ग्रेटर नोएडा में एक डॉक्टर ने सीमित संसाधनों के बावजूद बचाई 70 लोगों की जान

कोरोना काल के कर्मयोद्धा: ग्रेटर नोएडा में एक डॉक्टर ने सीमित संसाधनों के बावजूद बचाई 70 लोगों की जान

ग्रेटर नोएडा में एक डॉक्टर ने सीमित संसाधनों के बावजूद बचाई 70 लोगों की जान

Tricity Today | Dr Viresh Budholia

ग्रेटर नोएडा में एक डॉक्टर ने सीमित संसाधनों के बावजूद बचाई 70 लोगों की जान
  • डॉ वीरेश बुधौलिया अपने समर्पण से सीमित संसाधनों के साथ अब तक 70 मरीजों की जान बचा चुके हैं
  • दूरदर्शिता दिखाते हुए बिम्टेक स्टॉफ के लिए कैंपस में कोविड-केयर सेंटर बनाने का फैसला लिया
  • महज तीन-चार दिनों में इसकी सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई
  • महामारी के विभिन्न स्टेज को देखते हुए 16-16 कमरों के तीन अलग-अलग सेक्शन बनाए गए
  • यहां एक L-2 फैसिलिटी से युक्त सेंटर भी बनाया गया है
  • इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और तीन आईसीयू बेड बनाए गए हैं
कोरोना वायरस महामारी की विभीषिका झेल रहे गौतमबुद्ध नगर में हालात अब धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। लेकिन ग्रेटर नोएडा में स्थित बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (BIMTECH) के डायरेक्टर डॉ हरिवंश चतुर्वेदी की दूरदर्शिता, कुशल नेतृत्व और हालात को नियंत्रित करने की क्षमता ने इस संस्थान में महामारी को फैलने से रोका। डॉ वीरेश बुधौलिया ने उसका बखूबी साथ दिया और अपने समर्पण से सीमित संसाधनों के साथ अब तक 70 मरीजों की जान बचा चुके हैं। पिछले महीने अप्रैल के पहले हफ्ते में बिम्टेक की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें यह तय किया गया कि संस्थान से जुड़े सभी फैकल्टी, कर्मचारी, स्टॉफ और उनके परिजनों को कैंपस में ही प्राथमिक इलाज मुहैया कराया जाएगा। अगले 3 - 4 दिनों में पूरा प्रबंध कर लिया गया। 15 अप्रैल तक बिम्टेक कैंपस में कोविड महामारी से निपटने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गईं। इसमें कैलाश हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के सीएमओ डॉ वीरेश बुधौलिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पूरे अभियान में स्वास्थ्य से जुड़े सेवाओं की निगरानी डॉक्टर वीरेश बुधौलिया कर रहे हैं। जबकि कैंपस प्रबंधक सुनील टंडन मैनेजमेंट का जिम्मा संभाल रहे हैं।

मुखिया होने के नाते जिम्मेदारी ज्यादा है: डायरेक्टर डॉ हरिवंश चतुर्वेदी 
बिम्टेक के डायरेक्टर डॉ हरिवंश चतुर्वेदी ने ट्राइसिटी टुडे से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि, “मुखिया होने के नाते बिम्टेक परिवार के सभी सदस्यों और उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित कराना मेरी जिम्मेदारी है। कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान भी हमने एकजुटता दिखाई। संस्थान के सभी स्टॉफ का अच्छी तरह ख्याल रखा। लेकिन दूसरी लहर बेहद घातक है। हमने समय रहते एक अच्छा फैसला लिया और कैंपस में ही कोविड केयर सेंटर स्थापित किया। इसका सबसे बड़ा लाभ यह मिला की स्टॉफ को इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़े। लक्षण होने पर वे सेंटर में आइसोलेट हो गए। वहां उनका इलाज किया गया और पूरा ख्याल रखा गया। जब तक वे पूरी तरह ठीक नहीं हो गए, उन्हें कैंपस में ही उपचार दिया गया। साथ ही परिजनों के लिए भी व्यवस्था रखी गई है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। हमारा मकसद हर स्टॉफ और परिजनों को महामारी से बचाना है।”

