गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत : 24 वर्षों से उठापटक और आईएएस प्रशासक हावी, एक अध्यक्ष की हत्या और तीन हटाए गए

24 वर्षों से उठापटक और आईएएस प्रशासक हावी, एक अध्यक्ष की हत्या और तीन हटाए गए

Tricity Today | गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत

आने वाली 7 मई को गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत की उम्र 24 साल हो जाएगी। इन 24 वर्षों के दौरान इस महत्वपूर्ण राजनीतिक निकाय ने बड़ी उठापटक देखी हैं। खास बात यह रही है कि इन 24 वर्षों में से करीब 12 वर्षों तक प्रशासक और कार्यवाहक अध्यक्ष काम करते रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत के एक अध्यक्ष की पद पर रहते हत्या कर दी गई थी। तीन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटाया गया है। इस बार गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत में सबसे कम महज 5 सदस्य होंगे और पूरी संभावना है कि भारतीय जनता पार्टी का कोई सदस्य अध्यक्ष बनेगा। पहली बार भाजपा को यह कामयाबी हासिल करने का मौका मिलने वाला है।

गाजियाबाद और बुलंदशहर से कटकर गौतमबुद्ध नगर जिला मई 1997 में अस्तित्व में आया। जिससे जिला पंचायत का भी गठन किया गया। सबसे पहले तत्कालीन जिलाधिकारी सुखबीर सिंह संधू ने बतौर जिला पंचायत अध्यक्ष 7 मई 1997 को कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद आईएएस मनोज सिंह 26 अगस्त 1998 तक बतौर प्रशासक जिला पंचायत में काम करते रहे। गाजियाबाद जिला पंचायत के 14 सदस्यों को यहां लाकर गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत का गठन किया गया। 26 अगस्त 1998 को वेदपाल सिंह भाटी सर्वसम्मति से पहले जिला पंचायत अध्यक्ष नियुक्त हुए। वह 15 नवंबर 1998 तक अध्यक्ष रहे। इसके बाद 15 नवंबर 1998 को बिजेंद्र सिंह भाटी अध्यक्ष बन गए। वर्ष 2000 में नया पंचायत चुनाव होने तक बिजेंद्र सिंह भाटी इस पद पर बने रहे।

नरेश भाटी पहली बार चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने
वर्ष 2000 के पंचायत चुनाव में नरेश भाटी जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए और 9 अगस्त 2000 को जिला पंचायत अध्यक्ष बनने में भी कामयाबी हासिल की। वह चुनाव जीतकर अध्यक्ष बनने वाले पहले नेता थे। वह हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर भी थे। 3 नवंबर 2003 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इस चुनाव में देहात मोर्चा के वीरेंद्र सिंह डाढ़ा जिला पंचायत के निर्विरोध उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।

एक कार्यकाल में दो बार कार्यवाहक अध्यक्ष बने डाढ़ा
इस कार्यकाल में वीरेंद्र सिंह डाढ़ा दो बार कार्यवाहक अध्यक्ष बने। 3 नवम्बर 2003 को जिला पंचायत अध्यक्ष नरेश भाटी जेल चले गए। वह 22 जनवरी 2004 तक जेल में बंद रहे। इस दौरान वीरेंद्र सिंह डाढ़ा कार्यवाहक अध्यक्ष रहे। इसके बाद 29 मार्च 2004 को वीरेंद्र सिंह डाढ़ा ने एकबार फिर जिला पंचायत के कार्यवाहक अध्यक्ष बने। दरअसल, दो दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष नरेश भाटी की हत्या कर दी गई थी। अगला पंचायत चुनाव होने तक वीरेंद्र सिंह डाढ़ा जिला पंचायत अध्यक्ष बने रहे।

2005 में चुनाव हुआ लेकिन जिला पंचायत नहीं बनी
वर्ष 2005 में पंचायत चुनाव हुए लेकिन मुलायम सिंह यादव ने गौतमबुद्ध नगर जिला भंग कर दिया था। जिससे जिला पंचायत का गठन नहीं करवाया गया। 9 अक्टूबर 2005 से 13 जनवरी 2006 तक गौतमबुद्ध नगर के तत्कालीन जिलाधिकारी संतोष कुमार यादव बतौर प्रशासक कामकाज देखते रहे। अदालत के आदेश पर जिला बहाल हुआ। अंततः 14 जनवरी 2006 को लोक सिंह खटीक जिला पंचायत अध्यक्ष बने। वह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे। 

