जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी 10 बातें जो इसे दुनिया का टॉप एयरपोर्ट बनाएंगी, जानिए

Updated Mar 07, 2020 17:36:59 IST | Tricity Today Reporter

जेवर में बनाए जा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की देश ही नहीं दुनिया में धमक सुनाई दे रही है। 25 मार्च को उत्तर प्रदेश सरकार न्यूयॉर्क में जेवर एयरपोर्ट की कहानी सुनाएगी। लेकिन, यह सब यूं ही नहीं हो रहा है। बहुत सारी वजह हैं, जो जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट...

जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी 10 बातें जो इसे दुनिया का टॉप एयरपोर्ट बनाएंगी, जानिए
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प्रतीकात्मक फोटो

जेवर में बनाए जा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की देश ही नहीं दुनिया में धमक सुनाई दे रही है। 25 मार्च को उत्तर प्रदेश सरकार न्यूयॉर्क में जेवर एयरपोर्ट की कहानी सुनाएगी। लेकिन, यह सब यूं ही नहीं हो रहा है। बहुत सारी वजह हैं, जो जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दुनिया के टॉप एयरपोर्ट में शुमार करेंगी। हम आपको इन सारी वजहों में से 10 चुनिंदा बातें बता रहे हैं। यही 10 वजह के कारण जेवर एयरपोर्ट एशिया का नंबर वन और दुनिया का नम्बर पांच एयरपोर्ट बनेगा।

जेवर में एक हवाई अड्डे के प्रस्ताव को पहली बार 2001 में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया था। वह तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनकी उत्तराधिकारी मायावती ने भी योजना का समर्थन किया और प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए 5,000 हेक्टेयर जमीन आरक्षित कर दी थी। केंद्र की यूपीए सरकार ने इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया। क्योंकि, यह दिल्ली में मौजूदा एयरपोर्ट से 150 किलोमीटर के दायरे में है।

  1. देश में अभी हवाई जहाजों के लिए मेंटिनेंस, रिपेयर एन्ड ओवरऑल (MRO) सर्विसेज उपलब्ध नहीं है। भारत के तमाम हवाई जहाज इसके लिए श्रीलंका, चीन, मलेशिया सिंगापुर और दुबई जाते हैं। जो इंडियन एविएशन इंडस्ट्री के लिए बड़ा महंगा काम है। एक अनुमान है कि इसी साल एमआरओ उद्योग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगा। जेवर एयरपोर्ट इसका बड़ा हिस्सा हासिल करेगा।
  2. जेवर हवाई अड्डे की आवश्यकता महसूस की गई क्योंकि दिल्ली हवाई अड्डे पर 2021 और 2023 के बीच 100 मिलियन सालाना यात्रियों का दबाव होगा। जेवर एयरपोर्ट की ओपनिंग 20 मिलियन सालाना यात्रियों से होगी। ऐसा दुनिया का यह पहला एयरपोर्ट होगा।
  3. हवाई अड्डे के पहले चरण की लागत 4,588 करोड़ रुपये होगी और इसके 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। 2023 के शुरुआती महीनों में यहां से उड़ान शुरू हो जाएंगी। यह केवल 36 महीनों में बनकर तैयार होगा।
  4. हवाई अड्डे का निर्माण 5,000 हेक्टेयर में किया जा रहा है, जिसमें से 1,334 हेक्टेयर भूमि का पहले चरण में ही अधिग्रहित किया जा चुका है। बाकी जमीन का अधिग्रहण अगले एक साल में किया जाएगा। इतने बड़े क्षेत्रफल वाला यह एशिया पहला एयरपोर्ट होगा।
  5. वर्ष 2027 तक इस हवाई अड्डे के छह से आठ रनवे होंगे। भारत और एशिया में सबसे अधिक रनवे वाला एयरपोर्ट बन जाएगा।
  6. स्विस फर्म ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी नवंबर 2019 में जेवर हवाई अड्डे की परियोजना के लिए उच्चतम बोलीदाता के रूप में उभरा था, जो अदानी एंटरप्राइजेज, डीआईएएल और एंकोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट होल्डिंग जैसे प्रतियोगियों को पछाड़ दिया था। ज्यूरिख एयरपोर्ट पहली बार यूरोप और अमेरिका से निकलकर एशिया में कारोबार करने आया है। यह कम्पनी दुनिया की सबसे पुरानी एविएशन कम्पनियों में शामिल है। कम्पनी को 100 साल का अनुभव है।
  7. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की अनुमानित लागत लगभग 30,000 करोड़ रुपये है। यह दुनिया के हालिया 100 टॉप इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जो आने वाले दशकों में दुनिया की अर्थव्यवस्था में बदलाव करेंगे।
  8. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान के अनुसार, एक बार पूरा होने के बाद, जेवर हवाई अड्डा एशिया का सबसे बड़ा होगा। यह 2030 तक यूपी को एक लाख करोड़ रुपये का राजस्व देगा।
  9. स्थान के दृष्टिकोण से जेवर हवाई अड्डे के कुछ स्पष्ट फायदे हैं। यह आगरा से सिर्फ 130 किलोमीटर, दिल्ली से लगभग 72 किलोमीटर, ग्रेटर नोएडा से 28 किलोमीटर और नोएडा से लगभग 40 किलोमीटर दूर होगा। यह दुनिया के सबसे सघन आबादी वाले क्षेत्र में बन रहा है। जहां आने वाले दशकों में एविएशन इंडस्ट्री के लिए अपार संभावनाएं हैं।
  10. IGI और जेवर हवाई अड्डों के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। ठीक यहीं देश के दोनों रेलवे फ्रेट कॉरिडोर (दिल्ली-मुम्बई और अमृतसर-कलकत्ता) का जंक्शन है। ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे और देश के सबसे शानदार यमुना एक्सप्रेस वे से कनेक्टिविटी है। यह अपने आप में दुनिया की चुनिंदा लोकेशन होगी।
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