Oxygen Crises : पटना के अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हुई, नोडल अधिकारी ने कहा-‘गैरकानूनी ढंग से इलाज कर रहे हॉस्पिटल पर होगी कार्रवाई’

पटना के अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हुई, नोडल अधिकारी ने कहा-‘गैरकानूनी ढंग से इलाज कर रहे हॉस्पिटल पर होगी कार्रवाई’

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पूरे देश में ऑक्सीजन की किल्लत से मरीजों और परिजनों की सांसें फूल रही हैं। बिहार की राजधानी पटना में रविवार की देर रात ऑक्सीजन की कमी से हाहाकार मच गया। राजधानी के हाई-टेक हॉस्पिटल में प्राण रक्षक गैस की आपूर्ति बंद हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने देर रात यहां भर्ती कोरोना संक्रमित 60 मरीजों को डिस्चार्ज पेपर पकड़ा दिया। बीती रात करीब एक बजे मरीजों को कहीं और शिफ्ट करने के लिये कहा गया।

अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि उनके पास सिर्फ रात एक बजे तक का ही ऑक्सीजन बचा है। उसके बाद मरीजों को कुछ हुआ, तो उनकी जिम्मेदारी नहीं होगी। हालांकि मरीजों ने डिस्चार्ज पेपर लेने से इनकार कर दिया। पेशेंट और उनके परिवार वाले देर रात तक डर के साये में थे। हाहाकार मचने के बाद देर रात पटना के जिलाधिकारी ने हॉस्पिटल को 40 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराये। उसके बाद मरीजों और तीमारदारों की सांस में सांस आई। हालांकि सोमवार की सुबह 8 बजे फिर ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हो गई। परिजनों से कहा गया कि सुबह 10 बजे तक मरीजों को ले जायें।  उसके बाद ऑक्सीजन मिलना बंद हो जायेगा। 

जानकारी के मुताबिक हर प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए एक सरकारी अफसर नियुक्त किया गया है। हाई-टेक हॉस्पिटल दानापुर नोडल ऑफिसर की देखरेख के दायरे में आता है। नोडल अधिकारी ने बताया कि ये हॉस्पिटल की गलती है। उनके पास सिर्फ 25 बेड्स की मंजूरी थी। उन्होंने अवैध रूप से इतने मरीजों को भर्ती किया। अब उनके परिजनों के माध्यम से ऑक्सीजन के लिये दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। नोडल अधिकारी ने बताया कि अस्पताल पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है। लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि हॉस्पिटल में उपचाराधीन मरीजों का क्या होगा। सरकार उन्हें किसी और अस्पताल में शिफ्ट करेगी या नहीं।

दरअसल यहां भर्ती कई मरीजों की हालत स्थिर नहीं हैं। उन सभी को हाई लेवल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। ऐसे में ऑक्सीजन नहीं मिलने या अस्पताल प्रशासन द्वारा ऐसे निकाले जाने से उनकी जान को खतरा है। साथ ही उनसे संक्रमण और फैलने की आशंका भी है। हालांकि कई मरीज रात में और कई सुबह इंतजाम कर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट हो गए हैं। बचे हुए बाकी मरीजों के परिजन भी उन्हें किसी और अस्पताल में शिफ्ट करने की कोशिश में जुटे हैं। राजधानी के कई अस्पताल इन मरीजों को अवैध तरीके से इलाज करने का झांसा दे रहे हैं। लेकिन बहुत अधिक पैसों की मांग भी कर रहे हैं।

ऐसे में जो व्यवस्था कर पायेंगे, वो दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट हो जायेंगे। लेकिन जो इंतजाम नहीं नहीं कर पाये, उनका क्या होगा? उनकी जवाबदेही कौन लेगा? ये सीधे तौर पर एक अनहोनी की आशंका को जन्म दे रहा है। अस्पताल पर कार्रवाई जरूर हो, लेकिन इन मरीजों को सरकारी इंतजाम पर कहीं और शिफ्ट किया जाये। सवाल ये भी उठता है कि अगर अस्पताल अवैध में इतनी सारे मरीजों को भर्ती कर रहा है, तो क्या ये बिना किसी प्रशासनिक घालमेल के संभव है?

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