45 सालों में मिले 11 विधायक, भाजपा और बसपा का 10-10 साल रहा कब्जा, जानिए क्या है इस सीट का इतिहास

जेवर विधानसभा चुनाव 2022 : 45 सालों में मिले 11 विधायक, भाजपा और बसपा का 10-10 साल रहा कब्जा, जानिए क्या है इस सीट का इतिहास

45 सालों में मिले 11 विधायक, भाजपा और बसपा का 10-10 साल रहा कब्जा, जानिए क्या है इस सीट का इतिहास

Tricity Today | जेवर विधानसभा चुनाव 2022

45 सालों में मिले 11 विधायक, भाजपा और बसपा का 10-10 साल रहा कब्जा, जानिए क्या है इस सीट का इतिहास Jewar Assembly Election 2022 : गौतमबुद्ध नगर की तीनों विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को चुनाव होना है। नोएडा और दादरी के बाद अब जेवर विधानसभा की बात करते हैं। जेवर विधानसभा में इस बार 3,46,425 मतदाता अपने नए विधायक का चुनाव करेंगे। जिसमें 1,88,264 पुरुष वोटर, 1,58,144 महिलाएं और 17 थर्ड जेंडर शामिल है। इस समय जेवर विधानसभा में 5 राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में खड़े हैं। 

5 उम्मीदवार मैदान में 
जेवर विधानसभा के लिए कांग्रेस ने गुरुवार की सुबह घोषणा कर दी है। कांग्रेस से पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज चौधरी चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी से धीरेंद्र सिंह, बहुजन समाज पार्टी से नरेंद्र डाढ़ा, आम आदमी पार्टी से पूनम सिंह, सपा-रालोद से अवतार सिंह भड़ाना चुनाव लड़ेंगे। गौतमबुद्ध नगर की एकमात्र जेवर विधानसभा सीट है, जहां पर उम्मीदवारों का नाम फोनल हो गया है। 

जेवर विधानसभा का इतिहास
जेवर विधानसभा 1977 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले जेवर विधानसभा का इलाका दादरी और सिकंदराबाद क्षेत्र में था। वर्ष 1977 में जेवर विधानसभा में पहला चुनाव हुआ, जिसमें जनता पार्टी के अदल सिंह जेवर के पहले विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी बनारसी दास को 10,291 वोटों से हराया था।

अदल सिंह ने बनाया रिकॉर्ड
जेवर विधानसभा में दूसरा चुनाव 1980 में हुआ। 1980 में हरि सिंह ने अदल सिंह को 1,627 वोटों से मात दी थी। अदल सिंह ने 1985 में फिर चुनाव लड़ा और इस बार साल 1985 में अदल सिंह कांग्रेस प्रत्याशी रतन स्वरूप से 3,203 वोटों से हारे थे। लगातार दो बार जेवर विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद भी अदल सिंह वर्ष 1989 में फिर चुनाव लड़ा और रतन स्वरूप को 39,572 वोटों से हराया था। जेवर विधानसभा के इतिहास में यह अभी तक की सबसे बड़ी जीत है।

1991 में भाजपा ने पहली बार जीत हासिल की
वर्ष 1991 में जेवर विधानसभा में फिर चुनाव हुआ और इस बार पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जेवर विधानसभा में जीत हासिल की। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार होराम ने 12,805 वोटों से कांग्रेस के प्रत्याशी को हराया था। उसके बाद लगातार तीन बार भारतीय जनता पार्टी जेवर विधानसभा में जीत हासिल की। वर्ष 1993 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लक्ष्मीचंद 1996 में होराम दोबारा से विधायक चुने गए। 

2002 में बसपा का कब्जा
लगातार 5 सालों तक जेवर विधानसभा में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा, लेकिन 2002 में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र कुमार ने चुनाव लड़ा और उन्होंने केवल 301 वोटों से कांग्रेस के बंशी सिंह को हराया। वर्ष 2007 में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार होराम सिंह जेवर के विधायक बने। उसके बाद वर्ष 2012 में बहुजन समाज पार्टी से वेदराम भाटी ने चुनाव लड़ा और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह को 9,500 वोटों से हराया था। 

वेदराम भाटी को धीरेन्द्र सिंह ने हराया
2017 में धीरेंद्र सिंह कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के वेदराम भाटी को 22,173 वोटों से हराया। वर्तमान में जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह हैं। हालांकि, वेदराम भाटी हरने के बाद भाजपा में शामिल हो गए है।

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