फ्लैट बायर्स पर पड़ेगा और बोझ, घर के लिए अभी और कीमत चुकानी पड़ेगी

ग्रेटर नोएडा से बड़ी खबर : फ्लैट बायर्स पर पड़ेगा और बोझ, घर के लिए अभी और कीमत चुकानी पड़ेगी

फ्लैट बायर्स पर पड़ेगा और बोझ, घर के लिए अभी और कीमत चुकानी पड़ेगी

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो

फ्लैट बायर्स पर पड़ेगा और बोझ, घर के लिए अभी और कीमत चुकानी पड़ेगी Greater Noida News : अगर आप ग्रेटर नोएडा की किसी हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं तो आने वाले कुछ दिनों में आपको अपने फ्लैट के लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ सकती है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (Greater Noida Authority) की बोर्ड बैठक हुई। जिसमें कई बड़े फैसले लिए गए हैं। किसानों को दिए जाने वाले 64.7% अतिरिक्त मुआवजे को लेकर प्रस्ताव रखा गया। जिस पर बोर्ड ने चर्चा की। फैसला लिया गया है कि आवंटियों से यह अतिरिक्त मुआवजा राशि वसूल की जाएगी। इससे शहर के बिल्डरों और औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सीधी सी बात है, प्राधिकरण जो पैसा बिल्डरों से वसूल करेगा, बिल्डर उसका बोझ फ्लैट खरीदारों पर डालेंगे।

बिल्डरों और इंडस्ट्रीज एलॉटमेंट भी दायरे में आए
अब तक शहर के व्यक्तिगत आवासीय, संस्थागत और वाणिज्यिक भूखंडों के आवंटियों से 64.7% अतिरिक्त मुआवजा वसूल किया गया है। अब ग्रुप हाउसिंग के लिए बिल्डरों को दिए गए भूखण्डों और इंडस्ट्रीज एलॉटमेंट को भी इस दायरे में लाया गया है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया है। बोर्ड ने इस बात पर सहमति जताई कि बिल्डरों से किसानों को दिया जाने वाला अतिरिक्त मुआवजा वसूल किया जाएगा। इसके अलावा बैठक में कई और प्रस्ताव पर मुहर लगी है।

छुट्टी के दिन हुई 125वीं बोर्ड मीटिंग
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 125वीं बोर्ड बैठक शनिवार को हुई। आपको बता दें अथॉरिटी में 5 दिन कामकाज होता। सप्ताहांत के दो दिन शनिवार और रविवार की अवकाश रहता है। सुबह 11 बजे प्राधिकरण के बोर्ड रूम में बैठक शुरू हुई। जिसकी अध्यक्षता चेयरमैन संजीव मित्तल ने की। यह बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों को दिए जाने वाले अतिरिक्त मुआवजे की वसूली बिल्डरों और औद्योगिक भूखंड के आवंटियों से करने का फैसला लिया था। यह फैसला 2019 में लागू किया गया था। इसके विरोध में बिल्डर अदालत चले गए थे।

अदालत ने यह फैसला अथॉरिटी पर छोड़ा था
बिल्डरों की याचिका पर अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि प्राधिकरण अपने स्तर पर निर्णय ले। इस मुद्दे का निस्तारण करे। इसका निस्तारण करने के लिए शनिवार को बोर्ड के सामने प्रस्ताव रखा गया। बैठक में इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। बैठक में प्रस्ताव पास हुआ कि बिल्डरों से भी बाकी आवंटियों की तरह 1,769 रुपये प्रति वर्ग मीटर अतिरिक्त मुआवजा वसूल किया जाएगा। इसी तरह औद्योगिक भूखंड के आवंटियों से 478 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से पैसा लिया जाएगा। अब प्राधिकरण इस फैसले से अदालत को अवगत कराएगा ताकि इस पर अमल किया जा सके। बैठक में प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण, यमुना, नोएडा प्राधिकरण के नामित अधिकारी, महाप्रबंधक एके अरोड़ा समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।

आवंटियों से कैसे की जाएगी वसूली
शहर के सभी आवासीय और औद्योगिक सेक्टरों का विकास यहां के रहने वाले किसानों से भूमि अधिग्रहण के जरिए किया गया है। जब किसानों से जमीन ली गई थी, उस वक्त उन्हें जिस दर से मुआवजा दिया गया था, अब उस पर 64.7% और मुआवजा दिया जाएगा। बिल्डरों से 1,769 रुपये प्रति वर्ग मीटर और औद्योगिक भूखंड के आवंटियों से 478 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से यह वसूली होगी। कई हाउसिंग सोसाइटीज से तो करोड़ों रुपए की वसूली फिर की जाएगी। ऐसे में फ्लैट खरीदारों को लाखों रुपए भुगतान एक बार फिर करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी प्राधिकरण ने यह जानकारी नहीं दी है कि किन-किन बिल्डरों से वसूली होगी।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के किसानों से हुआ था फैसला
वर्ष 2008-09 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में औद्योगिकरण करने के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहण किया गया था। बाद में यहां भू-उपयोग परिवर्तन किया गया। इंडस्ट्रियल लैंड को ग्रुप हाउसिंग में तब्दील कर दिया गया। इसका विरोध करते हुए पतवाड़ी समेत आसपास के कई गांवों से सैकड़ों किसान कोर्ट चले गए। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन औद्योगिकरण के नाम पर कम कीमत में अधिग्रहित की गई है। अब जब यहां बिल्डरों को जमीन ऊंचे दामों पर बेची जा रही है तो उन्हें भी सही कीमत मिलनी चाहिए। किसानों के पक्ष को कोर्ट ने सही माना और 64.7% अतिरिक्त मुआवजा देने का फैसला सुनाया था। वर्ष 2011 से यह अतिरिक्त वसूली की जा रही है। बड़ी बात यह है कि धीरे-धीरे लगभग पूरा ग्रेटर नोएडा शहर इस फैसले के दायरे में आ चुका है।

अन्य खबरे

Copyright © 2021 - 2022 Tricity. All Rights Reserved.