ग्रेटर नोएडा शहर की पहचान बन रहीं यह 12 खासियत, कहीं पेड़ों का नाम सड़कों की पहचान तो कहीं चंडीगढ़ का नजारा, पढ़िए खास खबर

आज की बड़ी खबर : ग्रेटर नोएडा शहर की पहचान बन रहीं यह 12 खासियत, कहीं पेड़ों का नाम सड़कों की पहचान तो कहीं चंडीगढ़ का नजारा, पढ़िए खास खबर

ग्रेटर नोएडा शहर की पहचान बन रहीं यह 12 खासियत, कहीं पेड़ों का नाम सड़कों की पहचान तो कहीं चंडीगढ़ का नजारा, पढ़िए खास खबर

Tricity Today | परी चौक

ग्रेटर नोएडा शहर की पहचान बन रहीं यह 12 खासियत, कहीं पेड़ों का नाम सड़कों की पहचान तो कहीं चंडीगढ़ का नजारा, पढ़िए खास खबर Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) की पहचान एनसीआर (NCR) के सबसे हरे-भरे शहर के रूप में होती है। सभी प्रमुख रास्तों के किनारे बने ग्रीन बेल्ट इस शहर की हरियाली और खूबसूरती को और चार चांद लगा रहे हैं। इसे और बेहतर बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कई कदम उठाए हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी नरेंद्र भूषण के निर्देश पर प्राधिकरण ने पार्कों में ओपन जिम, ग्रीन बेल्ट के पौधे के नाम पर सड़कों का नाम, सड़कों के किनारे कच्ची जगह पर घास, ग्रीन बेल्ट की नंबरिंग, कंपोजिट टेंडर जैसे कई कदम बढ़ाए हैं। आने वाले दिनों में यह शहर और भी खूबसूरत और हरा-भरा दिखेगा।

ग्रेटर नोएडा में दिखेगा चंडीगढ़ के फॉल कलर का नजारा
अमेरिका के चेरिऑकी हो या जापान का चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल या फिर चंडीगढ़ का वसंती मौसम के फूलों का नजारा अब ग्रेटर नोएडा में भी दिखेगा। प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसाइटियों के आसपास की ग्रीन बेल्ट को विकसित करने के लिए करीब 8 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सभी सोसाइटियों के आसपास की ग्रीन बेल्ट को इन जगहों की तर्ज पर विकसित करना चाह रहा है। जैसे चंडीगढ़ में पतझड़ के समय अमलतास, गुलमोहर, कचनार और कुरैसिया के फूलों का मनमोहक नजारा दिखता है। उसी तरह ग्रेटर नोएडा की ग्रीन बेल्ट में इन्हीं पौधों को लगाया जाएगा।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में करीब सात किलोमीटर की लंबाई में 4.71 लाख वर्ग मीटर ग्रीन बेल्ट को विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर भी जारी हो गए हैं। चंडीगढ़ की ही तर्ज पर ग्रेटर नोएडा में भी एक ग्रीन बेल्ट में एक जैसे पौधे लगाए जाएंगे। ग्रेटर नोएडा के टेकजोन-4, टेकजोन-7, सेक्टर 16सी, सेक्टर 01, 12 और 16 में  10 मीटर, 20 मीटर, 30 मीटर, 75 मीटर व 100 मीटर ग्रीन बेल्ट को विकसित किया जाएगा। ये पौधे पांच साल में बड़े हो जाएंगे। लोग इन ग्रीन बेल्ट में अमलताश के पीले, कुरैसिया व गुलमोहर के लाल और कचनार के गुलाबी फूलों की खुशबू के साथ ही शुकून के दो पल बिता सकेंगे। इसके अलावा गौड़ सौंदर्यम, इरोज संपूर्णनम, हिमालया प्राइड समेत कई सोसाइटियों के निवासियों ने ग्रीन बेल्ट में पाथवे बनाने की मांग की है , जिससे कि वे सुबह-शाम की सैर कर सकें। इसी टेंडर से इनकी मांगों को भी पूरा करने की योजना है।