मायावती सीएम बनीं तो लोक सिंह रुखसत हो गए
वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुआ और बहुजन समाज पार्टी की सरकार बन गई। मायावती मुख्यमंत्री बनीं। गौतमबुद्ध नगर उनका पैतृक जिला है। लिहाजा, सबसे पहले यहां के जिला पंचायत अध्यक्ष पर गाज गिरी। लोक सिंह खटीक के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया और 16 जून 2008 को वह अविश्वास प्रस्ताव में हार गए। इसके बाद जिला प्रशासन ने बाला देवी, सुषमा भाटी और जितेंद्र यादव की एक समिति नियुक्त की। जिसने 7 अक्टूबर 2008 तक जिला पंचायत का कामकाज संभाला। 

बाला देवी पहली महिला और दलित अध्यक्ष बनीं
जेवर से तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी के विधायक होराम सिंह की बेटी बाला देवी जिला पंचायत सदस्य थीं। लिहाजा, बहुजन समाज पार्टी ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर बाला देवी की ताजपोशी करने में कामयाबी हासिल कर ली। बाला देवी गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत की पहली महिला और दलित अध्यक्ष थीं। इसके बाद वर्ष 2011 में फिर पंचायत चुनाव हुए। गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित था। बहुजन समाज पार्टी की सरकार होने के नाते बसपा ने एक बार फिर कामयाबी हासिल की। जयवती नगर जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। वह 14 जनवरी 2011 से 18 जुलाई 2014 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। 

इस बार सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष को हटाया
राज्य में एकबार फिर सत्ता परिवर्तन हुआ। अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार आई। गौतमबुद्ध नगर मायावती का पैतृक जिला है तो सबसे पहले यहां के जिला पंचायत अध्यक्ष पर गाज गिरनी ही थी। एकबार फिर जिला पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव आया और जयवती नगर सदन में हार गईं। जिला पंचायत का कामकाज संचालित करने के लिए जिला प्रशासन में रविंदर भाटी, राजेंद्र बूढ़ा और फकीर चंद नागर की समिति का गठन कर दिया। 

मिड टर्म जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सपा ने जीता
29 अक्टूबर 2014 को जिला पंचायत अध्यक्ष का मिडटर्म चुनाव हुआ और रविंद्र भाटी लडपुरा अध्यक्ष बनने में कामयाब हो गए। वह और उनकी पत्नी सुषमा भाटी जिला पंचायत सदस्य थे। रविंद्र भाटी 29 अक्टूबर 2014 से 13 जनवरी 2016 तक जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे। इसके बाद जिले में पंचायत चुनाव नहीं करवाए गए। तब से अब तक जिलाधिकारी के पास बतौर प्रशासक जिला पंचायत अध्यक्ष का चार्ज है। इस दौरान एनपी सिंह, बृजेश नारायण सिंह और सुहास एलवाई जिला पंचायत में बतौर प्रशासक काम कर रहे हैं।

भाजपा को पहली बार अध्यक्ष बनाने की संभावना
कुल मिलाकर गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत पर राज्य में सत्तासीन रही पार्टियों का बड़ा प्रभाव रहा है। जब-जब उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है, उसके साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पर भी संकट के बादल मंडराते रहे हैं। यही वजह है कि गौतमबुद्ध नगर जिला पंचायत में हमेशा राजनीतिक उठापटक का दौर जारी रहा है। अब तक कोई भी जिला पंचायत अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा करने में कामयाब नहीं हुआ है। एक जिला पंचायत अध्यक्ष नरेश भाटी की हत्या हुई। तीन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटाया गया है। पहली बार भाजपा को अध्यक्ष पद हासिल करने की उम्मीद है। दरअसल, जब से गौतमबुद्ध नगर जिला अस्तित्व में आया, तब से पहली बार भाजपा सत्तासीन है।

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