किसानों के साथ बड़ा खेला खेल रहे भूमाफिया, जिला प्रशासन कर रहा अनदेखी, धड़ल्ले से हो रही हैं छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट : किसानों के साथ बड़ा खेला खेल रहे भूमाफिया, जिला प्रशासन कर रहा अनदेखी, धड़ल्ले से हो रही हैं छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री

किसानों के साथ बड़ा खेला खेल रहे भूमाफिया, जिला प्रशासन कर रहा अनदेखी, धड़ल्ले से हो रही हैं छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री

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किसानों के साथ बड़ा खेला खेल रहे भूमाफिया, जिला प्रशासन कर रहा अनदेखी, धड़ल्ले से हो रही हैं छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री Greater Noida : जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) के लिए दूसरे चरण में जमीन अधिग्रहण से पहले ही भूमाफियाओं की नजर गड़ गई हैं। भूमाफिया इन गांवों में पहुंचकर भोले-भाले किसानों से 100 मीटर, 200 मीटर, 500 मीटर, 1000 मीटर से लेकर 5 बीघा और 10 बीघा जमीन ओने-पौने दामों में खरीद रहे हैं। यह बड़ा खेला इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दूसरे चरण में पडने वाले गांवों में चल रहा है। इसका मकसद मोटा मुआवजा और ऊपर से रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटेलमेंट (आर एंड आर) पॉलिसी का फायदा उठाना है।

1,365 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण करने के लिए शासन ने जारी की अधिसूचना
जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का विस्तार दूसरे चरण में करने के लिए करौली बांगर, दयानतपुर, कुरैब, रन्हेरा, मुढरह और बीरमपुर गांवों में जमीन किसानों से खरीदी जा रही है। दूसरी और भूमाफिया किस्म के लोग भी बड़ा खेल खेल रहे हैं। ये लोग अभी तक करीब 850 बैनामें किसानों से अपने नाम करवा चुके हैं। इस खेल से प्रदेश सरकार को करीब 400 करोड रुपए का चूना लग सकता है। जिला प्रशासन इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दूसरे चरण के लिए 1365 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत करने के लिए शासन ने 13 अप्रैल को अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना जारी करने के बावजूद जिला प्रशासन को इन गावों में जमीन खरीद-फरोख्त पर रोक लागनी चाहिए। लेकिन प्रशासन अनदेखी कर रहा है। 

आर एंड आर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की कमेटी कर रही कार्य 
1,365 हेक्टेयर भूमि में से प्राधिकरण करौली बांगर, दयानतपुर, कुरैब, रन्हेरा, मुढरह और बीरमपुर के किसानों से 1,185 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। बाकी 124 हेक्टेयर जमीन सरकारी है और 57 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण यमुना अथॉरिटी पहले ही कर चुकी है। अधिसूचना के बाद इन गांवों के प्रभावित किसानों के सामाजिक समाघात प्रभाव और इसके निस्तारण के लिए गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की कमेटी अध्ययन कर रही है। 

आखिर जमीन खरीदने का क्या है फायदा
नए भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की जाती है तो उसके बदले में किसानों को मुआवजा मिलता है। जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के अतिरिक्त परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया गया है। जो परिवार नौकरी नहीं चाहता है, उसे एकमुश्त 5 लाख रुपये नगद मिलते हैं। कम से कम 120 वर्गमीटर का आवासीय प्लॉट दिया जाता है। 

अब भूमाफिया का खेल समझिए
भूमाफिया भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले गांवों में 10 मीटर से लेकर हजार मीटर तक जमीन खरीद लेते हैं। इस जमीन के बदले में मुआवजा मिल जाता है। साथ ही एक व्यक्ति को नौकरी या एकमुश्त 5 लाख रुपये मिल जाते हैं। ऊपर से 120 वर्गमीटर का आवासीय भूखंड मिलता है। जिसकी कीमत कम से कम 25 लाख रुपये रुपए होती है। इस तरह कुछ हजार रुपए खर्च करके छोटी सी जमीन का भूखंड खरीदने वाले को कम से कम 30 लाख रुपये का फायदा हो जाता है। आपको बता दें कि इसी तरह का खेल भूमाफिया ग्रेटर नोएडा में यह खेल चुके हैं। 

स्टांप के नाम पर मिलेंगे चंद रुपए, सरकार को लगेगा अरबों का चूना
इसी तरह का लाभ लेने के लिए अभी तक 850 लोग कृषि जमीन के नाम पर बैनामा करा चुके हैं। जमीन का बैनामा खेती बताकर किया जा रहा है। लिहाजा, स्टांप के नाम पर सरकार को कुछ हजार रुपए मिल रहे हैं। जमीन के इन 850 छोटे-छोटे भूखंडों का अधिग्रहण किया जाएगा तो बदले में दी जाने वाली सुविधाओं के लिए राज्य सरकार को कम से कम 400 करोड रुपए खर्च करने पड़ जाएंगे।

जमीन की खरीद-बेच पर लग जानी चाहिए रोक 
बताया जाता है कि बाहरी लोग सबसे अधिक जमीन इन गांवों में खरीद रहे हैं। अधिसूचित एरिया के गांवों में जमीन खरीदने के लिए बाहर से लोग बड़ी-बड़ी गाड़ियों में आते हैं और भू-माफिया और दलाल इन लोगों को झांसे में लेकर किसानों से सीधे जमीन दिला रहे हैं। यदि इसी तरह से खेला खेला जाता रहा तो सेकंड फेस का एयरपोर्ट का विस्तार होने में जहां राजस्व का नुकसान होगा वही योजना परवान चढ़ने में भी भारी दिक्कतें आ सकती हैं। सेकंड फेस के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में कार्गो, एमआरओ आदि के लिए जमीन का अधिग्रहण होना है और अधिसूचना 13 अप्रैल को शासन द्वारा की जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि अधिसूचना के बाद जमीन की खरीद बेच पर रोक लग जानी चाहिए, लेकिन अभी तक इस जमीन की खरीद बेच पर रोक नहीं लगी है, धड़ल्ले से जेवर सब रजिस्टार के यहां पर रजिस्ट्री हो रही हैं।

ऐसे लोगों को आर एंड आर का लाभ नहीं मिलेगा
इस मुद्दे पर गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एलवाई से बात हुई। उन्होंने कहा, "यह प्रकरण संज्ञान में आया है। आदेश जारी किया जा चुका है। जो लोग अधिसूचना जारी होने के बाद छोटी-छोटी जमीन के टुकड़े खरीद कर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के भूमि अधिग्रहण में लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें ऐसा कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। ऐसे बैनामा धारकों को केवल भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा मिलेगा। इन्हें आवासीय भूखंड नहीं दिए जाएंगे। रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटेलमेंट के तहत इन लोगों को रोजगार या उसके बदले मिलने वाली प्रतिपूर्ति का लाभ भी नहीं मिलेगा। साथ ही जेवर के रजिस्ट्रार को आदेश दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के दूसरे चरण में प्रभावित होने वाले गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त को तत्काल रोक दिया जाए।"

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