ग्रेटर नोएडा के किसानों का सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा, 32 साल बाद मिली कामयाबी

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ग्रेटर नोएडा के किसानों का सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा, 32 साल बाद मिली कामयाबी

Tricity Today | सुप्रीम कोर्ट

ग्रेटर नोएडा के किसानों का सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा, 32 साल बाद मिली कामयाबी Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा के किसानों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने बड़ी राहत दी है। देश की शीर्ष अदालत ने  ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर गांव के किसानों के हक में फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने वर्ष 1989 में अधिगृहीत की गई जमीन का मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया है। यह मुआवजे की दर 39 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये प्रति वर्ग गज कर दी है। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि आठ हफ्ते के भीतर याचिका दाखिल करने वाले भूस्वामियों को बढ़ा मुआवजा दिया जाए। यह फैसला ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ आया है।

हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे किसान
जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग लेकर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। आपको बता दें, उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा के कासना, ऐच्छर, गूजरपुर और हल्दौना गांवों की करीब 534 एकड़ जमीन अधिगृहीत की थी। अधिग्रहण के समय यह जमीन बुलंदशहर जिले में आती थी। अब यह जनपद गौतमबुद्ध नगर है और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के दायरे में आ गई है। याचिका में अदालत को बताया गया कि कासना गांव के भूस्वामियों को 65 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से मुआवजा मिला था और ऐच्छर गांव के भूस्वामियों को 39 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से दिया गया। कासना गांव के बराबर मुआवजा की मांग वाली ऐच्छर गांव के भूस्वामियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की थी। इस पर मुआवजा बढ़ाने की बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 सितंबर, 2019 को उसे वापस रिफरेंस कोर्ट भेज दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ऐच्छर के कुछ भूस्वामियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

शीर्ष अदालत ने जमीन का मुआवजा बढ़ाया
न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने भूस्वामियों के वकील ऋषि मल्होत्रा की दलीलें सुनने के 16 जुलाई को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मुआवजा बढ़ा कर 65 रुपये प्रति वर्ग गज करने का फैसला सुनाया है। एडवोकेट मल्होत्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ दूसरे गांवों में जमीन अधिगृहीत की गई थी। उन गांवों में समान स्थिति वाले भूस्वामियों को 65 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा मिला था। हमने सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल उठाया कि इस मामले में प्रशासन और हाईकोर्ट को मुआवजा बढ़ा कर 65 रुपये प्रति वर्गगज करने का आदेश देना चाहिए था।

कोर्ट ने अथॉरिटी की दलीलें खारिज कीं
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के वकील रविंद्र कुमार ने किसानों की याचिका का विरोध किया। अदालत में कहा कि मुआवजा बढ़ाने के जिस मामले का हवाला दिया जा रहा है, वह दूसरे गांव का है। शीर्ष अदालत ने उनकी दलीलें खारिज करते हुए कहा कि जमीन का अधिग्रहण एक साथ हुआ था। जब सुप्रीम कोर्ट इसी तरह के अधिग्रहण के दो मामलों में 5 दिसंबर, 2016 और 17 जुलाई, 2017 को मुआवजा बढ़ा कर 65 रुपये प्रति वर्ग गज करने का आदेश दे चुका है तो ऐसी स्थिति में हाई कोर्ट को यह मामला वापस रिफरेंस कोर्ट नहीं भेजना चाहिए था। अंतिम आदेश का इंतजार करने का आदेश देना ठीक नहीं था।

हाई कोर्ट में जो पक्षकार नहीं थे, उन्हें भी राहत
सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसे याचिकाकर्ता भी पहुंचे थे जो हाई कोर्ट में पक्षकार नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने रिफरेंस कोर्ट में धारा 28ए के तहत अर्जी दाखिल करने वाले इन लोगों के बारे में आदेश दिया है कि इनकी अर्जियों को इस आदेश को देखते हुए तीन महीने के भीतर निपटाया जाए। रिफरेंस कोर्ट इस मामले में प्राधिकरण की आपत्तियां भी सुनेगा। कुल मिलाकर पूरे ऐच्छर गांव के किसानों को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का लाभ मिल ग

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