सैर के साथ ही फिटनेस भी दे रहे ओपन जिम पार्क
अब ग्रेटर नोएडा के पार्क सिर्फ सुबह-शाम सैर तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि खुली हवा में जिम करके फिटनेस को और दुरुस्त रखने में मददगार बन गए हैं। प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण की पहल पर करीब तीन साल पहले पार्कों में ओपन जिम की शुरुआत हुई। अब तक करीब 20 पार्कों में ओपन जिम बन चुके हैं। आसपास के लोग खुली हवा में जिम का लुत्फ उठा रहे हैं। इन सभी ओपन जिम में अमूमन एयर वॉकर, सिट अप स्टेशन, फिक्स डंब बेल, एयर स्विंग, हॉर्स राइडर स्टेशन, लेग प्रेस, पूल चेयर, एक्सरसाइजिंग बार, चेस्ट प्रेस, एलिटिकल एक्सरसाइजर, डबल क्रॉस वॉकर, ट्विस्टर, ब्रिज लैडर, वेट लिफ्टर आदि उपकरण लगाए जाते हैं। बहुत जल्द ग्रेटर नोएडा वेस्ट के टेकजोन फोर स्थित पार्क में ओपन जिम शुरू होने जा रहा है।

पेड़ों के नाम से हो रही सड़कों की पहचान
ग्रेटर नोएडा के सड़कों की पहचान अब ग्रीन बेल्ट से हो सकेगी। सड़क किनारे जिस तरह के पौधे लगे होंगे, उस सड़क को उस पौधे के नाम से जाना जाएगा। मसलन, डिपो मेट्रो स्टेशन से म्यू की तरफ जाने के लिए बनी रोड के किनारे अमलताश के पौधे लगे हैं। इसलिए इस रोड का नाम अमलताश रोड कर दिया गया है। इसी तरह अमृतपुरम रोटरी से रामपुर रोटरी तक कचनार के पौधे लगाए गए हैं। इस मार्ग का नाम कचनार मार्ग रख दिया गया है। अन्य सड़कों क नाम भी इसी तरह रखे जाएंगे। इससे हरियाली को भी बढ़ावा मिलेगा। शहर की खूबसूरती भी बढ़ेगी और सड़कों की पहचान भी बढ़ेगी। अभी ग्रेटर नोएडा में सड़कों की पहचान उनकी चौड़ाई से होती है। मसलन, 130 मीटर रोड, 105 मीटर रोड, 60 मीटर रोड आदि।  

नंबरिंग से ग्रीन बेल्ट को मिल रही अलग पहचान
ग्रेटर नोएडा नोएडा में 500 से अधिक ग्रीन बेल्ट, पार्क और नर्सरी हैं। सेक्टरों में बने पार्कों की पहचान तो उनके नाम और ब्लॉक से हो जाती है, लेकिन ग्रीन बेल्ट की पहचान नहीं हो पाती। उस ग्रीन बेल्ट की लोकेशन पता नहीं चल पाता, जिससे ग्रीन बेल्ट के रखरखाव में परेशानी होती है। इसे देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने नियोजन व उद्यान विभाग को इन ग्रीन बेल्ट की नंबरिंग करने के निर्देश दिए।अब तक सेक्टर ईकोटेक थ्री, सेक्टर अल्फा वन, ओमीक्रॉन वन, टू व थ्री, सेक्टर-36, 37, नॉलेज पार्क वन, पाई वन व टू शामिल हैं। मसलन, ईकोटेक थ्री के एक ग्रीन बेल्ट को जीबी वन, दूसरी ग्रीन बेल्ट को जी.बी. 2 जैसे नंबरिंग दी जा रही है। इसे सेक्टर के मैप पर भी उकेरा जा रहा है। साथ ही ग्रेटर नोएडा के जीआईएस मैप पर भी अंकित किया जाएगा। 

पार्क के बीच में नहीं, बल्कि किनारे लगेंगे एक जैसे पौधे
अब तक ग्रेटर नोएडा के पार्कों में अलग-अलग प्रजाति के पौधे लग रहे थे। पौधे के घालमेल से उन पार्कों का लुक अच्छा नहीं हो पाता। सीईओ ने इस परिपाटी को बदलते हुए एक पार्क में एक ही तरह के पौधे लगाए जा रहे हैं। एक सेक्टर में अगर चार पार्क हैं तो हर पार्क में एक विशेष प्रजाति के पौधे लगेंगे, जिससे पार्क की पहचान भी आसान हो जाएगी। अब जितने भी पार्क विकसित होंगे, उनमें सिर्फ किनारे-किनारे एक ही प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे, जिससे लोगों को छांव भी मिले और देखने में भी खूबसूरत लगेंगे।

