ग्रेटर नोएडा : शारदा विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय कृषि और खाद्य विज्ञान सम्मेलन का आयोजन

शारदा विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय कृषि और खाद्य विज्ञान सम्मेलन का आयोजन

Google Image | शारदा विश्वविद्यालय

शारदा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की ओर से पर्यावरण और जैव सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि और खाद्य विज्ञान पर पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इसके उद्घाटन समारोह में दुनिया भर से 1000 वैज्ञानिक ऑनलाइन शामिल हुए। 

इस मौके पर भविष्य में खाद्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई तकनीकी और अन्य विंदुओं पर गहन चर्चा की गई। इसके अलावा ग्लोबलाइजेशन के दौर में किसान खुद को अपडेट रखें, इस पर एक कार्ययोजना बनाई गई। इस दौरान बताया गया कि कृषि और खाद्य के फील्ड में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की भूमिका भी सामने आ रही है और लोग इसका उपयोग कर अपने को समर्थ बना रहे हैं। स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के डीन प्रो. एच एस गौड ने बताया कि कोविड महामारी के बीच पर्यावरण और जैव सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने से संबंधित विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन सेमिनार का आयोजन किया गया। 

इसमें मुख्य अतिथि के रूप में एएसआरबी के पूर्व अध्यक्ष पद्म भूषण, राम बदन सिंह, प्रो.एचएस गुप्ता पूर्व डीजी बीआईएसए और आईसीएआर, आईएआरआई के निदेशक, किसान आयोग के डॉ एके श्रीवास्तव, एकेटीयू के पूर्व कुलपति प्रो. आरके खांडल, डॉ ब्रह्मा सिंह, डॉ वीपी सिंह, शारदा के कुलपति प्रो. सिबाराम खारा, कुलपति और सलाहकार प्रो. वीपीएस अरोड़ा आदि ने अपने विचार रखे। 

कार्यक्रम को सफल बनाने में मर्डोक विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान और धानुका एग्रीटेकलिमिटेड ने सहयोग किया। दुनिया भर के 25 विदेशी देशों के लगभग 220 प्रसिद्ध विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने उत्पादन, संरक्षण, प्रसंस्करण, पर्यावरण और जैव विविधता पर तकनीकी सत्रों में अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए। 

कार्यक्रम के आयोजक प्रो एचएस गौर और प्रो सलीम सिद्दीकी और मर्डोक विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया के प्रो शशि भूषण शर्मा और स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज शामिल रहे। सेमिनार में शारदा विवि के कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने कहा कि बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण खेती पर दबाव है। अधिक उत्पादन की चुनौतियां है। सीमित संसाधनों के बावजूद हमें जैव विविधता, उच्च उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा आदि का भी ध्यान रखना है। कृषि-विज्ञान के स्नातक स्तर के कोर्स में भारी बदलाव किए गये हैं और इन्हें अब व्यवहारिक अनुभव के साथ व्यवसायिक और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।

सम्मेलन में भविष्य में खाद्य प्रौद्योगिकी और विचार विमर्श, वैश्वीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, नए सैद्धांतिक दृष्टिकोण, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो फार्मेसी जैव-सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आदि विषयों पर गहनता से चर्चा की गई। शोधकर्ताओं ने कुशल और टिकाऊ समाधानों के माध्यम से कोविड 19 जैसी चुनौतियों से निपटने के बारे में नीति निर्माताओं को सुझाव भी दिए। 

इस सम्मेलन ने स्थायी, आर्थिक और पर्यावरण के अनुकूल कृषि, गुणवत्तापूर्ण भोजन और पशुधन और मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए सभी विषयों में नवीनतम वैज्ञानिक विकास की उपलब्धता की खोज की। कार्यक्रम के समापन मौके पर 11 वैज्ञानिकों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कार दिए गए।

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