प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच झड़प, राकेश टिकैत का ऐलान- ‘22 जुलाई से संसद के सामने धरना देंगे’

यमुनानगर में बवाल: प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच झड़प, राकेश टिकैत का ऐलान- ‘22 जुलाई से संसद के सामने धरना देंगे’

प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच झड़प, राकेश टिकैत का ऐलान- ‘22 जुलाई से संसद के सामने धरना देंगे’

Google Image | प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच झड़प, राकेश टिकैत का ऐलान- ‘22 जुलाई से संसद के सामने धरना देंगे’ हरियाणा के यमुनानगर में आज थोड़ी देर पहले किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई है। इसके बाद गुस्साए किसानों ने तोड़फोड़ की। बैरिकेड पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। हालात को संभालने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दरअसल यहां कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा आने वाले थे। स्थानीय विधायक और मंत्री भी उनके साथ मंच साझा करते। लेकिन किसानों के एक संगठन ने कहा था कि वह कार्यक्रम का विरोध करेगा। किसी भी कीमत पर कार्यक्रम नहीं होने देंगे। 

कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा का कार्यक्रम था
बाद में सैकड़ों किसानों ने गिरफ्तार दी। पुलिस ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। लेकिन किसानों की भारी भीड़ के आगे सब बेमानी साबित हुआ। उधर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि 22 जुलाई से संगठन के 200 कार्यकर्ता संसद के पास धरना देंगे। यमुनानगर के DSP ने बताया, ''कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा की आज यहां बैठक का कार्यक्रम था। स्थानीय विधायकों और मंत्रियों को भी यहां आना था। 


कानूनी कार्रवाई की जाएगी
किसानों ने कहा था कि वे शांतिपूर्ण ढंग से कार्यक्रम का विरोध करेंगे। मगर बाद में वे किसी भी कीमत पर कार्यक्रम नहीं होने देने की जिद पर अड़ गए।' अधिकारी ने बताया कि पुलिस और किसानों का आमना-सामना हुआ। कुछ लोगों ने बैरिकेड पर ट्रैक्टर चढ़ाया। इस बारे में किसान नेताओं से बात की गई। उन्होंने कहा कि हम इसके लिए माफी मांगते हैं। हमारे बीच में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो बात नहीं मानते हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सैकड़ों किसानों ने गिरफ्तारियां दी हैं। 

22 जुलाई से शुरू होगा धरना
तीन नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने आज बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत सरकार बातचीत करना चाहती है तो हम तैयार हैं। लेकिन अगर जल्द कृषि कानूनों का मामला नहीं सुलझा, तो 22 जुलाई से हमारा दिल्ली जाने का कार्यक्रम रहेगा। 22 जुलाई से संसद सत्र शुरू होगा। उसी दिन हमारे 200 कार्यकर्ता संसद के पास धरना शुरू करेंगे। 

सफाई दी
उन पर लगे आरोपों की सफाई देते हुए उन्हेंन कहा, मैंने ये नहीं कहा था कि कृषि क़ानूनों को लेकर किसान संयुक्त राष्ट्र (United Nations) जाएंगे। हमने कहा था कि बीती 26 जनवरी को दिल्ली में हुई घटना की निष्पक्ष जांच हो जाए। अगर यहां की एजेंसी जांच नहीं करेगी, तो क्या हम UN में जाएं?

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