ग्रेटर नोएडा के 'मॉडल विलेज' देखकर तो यही मुंह से निकलता है

हे राम ! ग्रेटर नोएडा के 'मॉडल विलेज' देखकर तो यही मुंह से निकलता है

ग्रेटर नोएडा के 'मॉडल विलेज' देखकर तो यही मुंह से निकलता है

Tricity Today | ग्रेटर नोएडा के मॉडल विलेज की हालत

ग्रेटर नोएडा के 'मॉडल विलेज' देखकर तो यही मुंह से निकलता है ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने गांवों का पुरसा हाल जानने की कवायद शुरू की है। बाकायदा छोटे-बड़े अफसरों को गांवों में भेजकर हालात का जायजा लिया जा रहा है। अफसरों के दौरों की ऐसी फोटो और वीडियो सामने आ रही हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरत में हैं। जिन गांवों को "मॉडल विलेज" बनाने के नाम पर विकास प्राधिकरण ने करोड़ों रुपए खर्च कर डाले, वहां चलने के लिए रास्ते भी नहीं हैं। अफसरों की टीम कीचड़ से लबालब गलियों में पेंट उठाकर और जूते निकाल कर चलने को मजबूर हैं। गांव वाले अफसरों की टोलियों को घुमा घुमा कर पूरा गांव दिखा रहे हैं।

रोजा जलालपुर में कीचड़ से भरे रास्ते में फंस गए अफसर
दो दिन पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की टीम ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मॉडल विलेज रोजा जलालपुर पहुंची। इस गांव में रोड, नाली, सीवर और स्ट्रीट लाइट समेत तमाम मूलभूत सुविधाएं विकसित करने पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद गांव की गलियों में पानी और कीचड़ भरा है। सोमवार को अधिकारी रोजा जलालपुर पहुंचे तो वहां रोड पर फैले कीचड़ में खुद ही फंस गए।



गांव के निवासी अनिल नागर ने कहा, "मुख्य सड़क पर इतना कीचड़ भरा है कि लोगों का आवागमन करना मुश्किल है। कीचड़ से भरे रास्तों की शिकायत अथॉरिटी में न जाने कितनी बार कर चुके हैं। सोमवार को विकास प्राधिकरण के अफसरों की टीम आई थी। जिसमें प्रोजेक्ट विभाग के सीनियर मैनेजर ब्रहम सिंह भी आए थे। गंदगी भरे रास्तों को देखकर किसी तरह निकले, लेकिन फिर भी कीचड़ में फंस गए। प्राधिकरण के सफाई ठेकेदार बेहद लापरवाह हैं। कोई काम करने के लिए तैयार नहीं है। गांव में सफाई करने यदा-कदा आते हैं। उस दिन भी पूरा कूड़ा उठाकर गांव के तालाब में फेंक जाते हैं।"

हल्दोनी गांव में तालाब बन चुकी है मुख्य सड़क
प्राधिकरण के अधिकारियों की टीम हल्दोनी गांव में पहुंची। वहां का नजारा हैरत भरा था। सूरजपुर-नोएडा मुख्य मार्ग से सटे हल्दोनी गांव में गलियां पानी से डूबी रहती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य मार्ग से कई दूसरे गांवों के लोग रोजाना आवागमन करते हैं। सभी को नाला बन चुकी सड़क से ही होकर गुजरना पड़ता है। पूर्व प्रधान मुरसलीन बताते हैं, "जब विकास प्राधिकरण ने हमारे गांव की जमीन ली थी तो मॉडल विलेज बनाकर दुनिया के नक्शे पर दिखाने का वायदा किया था। गांव में नाली, नाला, सड़क, गलियां, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और तमाम दूसरी मूलभूत सुविधाएं देने का वादा किया था। लेकिन हालात सबके सामने हैं।" उन्होंने बताया कि गांव के मुख्य रास्ते से जलपुरा, ऐमनाबाद और कई दूसरे गांवों के लिए आवागमन है। यहां बीचोंबीच 24 मीटर चौड़े रास्ते पर बनी नाली टूटने से हर समय गंदा पानी मुख्य सड़क पर ही भरा रहता है। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायत न जाने कितनी बार की जा चुकी हैं, लेकिन कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। गांव की सड़क तालाब बनी हुई है।



ग्रेटर नोएडा में 24 मॉडल विलेज हैं, सभी का यही हाल
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने पूरे इलाके में 24 गांवों को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया है, लेकिन सारे गांवों की दुर्दशा हो चुकी है। गांव वाले परेशान हैं और गंदगी में जीने के लिए मजबूर हैं। बड़ी बात यह है कि पिछले कई वर्षों से प्राधिकरण के अफसर गांवों में जाकर नहीं फटके हैं। तालाबों में जमा गंदगी से भूजल प्रदूषित हो रहा है। लोगों को जान का खतरा सता रहा है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के इलाके तालाबों की सफाई तो करवाई जाती है, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्राधिकरण के अफसर और ठेकेदार मिलकर हर साल तालाबों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए डकार रहे हैं। 

अरबों रुपए खर्च कर 12 साल पहले सीवर लाइन डाली, अब तक नहीं चली
ग्रामीणों ने बताया कि अथॉरिटी ने करीब 12 साल पहले सीवर लाइन डाली थी, लेकिन अभी तक चालू नहीं की गई हैं। गांव का गंदा पानी तालाबों में पहुंचकर भूगर्भ जल को जहरीला बना रहा है। आबादी पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। प्राधिकरण ने पेयजल के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है। ग्रामीण हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप चलाकर प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। रोजा जलालपुर गांव के अनिल नागर, सादुल्लापुर के संदीप नागर, खैरपुर गुर्जर के मुकेश खारी, पतवाड़ी के प्रधान टीकम सिंह और सैनी गांव के रविंद्र शर्मा ने बताया कि अथॉरिटी ने हमारे गांवों को मॉडल विलेज बनाने का सपना दिखाया था। सारी जमीन अधिग्रहित करके बिल्डरों को दे दी। 12 साल पहले सीवर लाइन डाली गई थी, जो अब तक चालू नहीं की गई है। 



कूड़े से भरे पड़े हैं तालाब, भूगर्भ जल बन रहा जहरीला
जलालपुर के निवासी अनिल नागर का कहना है कि गांव के बीचोबीच एक तालाब है। पूरे गांव की नालियां बहकर तालाब में जा रही हैं। जिससे तालाब प्रदूषित है और गांव के भूगर्भ जल को भी प्रदूषित कर रहा है। लोग घरों में लगे हैंडपंप से वही प्रदूषित पानी निकाल कर पी रहे हैं। सादुल्लापुर के निवासी संदीप नागर का कहना है कि कोरोनावायरस ने गांव में करीब 24 लोगों की जान ले ली। तालाब में भरे गंदे पानी से ग्रामीणों को बड़ा खतरा है। अगर सीवर लाइन चालू हो जाएं तो तालाब को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। जिससे गांव का भूगर्भ जल भी बच जाएगा। अपने ही घरों से निकलने वाले सीवर को दोबारा हैंड पंपों के जरिए पीकर लोग घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। बुजुर्ग और बच्चों की संख्या ज्यादा है।

 

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