नई नर्सरियों से हर घर में बिखर रही हरियाली
ग्रेटर नोएडा की हरियाली को बढ़ाने के लिए एक और पहल प्राधिकरण ने की है। सड़कों के किनारे नर्सरी की संख्या में तेजी से इजाफा कर रहा है। रोड किनारे बनी नर्सरी में लगे हरे-भरे पौधे व रंग बिरंगे पुष्प दिखते हैं तो बरबस ही लोग इनको खरीद लेते हैं और फिर अपने घर के बालकनी के गमलों में सजाते हैं। इससे घर में भी हरियाली बढ़ रही है। पहले से कई नर्सरी चल रही हैं। अब प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर एक से गौड़ सिटी तक 14 नर्सरी की जगह चिंहित की है। ग्रेटर नोएडा ईस्ट में सूरजपुर कासना रोड पर 10 नर्सरी चिंहित की गई हैं। इन सभी नर्सरी को दिसंबर में ऑक्शन के जरिए आवंटित किया जाएगा। इन नर्सरियों का आवंटन पांच साल के लिए होगा, लेकिन इनके पास दो साल का समय और बढ़ाने का विकल्प भी होगा। इसके लिए तय शुल्क देना पड़ेगा। इतना ही नहीं, ये नर्सरियां प्राधिकरण को हर साल प्रति एक हजार वर्ग मीटर एरिया के लिए 10 पौधे देंगी। ये पौधे अमलतास, गुलमोहर, कचनार, कुरैसिया और बॉटलपॉम के होंगे। इसके अलावा प्रति सीजन फूलों के 250 पौधे भी उपलब्ध कराएंगी। प्राधिकरण ने एक्सपो मार्ट के पास बड़े गोलचक्कर को इसी तरह से विकसित किया है।

पहले उड़ती थी धूल, अब दिखती है हरी-भरी घास
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने हरियाली बढ़ाने और धूल को रोकने के लिए एक और पहल की है।  ग्रेटर नोएडा में ओपन ग्रीन एरिया विकसित किया जा रहा है। अब तक 35 से अधिक जगह इसे विकसित किया जा चुका है। पी थ्री गोलचक्कर के पास जगह खाली पड़ी थी। उसे हरा-भरा बनाकर ग्रेनोवासियों के लिए खोल दिया गया है। पी थ्री से गौतमबुद्ध विवि की तरफ जाने पर पहले गोलचक्कर के पास खाली जगह पर मलबा पड़ा रहता था, जिसे हरी-भरी घास लगाकर विकसित कर दिया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण दफ्तर के आसपास, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर टेकजोन फोर समेत कई रास्तों पर यह नजारा देखा जा सकता है। हाल ही में गुरुग्राम के कई स्कूलों के प्रतिनिधि ग्रेटर नोएडा आए थे। उन्होंने यहां की हरियाली और पार्कों व ग्रीन बेल्ट को देखा। उसकी जमकर सराहना की और पार्कों व ग्रीन बेल्ट के रखरखाव के लिए गुरुग्राम को ग्रेटर नोएडा से सीख लेने की सलाह दी। सड़कों के किनारे कच्ची जगह पर टाइल्स लगाने के बजाय हरी-भरी घास लगाने के निर्देश दिए। इसका नतीजा यह हुआ कि टाइल्स लगाने के खर्च की तुलना में बहुत कम पैसे में घास लग जाती है। देखने में हरा-भरा भी लगता है। इससे वाहनों के गुजरने पर धूल भी नहीं उड़ती।सभी सेक्टरों के अंदरूनी रास्तों पर इसी तरह की घास लगाई जाएगी। 

कंपोजिट टेंडर से सुधर रही पार्कों की दशा
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एक और कदम से पार्कों की दशा सुधारने में मदद मिली है, वह है कंपोजिट टेंडर। अब एक साथ कई सेक्टरों को मिलाकर एक यूनिट बनाकर वहां के सभी पार्कों के लिए एक ही टेंडर निकाला जाता है। उन सभी पार्कों की देखभाल के लिए एक ही ठेकेदार को जिम्मेदारी दी जाती है। उस पार्क में जो भी काम होना है, उसे वही ठेकेदार करेगा। अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग ठेकेदार नहीं होंगे। इसका फायदा यह हुआ कि सेक्टर के किसी भी पार्क की दशा बिगड़ने पर उस ठेकेदार से शीघ्र दुरुस्त करा दिया जाता है, जिससे बहुत कम समय में पार्क दुरुस्त हो जाता है। 