अब तक 70 मरीज ठीक हो चुके हैं
डॉ वीरेश बुधौलिया फिलहाल ग्रेटर नोएडा स्थित कैलाश हॉस्पिटल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन अपने व्यस्ततम समय में से वह कुछ हिस्सा बिम्टेक में बने कोविड सेंटर में भी देते हैं। उनके समर्पण का ही नतीजा है कि कोरोना महामारी के जानलेवा दूसरे लहर में अब तक यहां से करीब 70 संक्रमित मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है। ट्राइसिटी टुडे से बातचीत में उन्होंने बताया कि संस्थान के डायरेक्टर डॉ हरिवंश चतुर्वेदी और चीफ प्रॉक्टर ऋषि तिवारी ने इस प्लान के बारे में उनसे चर्चा की थी। उन्होंने बिना देर किए इसे अपनी सहमति दी। कैंपस में संचालित कोविड केयर में हेल्थ डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी पूरी तरह डॉक्टर वीरेश बुधौलिया के कंधों पर ही है। उन्होंने बताया कि अप्रैल के पहले हफ्ते में जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर उफान पर थी, तब हमने दूरदर्शिता दिखाते हुए बिम्टेक स्टॉफ के लिए कैंपस में कोविड-केयर सेंटर बनाने का फैसला लिया। महज तीन-चार दिनों में इसकी सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। 



तीन सेक्शन बनाकर इलाज किया जाता है
महामारी के विभिन्न स्टेज को देखते हुए 16-16 कमरों के तीन अलग-अलग सेक्शन बनाए गए। पहले सेक्शन को सिम्पटमैटिक, दूसरे को पॉजिटिव और तीसरो को पोस्ट कोविड नाम दिया गया है। पहले सेक्शन में सिर्फ उन्हीं लोगों को रखा जाता था, जिनमें कोरोना के लक्षण होते हैं। इस आइसोलेशन में 3 दिन रखने के बाद उनका कोविड टेस्ट कराया जाता है। अगर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उन्हें दूसरे पॉजिटिव सेक्शन में भेजा जाता है। जहां उनका कोरोना का इलाज किया जाता है। अगर लक्षण वाले सेंटर में इलाजरत मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो भी उसे अगले 10 दिनों तक सेंटर में ही रखा जाता है। उसकी दोबारा कोरोना जांच कराने के बाद ही उसे सेंटर से बाहर भेजा जाता है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों का 15 दिन उपचार करने के बाद उन्हें पोस्ट कोविड सेक्शन में भेज दिया जाता है। यहां एक हफ्ते तक उनकी देखभाल की जाती है। इस दौरान अगर उन्हें किसी तरह की समस्या होती है, तो उनका इलाज कराया जाता है।

L-2 फैसिलिटी भी उपलब्ध है 
उन्होंने बताया कि यहां एक L-2 फैसिलिटी से युक्त सेंटर भी बनाया गया है। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और तीन आईसीयू बेड बनाए गए हैं। पहले सभी मरीजों का इलाज यहीं किया जाता है। अगर किसी संक्रमित की हालत ज्यादा खराब होती है तो उसे कैलाश अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इसके लिए कर्मचारियों और स्टाफ को कोई शुल्क नहीं देना होगा। पूरा खर्च बिम्टेक प्रबंधन वहन करेगा। बुधौलिया ने कहा कि वह अपने कीमती समय में से रोजाना कुछ वक्त यहां देते हैं। इससे एक बड़ा लाभ यह होता है कि संस्थान के संभावित मरीजों को भटकने से बचाया जा सका है। लक्षणों और टेस्ट रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें ठीक वक्त पर सही इलाज मिल गया है। साथ ही उनके परिजनों को भी राहत मिलती है।

