जम्मू-कश्मीर 1947 में नहीं, सही मायने में आज आजाद हुआ :प्रोफेसर सुनील शर्मा

Updated Dec 29, 2019 04:41:02 IST | TriCity Today Reporter

आज जम्मू-कश्मीर को स्वायत्ता प्रदान करने वाली संविधान की धारा 370 को खत्म करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के इतिहास और भूगोल को बदल दिया है। वह अपनी चार दशक की राजनीतिक यात्रा में अनेकों बार कह चुके हैं कि भारत में दो विधान और दो प्रधान नहीं चल सकते। आज उन्होंने अपना वादा पूरा करके 120 करोड़ भारतीयों को एक नासूर से मुक्ति दी है।

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(लेखक प्रोफेसर सुनील शर्मा विधि के प्राध्यापक हैं।)

आज जम्मू-कश्मीर को स्वायत्ता प्रदान करने वाली संविधान की अनुच्छेद 370 को खत्म करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के इतिहास और भूगोल को बदल दिया है। वह अपनी चार दशक की राजनीतिक यात्रा में अनेकों बार कह चुके हैं कि भारत में दो विधान और दो प्रधान नहीं चल सकते। आज उन्होंने अपना वादा पूरा करके 120 करोड़ भारतीयों को एक नासूर से मुक्ति दी है।


आजादी के बाद से अब तक कश्मीर को सुरक्षित रखने के लिए भारत माता ने असंख्य सतूप खोए हैं। आज उन सबकी आत्माओं को शांति मिली होगी। उन हजारों विधवाओं के कलेजों को ठंडक मिली होगी, जिन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग रखने के लिए मांग में सिंदूर भरने का अधिकार गंवाया है। उन बेटों और बेटियों को सुकून मिला होगा, जो जीवन के हर मोड़ पर अपने शहीद पिता की फोटो देखकर रो रहे हैं। उन बहनों को इस रक्षा बंधन पर फख्र महसूस होगा, जो हर साल भाई की कलाई से महरूम रह जाती हैं। पुलवामा, उरी, अनंतनाम, पुंछ, राजौरी, करगिल, कुपवाड़ा, श्रीनगर के जंगलों और पहाड़ों में घायल होकर तड़पे भारतीय वीर सैनिकों की अंतिम सांसों ने आज ठंडक ली होगी।


पिछले सात दशकों से अनुच्छेद 370 का कलंक झेल रहे भारतीय संविधान को उस काली इबारत से मुक्ति मिल गई है। इससे बड़ा धिक्कार हमारे ऊपर क्या था कि जो भारत माता कि खिलाफ नारे लगाते थे, हम उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहे थे। जो हमारे दुश्मनों के मंसूबों को पूरा करने के लिए रोज नई साजिश रच रहे थे, हम उन पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च कर रहे थे। मुझे याद है वह पल जब मैं श्रीनगर पहुंचा और होटल जाने के लिए कार बुक की तो ड्राइवर ने पूछा, आप इंडिया से आए हैं? मैंने उसे जवाब देने के लिए सवाल किया, आप कहां खड़े हैं? वह बोला, जनाब हम तो अपने कश्मीर में खड़े हैं। मैंने उससे दूसरा सवाल किया, क्या कश्मीर हमारा नहीं है? वह कुटिल मुस्कान हंसा और गर्दन हिलाते हुए कार में बैठने का इशारा किया। मैंने उस व्यक्ति के साथ यात्रा की, होटल पहुंच गया, पांच दिन कश्मीर में रहा लेकिन न जाने क्यों किसी पर भरोसा नहीं हो रहा था।


अपना कश्मीर होने के बावजूद कश्मीर अपना नहीं लगता था। क्योंकि, अनुच्छेद 370 हर बार सोच के आड़े आ जाती थी। आज पाकिस्तान ने बयान दिया है कि उन्हें भारत सरकार का फैसला मंजूर नहीं है। ना हो मंजूर, क्या करेंगे? कुछ नहीं कर पाएंगे। अभी तक जब भी शांति बहाली पर बात होती थी, हम आतंकवाद पर बात करते थे और पाक सबसे पहले कश्मीर का राग अलापता था। अब मुद्दा खत्म। अगर पाक को परेशानी है तो कुछ करके दिखाए, मुंह तोड़ जवाब मिलेगा। यह मुद्दा अब हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।


सरकार का सबसे बड़ा कदम जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटना है। लद्दाख अब दमन-दीव, लखद्वीप और अंडमान की तरह केंद्र शासित क्षेत्र होगा। वहां कोई विधानसभा नहीं होगी। प्रशासक कामकाज देखेगा। जम्मू और कश्मीर को दिल्ली की तरह केंद्र शासित राज्य का दर्जा दिया गया है। वहां विधानसभा होगी लेकिन, लेफ्टिनेंट गवर्नर गृह मंत्रालय के निर्देशों पर काम करेगा। लद्दाख और जम्मू में पहले से शांति बहाल है। केवल कश्मीर वैली में अलगाववादी और आतंकवादी परेशानी पैदा करने का प्रयास करेंगे। वैली बमुश्किल एक चौथाई हिस्से में है। उसे संभालना कोई बड़ी बात नहीं रह जाएगी। अभी तक जम्म्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन बेहद असंतुलित था। जिसकी वजह से दो खानदान वहां की सत्ता पर काबिज हैं। वैली में कम जनसंख्या होने के बावजूद ज्यादा निर्वाचन क्षेत्र हैं। अब लद्दाख अगल हो जाने से जम्मू के विधानसभा क्षेत्र प्रभावशाली हो जाएंगे। वहां की राजनीति में संतुलन आएगा। मैं कहूंगा जम्मू-कमीर 1947 में नहीं सही मायने में आज आजाद हुआ है।

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