गांवों में बन रहे खेल के मैदान और रेसलिंग कोर्ट
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत 124 गांव आते हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने हर गांव में खेल के मैदान बनाने के लिए जगह चिंहित करने की जिम्मेदारी नियोजन विभाग को दी। नियोजन ने अब तक पांच गांव चिंहित कर लिए हैं। ये गांव पाली, खोदना खुर्द, चुहड़पुर, सैनी व धूममानिक पुर हैं। इनके टेंडर शीघ्र जारी होने जा रहे हैं। इन खेल ग्राउंड में दो बैडमिंटन कोर्ट, वालीबॉल कोर्ट, कबड्डी कोर्ट, रेसलिंग कोर्ट, डेढ़ मीटर चौड़ा रेसिंग ट्रैक, ओपन प्ले ग्राउंड आदि खेल सुविधाएं होंगी। इन खेल ग्राउंड में ओपन जिम की भी सुविधा दी जाएगी। इसी तरह अन्य गांवों में भी खेल ग्राउंड बनाए जाएंगे। इसके अलावा प्राधिकरण ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 37 में  रेसलिंग कोर्ट बनाने जा रहा है। सेक्टर 37 में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए करीब चार हेक्टेयर जगह पहले से चिंहित की है। इसमें 50 गुणा 15 मीटर एरिया में रेसलिंग कोर्ट भी बनाया जाएगा। इसमें दो रिंग भी बनेगी। ये दो रिंग 12 गुणा 12 वर्ग मीटर के बनेंगे। एक रिंग कच्चा और दूसरा पक्का होगा। इसके अलावा चेंजिंग रूम व ट्वॉयलेट भी होगा। कुश्ती देखने वालों के लिए दर्शक दीर्घा भी बनेगा। इसे बनवाने में करीब 60 लाख रुपये खर्च होने का आकलन है। सीईओ के निर्देश पर प्रोजेक्ट विभाग ने इसका टेंडर जारी कर दिया है।

सिरसा प्रवेश द्वार पर वोगेनवेलिया के गुलाबी फूल और अशोक के पेड़ कर रहे स्वागत
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सपरेसवे से सिरसा के रास्ते ग्रेटर नोएडा में प्रवेश करने पर आपका स्वागत पुणे के गुलाबी वोगेनवेलिया के फूल और हरे-भरे अशोक के वृक्ष करेंगे। प्राधिकरण ने इस जगह पर पुणे की ग्लैबरा प्रजाति के वोगेनवेलिया के 350 व अशोक के 250  पौधे लगवाए हैं। प्राधिकरण की इस पहल से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से रोजाना ग्रेटर नोएडा आने वाले हजारों यात्री इस सुंदर व मनमोहक दृष्य का नाजारा देख सकेंगे। जब वसंती मौसम में वोगेनवेलिया के फूल खिलेंगे, तब ग्रेटर नोएडा आने वालों को अलग ही एहसास होगा।

निजी सहभागिता से हरे भरे हो रहे गोलचक्कर
ग्रेटर नोएडा के सभी गोलचक्करों को निजी सहभागिता  (पीपीपी मॉडल पर) से हरा-भरा बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत कंपनी या संस्थान गोलचक्कर को प्राधिकरण से तय समयावधि के लिए ले लेती है। उसे विकसित करेंगी। उतने समय के लिए उनको अपना प्रचार-प्रसार के लिए बोर्ड लगाने का अधिकार होगा। उसके बाद वे प्राधिकरण को हस्तांरित कर देंगी। उदाहरण के तौर पर शिवनादर विवि ने सिरसा गोलचक्कर को गोद लिया है। इसी तरह अर्बेनिया ग्रुप ने हनुमान मंदिर, ट्राइडेंट ने बिसरख के पास का गोलचक्कर को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने का जिम्मा उठाया है। ग्रेटर नोएडा के अन्य गोलचक्कर भी इसी तरह से विकसित किए जा रहे हैं।

रोटरी के आसपास के एरिया भी हो रहे विकसित
ग्रेटर नोएडा में अब गोलचक्करों को हरा-भरा बनाने का पैटर्न भी बदल गया है। अब गोलचक्कर के साथ चारों कॉर्नर तो विकसित होते ही हैं, उनके आसपास चारों तरफ 20-20 मीटर की ग्रीन बेल्ट भी विकसित की जाती है। गोलचक्करों के आसपास पहुंचने से पहले ही यात्रियों को हरियाली अलग से दिखे। सेक्टर पी थ्री का गोलचक्कर इसका उदाहरण भी है। इसी तरह होंडा सीएल कंपनी के पास खाली जमीन पर अतिक्रमण हो रहा था, जिसे प्राधिकरण ने खाली कराकर हरी-भरी घास और पौधे लगा दिए हैं, जिससे आसपास की खूबसूरती और बढ़ गई है। ऐसे और भी जगहों को चिंहित कर उन्हें विकसित किए जा रहे हैं।

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