मायावती विशेष : अपने 65वें जन्मदिन पर लिया बड़ा फैसला, कर रही थी यूपीएससी की तैयारी लेकिन बन गई मुख्यमंत्री, जानिए कैसा शुरू हुआ राजनीतिक सफर

अपने 65वें जन्मदिन पर लिया बड़ा फैसला, कर रही थी यूपीएससी की तैयारी लेकिन बन गई मुख्यमंत्री, जानिए कैसा शुरू हुआ राजनीतिक सफर

Google Image | मायावती

मायावती का आज 65वां जन्मदिन है। मायावती मूलरूप से ग्रेटर नोएडा के बादलपुर गांव की रहने वाली हैं। मायावती उत्तर प्रदेश की दिग्गज मुख्यमंत्री में से शामिल है। मायावती प्रदेश की 4 बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इस समय वह बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर हैं। मायावती ने हमेशा देश के गरीब, पिछड़ी जाति और अनुसूचित जातियों समेत अल्पसंख्यक लोगों के जीवन में सुधार किए हैं। उन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया है। 



मायावती सबसे पहले 1989 में बिजनौर लोकसभा के सांसद निर्वाचित हुई थी। उसके बाद 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुई। मायावती ने 1995 में पहली बार भारतीय दलित महिला के रूप में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर शपथ ली थी। तब से अब तक मायावती उत्तर प्रदेश में 4 बार मुख्यमंत्री पद संभाल चुकी हैं।



मायावती के राजनीतिक कैरियर में उनके पिता का महत्व योगदान रहा है। उनके पिता प्रभु दास डाक विभाग में कार्यरत थे। मायावती शुरू से ही पिछड़े वर्गों के लोगों को समाज में समान नजरिए में देखना चाहती थी। मायावती ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। उसके बाद मेरठ यूनिवर्सिटी से शिक्षा स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। मायावती ने दिल्ली के जेजे कॉलोनी में एक स्कूल में टीचिंग का भी काम किया था। टीचिंग का काम करते हुए मायावती ने यूपीएससी की तैयारी की थी।



सन 2006 में कांशीराम के निधन के बाद मायावती को बहुजन समाज पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया था। उस समय यह मानना था कि अगर किसी महिला को सम्मान दिया जाना है। तो उसके पति का होना आवश्यक है। लेकिन मायावती भारत की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनी है। 



मायावती की जीवनी के लेखक अजय ने लिखा है कि जब मायावती यूपीएससी की तैयारी कर रही थी। तो उस समय मायावती की मुलाकात काशीराम से हुई थी। कांशीराम ने मायावती के हुनर को देखकर कहा था कि तुम एक बड़ी नेता बन सकती हो। कांशीराम ने मायावती से कहा था कि "तुम इतनी बड़ी नेता बन सकती हो कि तुम्हारे आदेश के लिए एक नहीं बल्कि आईएएस अधिकारियों की लाइन लग जाएगी।" उसके बाद ही मायावती ने राजनीतिक दुनिया में कदम रखा था।

 

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