रेल रोको: 18 फरवरी को थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन दिखाएंगे जोर

18 फरवरी को थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन दिखाएंगे जोर

Google Image | 18 फरवरी को किसान संगठन देशव्यापी आंदोलन करेंगे

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठन गुरुवार, 18 फरवरी को ‘रेल रोको’ अभियान चलाएंगे। इसका पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में गहरा असर दिखाई देगा। इसको देखते हुए केंद्र सरकार और भारतीय रेलवे ने रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) की 20 अतिरिक्त कंपनियां तैनात किया है। दरअसल तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग कर रहे संगठनों ने पिछले हफ्ते ही रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया था। 

इसके बाद से ही भारत सरकार और रेल मंत्रालय के बीच रेलवे सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर सामंजस्य बनाया जा रहा था। इस क्रम में संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में 20,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। ताकि आंदोलन के दौरान हिंसा पर नियंत्रण रखा जा सके। साथ ही जवान आंदोलन को हिंसक नहीं होने देंगे। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक, अरुण कुमार ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मैं सभी से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं। 

अधिकारी ने आगे कहा, “हम जिला प्रशासनों के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और नियंत्रण कक्ष बनाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “हम खुफिया जानकारी जुटा रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों और कुछ अन्य क्षेत्रों पर हमारा विशेष ध्यान रहेगा। एहतियात बरतते हुए इन इलाकों में रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) की 20 कंपनियों (करीब 20,000 जवानों) को तैनात किया गया है।” महानिदेशक ने कहा, हमें ‘रेल रोको’ आंदोलन से कोई आपत्ति नहीं है। 

उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि यह अभियान शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जाये। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारे लिए प्रथम है। किसान संगठन एसकेएम ने देश भर के किसानों से अपील की थी, कि 18 फरवरी को देशभर में दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रेलों की आवाजाही को अवरुद्ध किया जाए। कुछ राज्यों में इसका व्यापक असर होने की उम्मीद है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल में इसका जोरदार असर दिखाई देगा।

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