पहले पति से धोखा खाई महिला ने 17 हजार लोगों को ठगा, एक साल में खड़ी कर दी 150 करोड़ की 'ठग कम्पनी

कहानी दिलचस्प है : पहले पति से धोखा खाई महिला ने 17 हजार लोगों को ठगा, एक साल में खड़ी कर दी 150 करोड़ की 'ठग कम्पनी

पहले पति से धोखा खाई महिला ने 17 हजार लोगों को ठगा, एक साल में खड़ी कर दी 150 करोड़ की 'ठग कम्पनी

Tricity Today | आरोपी गिरफ्तार

पहले पति से धोखा खाई महिला ने 17 हजार लोगों को ठगा, एक साल में खड़ी कर दी 150 करोड़ की 'ठग कम्पनी Greater Noida News : एक कामकाजी महिला ने अपने पहले पति से धोखा क्या खाया पूरे दिल्ली-एनसीआर के 17 हजार लोगों से डेढ़ अरब रुपये की ठगी कर डाली। उसने दूसरी शादी की। अपने नए पति और बेटे के साथ मिलकर 'चीटिंग कम्पनी' की नींव रखी। मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM Company) करने वाली यह कम्पनी बाइक चलवाने के नाम पर ठगी कर रही थी। महिला, उसके दूसरे पति और बेटे की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की स्टोरी से कम नहीं है। कानून का शिकंजा कसा और यह जोड़ा जेल पहुंच गया। दूसरों के पैसे पर ऐश-ओ-आराम कर रहे इन दोनों पति-पत्नी ने जेल में पहले दिन खाना नहीं खाया। जेल की बैरक में दोनों को नींद भी नहीं आ रही है। महिला तो उदास और रुआंसी है। दूसरी और पुलिस फरार बेटे को तलाश कर रही है।

मीनू सेन ने पहले पति को छोड़कर अनिल से शादी की
मीनू सेन की कहानी तब नया मोड़ लेती है जब उसे पहले पति से धोखा मिलता है। दोनों अलग हो जाते हैं और मीनू सेन, अनिल से मिलती है। मीनू सेन और अनिल शादी कर लेते हैं। फिर दोनों मिलकर ठग कंपनी की नींव डालते हैं। हैरानी की बात तो यह रही कि मीनू के प्रेम जाल में फंसे अनिल ने अपने बच्चों को नकार दिया और सौतेले बेटे कृणाल के नाम पर करोड़ों रुपये की प्रापर्टी कर दी। ठगी की रकम से सौतेले बेटे के लिए महंगी कार खरीदी। कृणाल मीनू का पहले पति से बेटा है।

महज एक साल में रकम दोगुनी करने का झांसा दिया
मीनू सेन और अनिल ने अपनी कम्पनी का नाम 'गो वे' रखा। दरअसल, यह देश में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने वाली कम्पनी बाइक बोट से इंस्पायर्ड थी। कम्पनी का दफ्तर ग्रेटर नोएडा में खोला गया। मीनू सेन और उसके पति अनिल ने आम आदमी को महज एक साल में रकम दो गुना वापस करने का झांसा दिया। जब देश के बड़े-बड़े बैंक सात साल में पैसा दोगुना नहीं कर पार रहे, ऐसे में इस ठग कम्पनी के झांसे को लोग नहीं समझ पाए। देखते ही देखते हजारों लोगों ने इन्हें करीब 150 करोड़ रुपये दे दिए।

दिल्ली-एनसीआर के 17 हजार लोगों को ठगा गया
ग्रेटर नोएडा के एडिशनल डीसीपी विशाल पांडेय ने कहा, "अनिल एक फैक्टरी में नौकरी करता था। वह मध्यम परिवार से है। उसकी मुलाकात कम्पनी में मीनू से हुई। इसी बीच मीनू का पहले पति से झगड़ा चल रहा था और दोनों अलग हो गए। अनिल और मीनू की प्रेम कहानी शुरू हुई और दोनों ने शादी कर ली। मीनू ने अपने बेटे के साथ मिलकर अनिल को ठग कंपनी सेटअप करने का आइडिया दिया। तीनों ने मिलकर 'गो वे' कम्पनी बनाई। महज एक साल के अंदर दिल्ली-एनसीआर के 17 हजार निवेशकों को इन लोगों ने जाल में फंसा लिया।

मीनू का बेटा कृणाल संभालता था कम्पनी ऑफिस
ग्रेटर नोएडा में जहां कम्पनी का दफ्तर खोला गया, वह एच्छर चौकी इलाके में था। चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र तोमर ने बताया, इस केस में आरोपी मीनू का बेटा कृणाल 'गो वे' कंपनी के ऑफिस में बैठता था। वह निवेशकों को रकम दोगुनी करने का झांसा देता था। कृणाल के अलावा पुलिस इस मामले में कम्पनी प्रबंधक प्रदीप की तलाश भी कर रही है। अभी ये दोनों पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस का कहना है कि सारे लोग जल्दी पकड़ में आ जाएंगे।

लोनी के छोटे से गांव से ढाई करोड़ के विला तक
अनिल मूल रूप से गाजियाबाद जिले में लोनी कस्बे के पास सीती गांव का रहने वाला है। वह महज चार साल पहले तक गांव के मकान में रहता था। रोजाना नौकरी करने नोएडा की कम्पनी में आता था। मीनू के साथ ठग कंपनी शुरू करने के बाद उसकी जिंदगी बदल गई। मीनू की फरमाइश पर उसने अपना पूरा परिवार छोड़ दिया। करीब ढाई करोड़ रुपये का विला गुरुग्राम में खरीदा था। वहीं, उसने इलेक्ट्रानिक स्कूटर बनाने की फैक्टरी भी लगा ली थी। हैरानी की बात तो यह रही कि मीनू के प्रेम जाल में फंसे अनिल ने अपने बच्चों को नकार दिया और सौतेले बेटे कृणाल के नाम पर करोड़ों रुपये की प्रापर्टी कर दी। ठगी की रकम से सौतेले बेटे के लिए महंगी कार खरीदी। कृणाल मीनू का पहले पति से बेटा है।

बाइक बोट घोटाले की बदौलत खुला इनका राज
ग्रेटर नोएडा के साइट फोर में स्थित जीएनएस प्लाजा में वर्ष 2018 में 'गो वे' कंपनी शुरू की गई। निवेशकों का झांसा दिया गया कि कंपनी दिल्ली-एनसीआर के शहरों में लोगों के लिए बाइक चलाएगी। निवेश की गई रकम एक साल में दोगुना करके वापस करेगी। प्रत्येक बाइक के लिए 62 हजार रुपये निवेश करवाए गए थे। निवेशकों ने कई-कई बाइकों के लिए कंपनी में निवेश किया। इसी बीच बाइक बोट घोटाले का खुलासा हो गया। 'गो वे' के निवेशक भी परेशान हो गए। लोग पूछताछ करने लगे। मामला बिगड़ता देखकर अनिल और मीनू सेन भी अचानक दफ्तर पर ताला जड़कर फरवरी 2019 में फरार हो गए। आरोपितों के खिलाफ बीटा दो कोतवाली में 16 मुकदमे दर्ज किए गए। अब दो साल से ज्यादा वक्त बीतने पर रविवार को पुलिस ने अनिल और मीनू को गिरफ्तार किया है। अदालत ने दोनों को जेल में बंद कर दिया है।

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