यमुना एक्सप्रेसवे बना मौत का हाईवे, 2016 से अब तक 4 हजार से ज्यादा हादसे हुए, 893 लोगों ने गंवाई जान

खास रिपोर्ट : यमुना एक्सप्रेसवे बना मौत का हाईवे, 2016 से अब तक 4 हजार से ज्यादा हादसे हुए, 893 लोगों ने गंवाई जान

यमुना एक्सप्रेसवे बना मौत का हाईवे, 2016 से अब तक 4 हजार से ज्यादा हादसे हुए, 893 लोगों ने गंवाई जान

Tricity Today | Yamuna Expressway

यमुना एक्सप्रेसवे बना मौत का हाईवे, 2016 से अब तक 4 हजार से ज्यादा हादसे हुए, 893 लोगों ने गंवाई जान Greater Noida/Yamuna Expressway : यमुना एक्सप्रेसवे मौत का एक्सप्रेसवे बन गया है। वर्ष 2016 से अब तक इस एक्सप्रेसवे पर 4243 सड़क हादसे हुए हैं। इन हादसों में 893 लोगों की मौत हुई है। गुरुवार की सुबह भी एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक हादसा हुआ। जिसमें 4 महिलाएं समेत 5 लोगों की मौत हो गई। जिसकी वजह से आम जनता इसको मौत का एक्सप्रेसवे भी कहने लगी है।

 2016 से 12 मई 2022 तक 893 लोगों की मौत
यमुना एक्सप्रेसवे को संभालने वाली जिम्मेदार कंपनी ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2016 से 12 मई 2022 तक 4243 सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें 893 लोगों की मौत हुई है। एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा हादसे वर्ष 2016 में हुए थे। वर्ष 2016 में इस एक्सप्रेसवे पर 1219 रोड एक्सीडेंट हुए। जिसमें 133 लोगों की मौत हुई और 1525 लोग घायल हुए।

कौन से वर्ष में कितने हादसे और मौत
वर्ष 2017 में यमुना एक्सप्रेसवे पर 763 हादसे हुए थे। जिसमें 146 लोगों की मौत और 1426 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2018 में 659 हादसों में 111 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2019 में 560 सड़क हादसों में 195 लोगों की मौत, वर्ष 2020 में 509 सड़क हादसे में 128 लोगों की मौत, वर्ष 2021 में 420 सड़क हादसों में 135 लोगों की मौत हुई थी। इस साल 2022 में जनवरी से लेकर 12 मई तक कुल 95 हादसे हुए हैं। जिनमें 45 लोगों की मौत और 158 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी संबंधित कंपनी ने साझा की है।

हादसे के ये हैं मुख्य कारण
रिपोर्ट के मुताबिक पता चला है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा हादसे ओवरी स्पीड, साइड में वाहन खड़े हुए और नींद की झपकी लगने से हुए हैं। वहीं, 30 प्रतिशत हादसे टायर फटने से हुए हैं। इसके अलावा हर 10वां हादसा नींद की झपकी लगने से हुए। जिम्मेदार कंपनी और यमुना विकास प्राधिकरण हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन मौत के बढ़ते ग्राफ में कोई भी कमी नहीं आ रही है। जनवरी से 12 मई 2022 तक यमुना एक्सप्रेसवे पर 45 लोगों की मौत हुई हैं। 

निर्धारित स्पीड से तेज चलते है वाहन
इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार के कारण भी हादसे होते हैं। वैसे तो एक्सप्रेसवे पर हल्के वाहनों की स्पीड लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की स्पीड लिमिट 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, लेकिन उसके बावजूद भी निर्धारित समय सीमा से गाड़ियां तेरी चलती हैं। यह भी हादसे का मुख्य कारण माना जाता है। आपको बता दें कि सर्दी के मौसम में स्पीड लिमिट कम कर दी गई थी और हमेशा करी जाती है। उसके बावजूद भी लोग तेज गति में वाहन चलाते हैं।

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