अजय को जीने के लिए गंवाना पड़ा पांव, कीड़े देख भाग गए थे सरकारी डॉक्टर, सोशल वर्कर ने दिया नया जीवन

जीवनदान : अजय को जीने के लिए गंवाना पड़ा पांव, कीड़े देख भाग गए थे सरकारी डॉक्टर, सोशल वर्कर ने दिया नया जीवन

अजय को जीने के लिए गंवाना पड़ा पांव, कीड़े देख भाग गए थे सरकारी डॉक्टर, सोशल वर्कर ने दिया नया जीवन

Tricity Today | सोशल वर्कर और अजय

अजय को जीने के लिए गंवाना पड़ा पांव, कीड़े देख भाग गए थे सरकारी डॉक्टर, सोशल वर्कर ने दिया नया जीवन Greater Noida : गौतमबुद्ध नगर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के डॉक्टर जिस इंसान को देखकर संवेदनहीन हो गए थे, एक सोशल वर्कर उसकी जान बचाने में कामयाब हो गई है। ग्रेटर नोएडा के सबसे बड़े बाजार जगत फार्म में पुलिस चौकी से चन्द कदमों की दूरी पर यह असहाय इंसान अंतिम सांसें गिन रहा था। उड़ीसा के रहने वाले अजय अब हंस रहे हैं। हालांकि, उनकी जान बचाने के लिए पैर काटना पड़ा है।

अजय को जीने के लिए गंवाना पड़ा पांव
यह मामला ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS Greater Noida) से जुड़ा है। शहर की जानी-मानी सोशल वर्कर कावेरी राणा और उनकी सहयोगी यशोमती को 30 सितंबर की रात उड़ीसा के रहने वाले अजय जगत फार्म में मिले थे। उनके पांव में कीड़े पड़े हुए थे। सोशल वर्कर बेहाल और बेघर बीमार अजय को लेकर जिम्स गई थीं। कावेरी राणा का कहना है, "अजय के पांव में पड़े कीड़े देखकर जिम्स के डॉक्टर भाग गए थे। करीब एक घंटे तक वह स्ट्रेचर पर पड़ा रहा। इलाज तो दूर किसी डॉक्टर ने पास आकर देखना तक मुनासिब नहीं समझा। मैंने जब एक डॉक्टर से हाथ जोड़कर निवेदन किया तो उन्होंने एक पर्चा थमा दिया। जिस पर सेवलोन और तारपीन का तेल लिखा था।" कावेरी राणा कहती हैं, "अब अजय ठीक है। हंस रहे हैं। हालांकि, उनकी जान बचाने के लिए उनका पांव काटना पड़ा है। नोएडा के फेलिक्स अस्पताल में दो दिन पहले उनका ऑपरेशन किया गया है। अभी वह करीब दो सप्ताह अस्पताल में रहेंगे। ऑपरेशन का घाव भरने के बाद उन्हें आर्टिफिशियल पांव लगाना पड़ेगा।"

पांव में कांच लगने के कारण गैंगरीन हो गया था, पड़ गए थे कीड़े
यशोमति बताती हैं, "अजय की बहुत बुरी हालत थी। उसका पैर सड़ गया था। पांव में गैंगरीन हो गया था। कीड़े पांव खा रहे थे। उसे इलाज की सख्त जरूरत थी। हम लोग गौतमबुद्ध नगर का सबसे बड़ा अस्पताल समझकर जिम्स पहुंच गए थे। हमें क्या पता था कि सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टर बड़े नाकारा हैं। अजय को देखते ही उन्होंने अपनी नाक में रुई ठूंस ली। किसी ने उसे एक बार देखने की हिम्मत नहीं जुटाई। जिस अस्पताल में सेवलोन नहीं, वहां ऐसे संकट में घिरे अजय का इलाज कैसे हो सकता था? अगर हम उसे वहां छोड़ आते तो उसकी मौत तय थी। लिहाजा, हम लोगों ने उस व्यक्ति को किसी बेहतर अस्पताल में भर्ती करवाना मुनासिब समझा। जिसमें हम लोग कामयाब हो गए। वह 30 सितंबर की रात से फेलिक्स अस्पताल में भर्ती है। हम अस्पताल के मालिक डॉ.डीके गुप्ता के शुक्रगुजार हैं। उन्होंने संकट की उस घड़ी में हमारा साथ दिया।" कावेरी राणा कहती हैं, "सरकारी डॉक्टरों ने हमें बहुत निराश किया है। जो काम फेलिक्स अस्पताल ने किया है, वह जिम्स आसानी से कर सकता था। लेकिन संवेदनहीन स्टाफ ने गरीब की मदद नहीं कि। उन्हें शर्म से डूबकर मर जाना चाहिए। बिल्कुल भी इंसानियत नहीं है।"

पत्रकार की मदद से फेलिक्स अस्पताल में भर्ती हुए अजय
पशु प्रेमी कावेरी राणा ने बताया कि 30 सितम्बर की रात जगत फार्म में उड़ीसा के रहने वाले अजय सड़क पर पड़े हुए थे। उनके पैर में काफी गहरा जख्म था। पैर बुरी तरह से सड़ गया था। फुटपाथ पर रहने वाले अजय के पैर में कांच लगने से यह दिक्कत आई। मेरी साथी यशोमती किसी काम से जगत फार्म गई थीं। वहीं उन्होंने अजय को इस बुरे हाल में देखा। फोन करके मुझे जानकारी दी। मैं बाहर थी। मुझे मौके पर पहुंचने में समय लग गया। इस बीच यशोमती अजय को लेकर जिम्स चली गईं। कावेरी ने कहा, "मैंने जब जिम्स अस्पताल के डॉक्टरों का संवेदनहीन रवैया देखा तो पत्रकार विनोद कापड़ी से संपर्क किया। उन्होंने हम लोगों की बहुत मदद की है। कापड़ी जी ने नोएडा में फेलिक्स अस्पताल के मालिक डॉ.डीके गुप्ता को फोन किया। डॉक्टर गुप्ता ने तत्काल अजय को उनके अस्पताल में लाने की हामी भर दी। हम लोग अजय को उस देर रात फेलिक्स अस्पताल लेकर पहुंचे। अब उनका 3 अक्टूबर को ऑपरेशन किया गया है। दुख की बात है कि अजय को पांव गंवाना पड़ा है लेकिन खुशी इस बात की है कि उनकी जान बच गई है।"

कृत्रिम पांव लगवाएंगे शहर के समाजसेवी संगठन
डॉक्टरों के मुताबिक अजय को पूरी तरह ठीक होने में करीब 2 महीनों का वक्त लगेगा। अभी उन्हें करीब दो सप्ताह अस्पताल में रहना पड़ सकता है। कावेरी राणा और शहर के दूसरे सोशल वर्कर अजय को कृत्रिम पांव लगवाने की योजना बना रहे हैं। अभी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अजय के पास रहने के लिए घर, देखभाल करने वाला और कोई काम नहीं है। ऐसे दो महीने अजय की देखभाल बड़ी समस्या है। वह इस दौरान कहां रहेंगे, यह समझ नहीं आ रहा है। दो महीने बाद अजय को आर्टिफिशियल पांव लगवाया जाएगा। जिस पर करीब दो लाख रुपये खर्च आने की उम्मीद है।

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