए, सोशल मीडिया पर फैला ठगों का जाल

वर्ष 2020 से अब तक 75 प्रतिशत मामले साइबर क्राइम के आए, सोशल मीडिया पर फैला ठगों का जाल

Tricity Today | हर्षवर्धन सिंह (एफसीआरएफ सह-संस्थापक)

Greater Noida Desk : आईआईटी कानपुर-इनक्यूबेटेड स्टार्ट-अप के एक नए अध्ययन के अनुसार जनवरी 2020 से जून 2023 तक देश में 75 फीसदी से अधिक साइबर अपराध वित्तीय धोखाधड़ी के कारण हुए। जिनमें से लगभग 50 फीसदी मामले यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित थे। अध्ययन के अनुसार इस अवधि के दौरान ऑनलाइन अपराधों में से 12 फीसदी के लिए सोशल मीडिया से संबंधित अपराध जैसे कि प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, साइबर-धमकाने, सेक्सटिंग और ईमेल फिशिंग शामिल हैं। यह जानकारी फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (एफसीआरएफ) के सह-संस्थापक हर्ष वर्द्धन सिंह ने एक बयान में दी। 

किस आधार पर जारी किया डाटा
उन्होंने बताया कि फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (एफसीआरएफ) ने भारत पर प्रभाव डालने वाले साइबर अपराधों पर गहन अध्ययन किया है। जिसका शीर्षक "ए डीप डाइव इनटू साइबर क्राइम ट्रेंड्स इम्पैक्टिंग इंडिया" है। यह जनवरी 2020 से जून 2023 तक के डेटा का विश्लेषण करती है। 

वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा 77.41 फीसदी
एफसीआरएफ के श्वेत पत्र में एक महत्वपूर्ण बयान दिया गया है कि इस अवधि के दौरान कुल रिपोर्ट किए गए साइबर अपराधों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा 77.41 फीसदी है। यह साइबर सुरक्षा उपायों को बढ़ाने और व्यक्तियों और संगठनों दोनों के बीच जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि श्वेतपत्र के अनुसार, सोशल मीडिया से संबंधित अपराधों में 12.02 फीसदी ऑनलाइन अपराध शामिल हैं। इस श्रेणी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। इस डोमेन के भीतर उपश्रेणियों में प्रतिरूपण, साइबर-धमकाने, सेक्सटिंग, ईमेल फिशिंग और धोखाधड़ी शामिल है। 

लोग साइबर अपराध से कैसे बचें
सह-संस्थापक हर्षवर्द्धन सिंह ने बताया कि भारत में साइबर अपराधों के बदलते परिदृश्य को समझना कानून प्रवर्तन एजेंसियों, व्यक्तियों, व्यवसायों और नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट न केवल साइबर अपराधों के वितरण पर प्रकाश डालती है बल्कि इसकी आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। इन खतरों से निपटने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों के लिए जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों की रणनीति भी आगे बढ़ रही है, जिससे सभी के लिए सतर्क रहना आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि भारत में साइबर अपराध पर विश्लेषण में एफसीआरएफ का श्वेतपत्र डिजिटल खतरों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील शीर्ष 10 जिलों की पहचान करता है। ये जिले देश में दर्ज की गई साइबर अपराध की 80 फीसदी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। इस सूची में सबसे आगे भरतपुर है, जहां 18 फीसदी घटनाएं होती हैं, इसके बाद मथुरा 12 फीसदी और नूंह 11 फीसदी है।

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