स्वामी शिव वन जी महाराज ने किया ब्रह्मचारिणी का सुदंर चरित्र वर्णन

Updated Dec 29, 2019 04:41:02 IST | Mayank Tawer

ग्रेटर नोएडा के सुथियाना ग्राम में स्थित मां भगवती मंदिर में आज श्रीमद्भागवत कथा का दुसरे दिन के साथ भगवती मंदिर में मां भगवती की मूर्ति संस्थापक श्री कंचन वन महाराजजी का वार्षिक भंडारा हुआ। जिस मौके पर सैकडों श्रद्धालुओं एकत्रित हुऐं।

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स्वामी शिव वन जी महाराज ने किया ब्रह्मचारिणी का सुदंर चरित्र वर्णन

ग्रेटर नोएडा के सुथियाना ग्राम में स्थित मां भगवती मंदिर में आज श्रीमद्भागवत कथा का दुसरे दिन के साथ भगवती मंदिर में मां भगवती की मूर्ति संस्थापक श्री कंचन वन महाराजजी का वार्षिक भंडारा हुआ। जिस मौके पर सैकडों श्रद्धालुओं एकत्रित हुऐं।

स्वामी शिव वन जी महाराज ने आज नवरात्रि के दूसरे दिन में ब्रह्मचारिणी का बहुत ही सुदंर वर्णन किया हैं। उन्होनें बताया कि ब्रह्मचारिणी में ब्रह्म का अर्थ है तपस्या व चारिणी का अथार्त आचरण करने वाली देवी अर्थात मां ब्रह्मचारिणी नौ देवी में सबसे शांत स्वभाव की हैं, मां ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई सौ वर्षो तक कठिन तपस्या की इसी कारण मां का नाम मां ब्रह्मचारिणी पडा। उन्होनें बताया कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वाले व्यक्ति को इच्छा रूपी प्राप्ति होती हैं।

स्वामी शिव वन जी महाराज ने उमडेें श्रद्धालुओें बताया कि भगवती एक ही है लेकिन लोगोें और संसार के कल्याण कार्य के हेतु इनको अलग अलग रूप धारण करने पडे हैं। इसलिए नारी में शक्ति का रूप माना जाता हैं और हमेशा ही नारी का सम्मान करना चाहिए, जिस घर में नारी का अपमान होता है उस घर में देवी का निवास नही हो सकता। इसलिए हमेशा नारी का सम्मान करना चाहिए।

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