नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के 18 हजार घर खरीदारों को राहत दीं, बायर बोले- दावों से हकीकत बहुत दूर

UP RERA का दावा : नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के 18 हजार घर खरीदारों को राहत दीं, बायर बोले- दावों से हकीकत बहुत दूर

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के 18 हजार घर खरीदारों को राहत दीं, बायर बोले- दावों से हकीकत बहुत दूर

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  • यूपी रेरा को गठन से लेकर अब तक 47,000 शिकायतें मिलीं
  • इनमें से 76% शिकायतें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आईं
  • कुल शिकायतों में से 80% के समाधान करने का दावा यूपी रेरा ने किया
  • इस तरह गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद की 18,000 शिकायतें खत्म कीं

 

Noida News : उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) को 2017 से अब तक घर खरीदारों की 47,000 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। रेरा का दावा है कि उनमें से लगभग 88% का समाधान किया गया है। यूपी-रेरा के अधिकारियों ने ने एक आधिकारिक बयान जारी करके यह जानकारी दी है। रेरा ने बताया कि यह सारी शिकायतें 1 मई, 2017 से अब तक उन्हें प्राप्त हुई हैं। हालांकि, दूसरी ओर घर खरीदार यूपी रेरा की परफॉर्मेंस को लेकर सवाल खड़े करते हैं। उनका कहना है, "यूपी रेरा से घर खरीदारों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।"

76% शिकायतें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से मिलीं
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के तुरंत बाद वर्ष 2017 में इस निकाय का गठन घर खरीदारों और रियल एस्टेट क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए किया गया था। रेरा के अधिकारियों ने कहा कि 47,000 शिकायतों में से लगभग 76% नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की हैं। यह तीनों उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहर हैं और दिल्ली एनसीआर का हिस्सा हैं। मतलब, 21 हजार से ज्यादा शिकायतें इन शहरों से मिली हैं। इनमें से 18,000 से ज्यादा का निस्तारण किया गया है। यूपी-रेरा के सचिव राजेश कुमार त्यागी ने कहा, "यूपी-रेरा ने प्रक्रिया को और तेज कर दिया है ताकि होम बायर्स की शिकायतों को जल्द से जल्द दूर किया जा सके। रेरा की ओर से जारी होने वाले आदेश का निष्पादन भी तेजी से हो सके।"

अब तक 70% शिकायतों के आदेश लागू हुए
उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण की ओर से दी गई सूचनाओं के मुताबिक साल 2022 में यूपी-रेरा को 7,050 शिकायतें मिलीं। इसी तरह 2021 में 8,600, 2020 में 8,890, 2019 में 12,600, 2018 में 8,300 और 2017 में 1,650 शिकायतें मिली थीं। अधिकारियों ने आगे कहा कि यूपी-रेरा के पास साल-दर-साल निपटाई गई शिकायतों की सही संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन 2017 के बाद से अब तक दर्ज करवाई गई कुल शिकायतों में से 88% का समाधान किया गया है। उनमें से कम से कम 70% में जारी आदेशों को भी लागू करवा दिया गया है।

रेरा के दावों और हकीकत में धरती-आसमान का फर्क
यूपी-रेरा ने कहा कि रियल्टी परियोजनाओं के प्रमोटरों के खिलाफ करीब 46,400 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जबकि 500 ​​आवंटियों के खिलाफ हैं और 200 रियल एस्टेट सलाहकारों के खिलाफ हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2017 में खरीदारों की शिकायतों के लिए वेबसाइट लॉन्च की थी। कोई भी खरीदार ₹1,000 का शुल्क देकर शिकायत दर्ज कर सकता है और 60 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान प्राप्त कर सकता है। दूसरी तरफ होम बॉयर्स यूपी-रेरा के इन दावों और आकंड़ों से सहमत नहीं हैं। क्योंकि इस निकाय के आदेश आदेश प्रशासन ने लागू नहीं किए हैं।यूपी-रेरा की ओर से जारी 20% आदेश लागू किए जाते हैं। यूपी-रेरा अगर किसी शिकायत पर आदेश जारी कर दे तो उस मामले सुलझा हुआ मानता है, लेकिन यह आदेश अमल में नहीं आते हैं। मसलन, होम बॉयर्स के पक्ष में कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के रिफंड ऑर्डर अभी तक जिला प्रशासन लागू नहीं कर पाया है। घर खरीदार पैसा वापस लेने के लिए धक्के खा रहे हैं। उन्हें नुकसान हो रहा है। दरअसल, यूपी-रेरा के पास इन आदेशों को लागू करवाने की शक्तियां नहीं हैं। इसलिए स्थानीय अधिकारी रेरा के आदेशों का पालन या कार्यान्वयन नहीं करते हैं।

यूपी रेरा का बाकी अदालतों से का बुरा हाल
गौतमबुद्ध नगर में फ्लैट खरीदारों की सबसे बड़ी संस्था नफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कहते हैं, "उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण का हाल बाकी अदालतों से भी बुरा है। बाकी अदालतों के पास अपने आदेश लागू करवाने के लिए शक्तियां हैं। यूपी रेरा के पास कोई शक्ति नहीं हैं। आप एक तरह से यूपी रेरा को कंजूमर कोर्ट ही मान सकते हैं, जो आदेश तो सुना सकती है लेकिन उससे लाभ मिले या ना मिले यह पुलिस और प्रशासन पर निर्भर करता है।" गौतमबुद्ध नगर विकास समिति की अध्यक्ष रश्मि पांडे घर खरीदारों के हकों में करीब एक दशक से काम कर रही हैं। वह कहती हैं, " बिल्डर तो हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और सरकार के सामने झूठ बोलते हैं। वहां के आदेशों का पालन नहीं करते, जबकि वहां असीमित शक्तियां हैं। ऐसे में शक्तिहीन रेरा के आदेशों का बिल्डर कितना पालन कर होंगे, आप सहज अनुमान लगा सकते हैं। यूपी रेरा का हाल बिना नाखून और दातों वाले शेर जैसा है।"

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