कोरोना नियमों के साथ बंगाली क्लब में हुआ मां की मूर्ति का विसर्जन, धूमधाम से हुई विदाई

लखनऊ : कोरोना नियमों के साथ बंगाली क्लब में हुआ मां की मूर्ति का विसर्जन, धूमधाम से हुई विदाई

कोरोना नियमों के साथ बंगाली क्लब में हुआ मां की मूर्ति का विसर्जन, धूमधाम से हुई विदाई

Tricity Today | बंगाली क्लब में हुआ मां की मूर्ति का विसर्जन

कोरोना नियमों के साथ बंगाली क्लब में हुआ मां की मूर्ति का विसर्जन, धूमधाम से हुई विदाई लखनऊ : मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के पूजन के पर्व नवरात्र पर भी कोराेना का ग्रहण देखने को मिला है। मंदिरों में जहां कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन के अनुरूप सार्वजनिक पूजन हुआ है। तो वहीं दुर्गा पूजा पंडाल भी कम नजर आएं हैं। शुक्रवार को राजधानी के सबसे पुरानी बंगाली क्लब की दुर्गा पूजा को विसर्जन करके अंतिम विदाई दी गई है। हालांकि कोरोना ध्यान में रखते हुए इस बार मूर्ति विसर्जन बंगाली क्लब में ही किया गया है। बता दें कि क्लब में 6 फिट के गड्ढे में पानी भर कर मूर्ति को विसर्जित किया गया है।

विसर्जन के दौरान कोरोना गाइडलाइंस का किया पालन
नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधि-विधान के साथ पूजा करने के बाद 10वें दिन मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। मां दुर्गा का विसर्जन अपराह्ण काल या प्रात: काल के दौरान किया जाता है। दुर्गा विसर्जन के दौरान बंगाली महिलाएं सिंदूर खेला करके मां को विदा करती हैं। लेकिन इस बार महिलाएं सामाजिक दूरी और मास्क के साथ पूजा-अर्चना, नृत्य और नगाड़ो से माता रानी को अंतिम विदाई दी है। जानकारी के मुताबिक लखनऊ के बंगाली क्लब में 108 वर्षों से मां दुर्गा की पूजा की जाती है।

इस तरह होती है विदाई
बंगाली क्लब की असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी तृषा ने बताया कि मान्यता है कि नवरात्र में मां दुर्गा अपने मायके आती है। जब वह आती है तो बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ माता रानी का स्वागत करते हैं। विसर्जन होने से पहले जिस तरह से किसी भी लड़की की शादी के बाद विदाई पूरे विधि विधान से की जाती है ठीक उसी प्रकार से मां दुर्गा की पूजा करके उनको अंतिम विदाई देते हैं। बंगाली क्लब की मान्यता अनुसार विसर्जन करने से पहले मां की मूर्ति को भोग और मांग में सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद धुएं रूपी दिया से मां की अंतिम विदाई की जाती है।

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