88 ग्राम पंचायतों को ‘मिनी सचिवालय’ बनाने का अभियान शुरू, इन कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा तहसील

गौतमबुद्ध नगर: 88 ग्राम पंचायतों को ‘मिनी सचिवालय’ बनाने का अभियान शुरू, इन कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा तहसील

88 ग्राम पंचायतों को ‘मिनी सचिवालय’ बनाने का अभियान शुरू, इन कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा तहसील

Tricity Today | 88 ग्राम पंचायतों को ‘मिनी सचिवालय’ बनाने का अभियान शुरू

88 ग्राम पंचायतों को ‘मिनी सचिवालय’ बनाने का अभियान शुरू, इन कार्यों के लिए नहीं जाना पड़ेगा तहसील
  • 88 ग्राम पंचायतों को मिनी ग्राम सचिवालय बनाने की कवायद शुरू हो गई है
  • जिन ग्राम पंचायतों में पहले से पंचायत भवन हैं, वहां मरम्मत कार्य कराया जा रहा है
  • कम्प्यूटर, आलमारी, सोलर पैनल, इनवर्टर एवं बैटरी, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे
  • इन सबके लिए पंचायतों को 1,75,000 रुपये की धनराशि दी जा रही है
Gautam Buddh Nagar: गौतमबुद्ध नगर की 88 ग्राम पंचायतों को मिनी ग्राम सचिवालय बनाने की कवायद शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश शासन के आदेशानुसार इन ग्राम पंचायतों को अत्याधुनिक बनाया जाएगा। यहां ग्राम पंचायत भवन का निर्माण कराया जाएगा। जिन ग्राम पंचायतों में पहले से पंचायत भवन हैं, वहां मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अगले 3 महीने में भवन निर्माण का काम पूरा करा कर वहां कंप्यूटर लगाने और दूसरे उपकरण व्यवस्थित करने का आदेश दिया है। हर ग्राम पंचायत भवन को सुसज्जित करने के लिए फर्नीचर व अन्य आवश्यक उपकरणों की खरीद ग्राम पंचायतें स्वयं कर सकेंगी। इनमें कम्प्यूटर, आलमारी, सोलर पैनल, इनवर्टर एवं बैटरी, सीसीटीवी कैमरे भी शामिल हैं। इन सबके लिए पंचायतों को 1,75,000 रुपये की धनराशि दी जा रही है।

पंचायत कार्यालयों में ही कामन सर्विस सेंटर संचालित किया जाएगा। जिससे ग्रामीणजन प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों के हितार्थ चलायी जा रही योजनाओं से अवगत हो सकेंगे। शासन द्वारा बीसी सखी के माध्यम से ग्राम पंचायतों में लोगों को बैकिंग सुविधा उपलब्ध कराने की योजना संचालित है। यह कार्य भी ग्राम पंचायत भवन से ही किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। ग्राम स्तरीय विभिन्न विभागों के कर्मी आवश्यकतानुसार ग्राम पंचायत में एक जगह बैठकर कार्य कर सकें। इसके लिए भी ग्राम पंचायत का अपना भवन होना आवश्यक है।


58000 से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं
उत्तर प्रदेश की 78 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित हैं। गांवों में संचालित विभिन्न योजनाओं में ग्रामीण जनों की भागीदारी योजना की सफलता के लिए अनिवार्य हैं। प्रदेश सरकार अपने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक निवासी के विकास के लिए प्रयासरत एवं कटिबद्ध है। शासन की सभी महत्वपूर्ण योजनाएं ग्राम पंचायतों के माध्यम से अथवा उनके सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित होती है। प्रदेश में 73वां संविधान संशोधन के अनुरूप त्रिस्तरीय पंचायतीराज प्रणाली लागू है। प्रदेश में वर्तमान में 58000 से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं। पिछले कई वर्षों से ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन या सामुदायिक भवन बनाने का कार्य चल रहा है। जिसके पीछे यह सोच है कि इन पंचायतों में नियमित कार्यालय का संचालन होना चाहिए। परन्तु ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यालय संचालन के पूर्व प्रयास सफलतापूर्वक क्रियान्वित नहीं हो पाए हैं। जबकि ग्राम पंचायतों को जो दायित्व निर्वहन के लिए दिए गए है, उसे पूर्ण करने हेतु इनका अपना भवन आवश्यक है।

