गौर सिटी में बिल्डर का हैरान करने वाला कारनामा, विकास प्राधिकरण ने भेजा नोटिस

Updated Dec 29, 2019 04:41:02 IST | Tricity Today Repoter

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बिल्डर जो कर दें, वह कम ही है। अब गौर सिटी में बड़ा ही अजीब मामला सामने आया है।

गौर सिटी में बिल्डर का हैरान करने वाला कारनामा, विकास प्राधिकरण ने भेजा नोटिस
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Gaur City

GREATER NOIDA WEST : नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बिल्डर जो कर दें, वह कम ही है। अब गौर सिटी में बड़ा ही अजीब मामला सामने आया है। जिस पर टाउनशिप के निवासियों ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से शिकायत की। विकास प्राधिकरण ने बिल्डर को नोटिस भेजकर 30 दिनों में जवाब देने का आदेश दिया है।

यह मामला सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन है हकीकत। गौर सिटी में जीसी-6 के निवासी रंजीत सिंह ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र देकर बताया कि उनकी सोसायटी में खुले स्पेस पर जहां घास और पेड़-पौधे उगाने थे, वहां बिल्डर ने इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर पक्का निर्माण कर दिया है। इस पक्के निर्माण के ऊपर प्लास्टिक की घास लगा दी है। जो दूर से देखने पर पार्क नजर आता है लेकिन असल में यह प्लास्टिक की घास है। ऐसा करके बिल्डर ने न केवल ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन किया है बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का भी उल्लंघन किया है। रंजीत सिंह के पत्र पर संज्ञान लेते हुए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के नियोजन विभाग ने गौर बिल्डर को नोटिस भेजा है।

प्राधिकरण की ओर से आदेश दिया गया है कि रंजीत सिंह की शिकायत पर जांच की गई। मौके पर पाया गया कि आपने घास, पेड़-पौधे और हरियाली विकसित करने की बजाय जमीन को पक्का कर दिया है और उस पर प्लास्टिक की घास लगाई गई है। लिहाजा, अगले 30 दिवस में प्लास्टिक की घास को हटाकर उसके स्थान पर वास्तविक ग्रीनरी विकसित करें और जवाब दें।

रंजीत सिंह का कहना है कि वह इस बारे में बिल्डर से मिलकर शिकायत कर चुके हैं। जब उसने सुनवाई नहीं की तो पहले भी विकास प्राधिकरण को कई बार शिकायत दे चुके हैं। लेकिन मामले में कोई सुनवाई और कार्रवाई नहीं की जा रही है। अब एक बार फिर विकास प्राधिकरण ने बिल्डर को नोटिस भेजा है, देखना है कि क्या कार्रवाई की जाएगी। रंजीत सिंह सवाल उठाते हैं कि गौर सिटी में नहीं की बराबर पेड़ पौधे और हरियाली है। जबकि, सोसाइटी में हजारों फ्लैट का निर्माण किया गया है। प्राधिकरण से पास करवाए गए नक्शों में कोई 1-2 हेरफेर नहीं, हजारों गड़बड़ियां की गई हैं। हम लोग यहां होटल के कमरे में किराए पर रहने नहीं आए हैं, यहीं अगले 50 वर्षों हमें रहना है। ऐसे में पेड़-पौधे और हरियाली के बिना यहां कौन जीवन जी पाएगा। बिल्डर ने सोचा कि उसे तो फ्लैट बनाकर और बेचकर निकल जाना है, परेशानी तो यहां रहने वालों को उठानी पड़ेगी।

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