सही वक्त पर लिया फैसला
बिम्टेक के चीफ प्रॉक्टर ऋषि तिवारी ने इस बारे में ट्राईसिटी टुडे से बातचीत की। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर डॉ हरिवंश चतुर्वेदी ने अप्रैल के पहले हफ्ते में ही महत्वपूर्ण बैठक की थी। जिसमें उन्होंने दूसरी लहर का जिक्र करते हुए इससे बचाव के उपायों को तलाशने के बारे में जोर दिया था। तब यह तय हुआ था कि कर्मचारियों के लिए कैंपस में ही कोविड केयर सेंटर बनाया जाए। उस पर अमल किया गया और यथाशीघ्र सारी सुविधाएं जुटाई गई। 16-16 कमरों के तीन सेक्टर बनाए गए। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 70 संक्रमित स्टॉफ और परिजनों का सफल इलाज हो चुका है। एक कर्मचारी की रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है, लेकिन उसे पोस्ट कोविड सेक्शन में एहतियातन रखा गया है। जबकि चार गंभीर कर्मचारियों को कैलाश हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है। 

करीब 25 परिवारों को मिली है राहत
ऋषि तिवारी ने बताया कि इस सेंटर पर 2 नर्स और 2 डॉक्टर हर वक्त अपनी सेवाएं देते हैं। उन्होंने कहा कि बिम्टेक में कार्यरत करीब 25 परिवार यहां रहते हैं। इनमें कुल सदस्यों की संख्या करीब 125 है। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कैंपस में यह सेंटर बनाया गया। यह बेहद कारगर साबित हुआ। क्योंकि पिछले 1 महीनें में गौतमबुद्ध नगर में हालात बदतर रहे हैं। लोगों को अस्पताल में ऑक्सीजन और दवाइयां नहीं मिली हैं। ऐसे में बिम्टेक प्रबंधन की दूरदर्शिता की वजह से यहां के कर्मचारियों को ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। कुछ का सपरिवार यहां इलाज किया गया। इसके अलावा जो स्टॉफ अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, उनका पैसा भी उनके मेडिक्लेम पॉलिसी से दिया जाएगा। 18 मार्च को सबसे पहले कोरोना के लक्षण वाले 2 मरीज कैंपस के सेंटर में पहुंचे थे। उसके बाद संक्रमितों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। 

50 कोविड मरीजों के हिसाब से दवाइयां और सुविधाएं तैयार रखी गईं
चीफ प्रॉक्टर ने कहा कि सतर्कता बरतते हुए 50 कोविड मरीजों के हिसाब से दवाइयों और मेडिकल उपकरण की व्यवस्था पहले ही कर दी गई। तीन आईसीयू और ऑक्सीजन बेड तैयार किए गए हैं। इनके लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इंतजाम किया गया। ताकि बड़े अस्पतालों में बेड न मिलने की हालत में नाजुक स्थिति वाले स्टॉफ को यहां आईसीयू में रखा जा सके और उनका इलाज किया जा सके। उन्होंने बताया कि सेंटर में इलाज करा रहे स्टॉफ की हर जरूरत का ख्याल रखा गया है। दो सफाई कर्मचारियों को पूरी हिदायत दी गई है। वह पीपीई किट पहन कर रोजाना सेंटर में साफ-सफाई करते हैं। 

पहली लहर में भी उठाई थी जिम्मेदारी
दो फुल टाइम नर्स दिन में 3 - 4 बार हर मरीज के पास विजिट करती हैं। उनकी जरूरत के मुताबिक दवाइयां और दूसरे सामान उपलब्ध कराती हैं। संख्या इस लिए कम रखी गई है, ताकि स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी पॉजिटिव होने से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी की पहली लहर में भी बिम्टेक ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाई थी। तब 500 लोगों को रोजाना खाना दिया गया था। 30 परिवारों को राशन वितरित किया जाता था। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण और जेवर क्षेत्र के गांवों में महिलाओं और बच्चियों को रोजगार दिया गया था। उनसे मास्क बनवाया जाता था। साथ ही दूसरे कौशल कार्यों में उनको शामिल रखा गया। यह अभियान 25 मार्च से जून 29 तक चला था। कुछ अभियान अब भी चल रहे हैं।

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