24 हजार से ज्यादा नये पंचायत भवन का निर्माण
उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार के पंचायतीराज विभाग द्वारा प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम स्वराज के लिए ग्राम सचिवालय की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अन्तर्गत ग्राम पंचायत कार्यालय भवन की आवश्यकता के अनुसार मरम्मत, विस्तार, नवनिर्माण के कार्य किये जा रहें हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी कार्य अगले 3 माह में पूर्ण कर लिए जाने का समयबद्ध लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। लगभग 33 हजार से अधिक पूर्व निर्मित पंचायत भवनों में मरम्मत व विस्तार की आवश्यकता है। जबकि 24 हजार से अधिक नये पंचायत भवनों का निर्माण किया जाना है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत के यह भवन ग्राम सचिवालय के रूप में कार्य कर सकें। इसके लिए इनमें अनेक सुविधाओं की स्थापना की जा रही है। इन सभी ग्राम पंचायत भवनों कों इण्टरनेट से जोड़ा जा रहा है।

11008 पंचायत सचिव संभाल रहे जिम्मेदारी
प्रदेश की वर्तमान सरकार ग्राम पंचायतों में रोजगार के व्यापक अवसर भी उपलब्ध कराने जा रही है। ग्राम पंचायत कार्यालय को पूर्व में संचालित करने के लिए किए गए प्रयास पूर्ण सफल नही हो पाए। क्योंकि प्रदेश की 58000 से अधिक ग्राम पंचायतों में वर्तमान में लगभग 11,008 पंचायत सचिव-ग्राम विकास अधिकारी ही कार्यरत हैं। जिससे एक कर्मी के पास एक से अधिक ग्राम पंचायत का कार्यभार होने के कारण वह प्रतिदिन नियमित रूप से ग्राम पंचायत में उपस्थित होकर कार्यालय का संचालन नही कर पाते थे। इसलिए वर्तमान सरकार ग्राम पंचायतों में कार्मिकों की कमी दूर करने के लिए इन पंचायतों में पंचायत सहायक, एकाउंटेन्ट-कम-डाटा इन्ट्री ऑपरेटर का चयन करने जा रही है। इसके लिए ग्राम पंचायत की प्रशासनिक समिति द्वारा उसी ग्राम पंचायत के योग्य अभ्यर्थियों में से चयन किया जाएगा। यह कर्मी ग्राम पंचायत के दिन प्रतिदिन के कार्यों का संचालन करेंगे।

ग्राम सचिवालय में होगा हर काम
पंचायत सहायक, एकाउंटेन्ट-कम-डाटा इन्ट्री आपरेटर को इसकी सेवाओं के बदले ग्राम पंचायतें 6 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान करेंगी। इन कार्मिकों को पंचायतीराज निदेशालय, पंचायतीराज प्रशिक्षण संस्थान (प्रिंट) द्वारा आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि वे अपना कार्य भलीभांति सम्पादित कर सकेंगे। पंचायत सहायक की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने एवं भाई-भतीजावाद रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने व्यापक प्रावधान रखे है। जिसके अन्तर्गत ग्राम पंचायत के प्रधान, उपप्रधान, सदस्य अथवा सचिव के किसी संबंधी को इस पद पर नही रखा जा सकेगा। ग्राम सचिवालय में जन्म मृत्यु पंजीकरण प्रपत्र, परिवार रजिस्टर, ग्राम पंचायत के आय-व्यय से सम्बन्धित पुस्तिका एवं बिल वाउचर, कार्यवाही रजिस्टर, विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सूची, बीपीएल परिवारों की सूची, विभिन्न योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र आदि उपलब्ध रखे जायेंगे। इससे उनका आवश्यकतानुसार उपयोग किया जा सके।

इंटरनेट से जुड़ेंगे गांव
ग्राम सचिवालय की स्थापना से ग्रामीण लोकतंत्र को और मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार का यह प्रयास गांवों के विकास को नई उड़ान प्रदान करेगा। गांव के सभी निवासी ग्राम सचिवालय से राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा उनके हितार्थ चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे। वहीं इनमें स्थापित कॉमन सर्विस सेंटर से उन योजनाओं के लिए आवेदन भी कर सकेंगे। ग्रामीण विकास से संबंधित समस्त जानकारियां इण्टरनेट के माध्यम से यहां उपलब्ध होंगी। ग्राम सचिवालय से प्रदेश के ग्रामवासी भारत एवं विश्व के विकास के साथ तालमेल स्थापित करने में सक्षम बनेगें। प्रदेश सरकार का यह कदम गंवों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा। ग्रामीणजनों की जिंदगी आसान करेगा। इससे सरकार और नागरिकों के बीच संपर्क आसान होगा। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा।

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